
राज्य कर के अधिकारियों को न पदोन्नति मिली न एसीपी का लाभ
रवींद्र प्रकाश
- पदोन्नति नहीं तो एसीपी का लाभ तो दे सरकार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग प्रदेश का पहला ऐसा विभाग बन गया है जहां पर अधिकारियों कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति न मिल पाने से उधम घोर निराशा है, वर्ष 2015 बैच के राज्य कर अधिकारी करीब दस साल से पदोन्नति का इंतजार कर रहे है। वही पदोन्नति की फाइल लोक सेवा आयोग व जीएसटी मुख्यालय के बीच फुटबाल बनी हुई है। कमिशनर का कहना की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर राजस्व हानि हो जाए तो उसके लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं अधिकारियों को समय पर पदोन्नति न मिलने से इनको होने वाले आर्थिक नुकसान का जिम्मेदार कौन है इस पर राज्य सरकार को मंथन करना चाहिए और सरकार को यह भी सोचना चाहिए की आईएएस अधिकारियों की पदोन्नति हर साल पहली जनवरी को जिस तरह हो जाती है,उस तरह से विभागीय अधिकारियों की भी पदोन्नति होनी चाहिए। विभाग मे करीब 60 सहायक आयुक्त भी सालो से पदोन्नति के इंतजार मे बैठे है। इन समस्याओं को लेकर विभागीय सौघो ने भी कई पत्र शासन को दिए लेकिन वह भी धूल का फूल बनकर रह गए।
सरकारी सेवा में पद रिक्त न होने पर अगर सरकारी सेवक को 10 साल 16 या 26 साल की सेवा में पदोन्नति नहीं मिल पाती है तो उसको अगले पद का लाभ देने के लिए एसीपी की व्यवस्था है इसमें उसकी अगले पद का वेतनमान मिल जाता है लेकिन विभाग में 2022 से पहले वह बाद में कभी भी एसीपी का लाभ नहीं दिया गया है जिससे डीपीसी का इंतजार में बैठे अधिकारियों में घोर निराशा है वर्ष 2022 में तत्कालीन प्रमुख सचिव राज्य कर संजीव मित्तल ने अधिकारियों को एसीपी का लाभ दिया था उसके पहले वह बाद में कभी यह लाभ नहीं मिला आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है यह सवाल विभाग के अधिकारियों के दिल मे कौध रहाहै।यह समस्या संघ को उठानी तो जरूर चाहिए लेकिन कुछ वर्षों में संघो पर ऐसा दबाव बना की संघ भी सरकार के सामने बोन साबित हो रहे हैं और लोकतांत्रिक देश मे संघो की जुबान पर भी टेप लगता नजर आ रहा है ऐसा विभाग के अधिकारियों का मानना है।





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