
क्या BJP एक दक्षिणपंथी पार्टी है?
भारतीय राजनीति में BJP को अक्सर “दक्षिणपंथी पार्टी” कहा जाता है। यह शब्द सुनते ही कुछ लोग इसे राष्ट्रवाद, धर्म और परंपरा से जोड़ते हैं, तो कुछ इसे असहिष्णुता और कठोरता का पर्याय मान लेते हैं। लेकिन सवाल यह नहीं कि BJP को कहा क्या जाता है, सवाल यह है कि वह वास्तव में कितनी और किस तरह दक्षिणपंथी है। इस लेख में उसी को सरल और संतुलित ढंग से समझने की कोशिश है।
सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि “दक्षिणपंथ” कोई एकरंगी विचार नहीं होता। वैश्विक राजनीति में दक्षिणपंथ आमतौर पर परंपरा, राष्ट्र, संस्कृति, मजबूत राज्य और सीमित सामाजिक प्रयोगों पर ज़ोर देता है। भारत में यह अवधारणा पश्चिम से अलग है, क्योंकि यहाँ धर्म, जाति, संस्कृति और राष्ट्र एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। BJP का दक्षिणपंथ इसी भारतीय संदर्भ से निकलता है, न कि यूरोपीय या अमेरिकी मॉडल से।
BJP की वैचारिक जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में हैं, जिसका मूल विचार सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है। यह विचार भारत को केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक सभ्यता मानता है। इसी कारण BJP का झुकाव राष्ट्र, परंपरा, सांस्कृतिक प्रतीकों और ऐतिहासिक पुनर्पाठ की ओर स्पष्ट दिखाई देता है। यह झुकाव उसे कांग्रेस जैसी मध्य-मार्गी या वाम-उदारवादी राजनीति से अलग करता है।
धार्मिक सवालों पर BJP का रुख उसे दक्षिणपंथी बनाता है, लेकिन यह पूर्ण धार्मिक कट्टरता नहीं है। पार्टी का जोर “हिंदुत्व” पर है, जिसे वह धार्मिक आस्था से अधिक सांस्कृतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत करती है। आलोचक इसे बहुसंख्यकवाद कहते हैं, जबकि समर्थक इसे लंबे समय से दबाई गई सांस्कृतिक अभिव्यक्ति मानते हैं। यहीं BJP का दक्षिणपंथी झुकाव सबसे ज़्यादा विवाद पैदा करता है।
आर्थिक नीतियों के स्तर पर BJP पूरी तरह दक्षिणपंथी नहीं है। शुद्ध दक्षिणपंथ आमतौर पर न्यूनतम सरकार और मुक्त बाजार का समर्थक होता है, लेकिन BJP की नीतियों में कल्याणकारी योजनाएँ, सब्सिडी, मुफ्त राशन और राज्य की सक्रिय भूमिका दिखाई देती है। यह उसे एक मिश्रित मॉडल बनाता है—जहाँ राष्ट्रवादी विचारधारा के साथ लोकलुभावन अर्थनीति जुड़ी है।
सामाजिक मुद्दों पर BJP का रुख अपेक्षाकृत रूढ़िवादी रहा है। परिवार, परंपरा, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता जैसे मुद्दों पर उसका ज़ोर उसे दक्षिणपंथ के करीब लाता है। वहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति और विविधता के सवालों पर पार्टी को अक्सर आलोचना झेलनी पड़ती है। यह आलोचना बताती है कि BJP का दक्षिणपंथ सांस्कृतिक रूप से मजबूत, लेकिन उदार लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ तनाव में रहता है।
हालाँकि यह भी सच है कि सत्ता में आने के बाद BJP ने अपने विचारधारात्मक कठोरपन को कई बार व्यवहारिक राजनीति से संतुलित किया है। गठबंधन राजनीति, वैश्विक कूटनीति, तकनीक और विकास की भाषा में पार्टी ने खुद को समय के अनुसार ढाला है। यह दर्शाता है कि BJP कोई स्थिर वैचारिक मूर्ति नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से लचीली पार्टी है।
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BJP को पूरी तरह शुद्ध दक्षिणपंथी कहना उतना ही सरलीकरण होगा, जितना उसे केवल विकासवादी पार्टी कहना।
वह सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से दक्षिणपंथी है,
आर्थिक रूप से मिश्रित है,
और राजनीतिक रूप से व्यावहारिक।
उसका झुकाव दक्षिणपंथ की ओर साफ़ है, लेकिन भारतीय संदर्भ में यह झुकाव एक स्थानीय, सभ्यतागत और चुनावी रूप ले चुका है।
इसलिए BJP को समझने के लिए उसे केवल “दक्षिणपंथी” के खांचे में नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की जटिलता के आईने में देखना ज़रूरी है।
क्योंकि भारत में विचारधाराएँ सीधी रेखा में नहीं चलतीं—
वे इतिहास, समाज और सत्ता के बीच से होकर गुजरती हैं।
Ankit Awasthi





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