
राष्ट्रीय युवा दिवस: स्वामी विवेकानंद का जीवन और प्रेरणा
हर साल 12 जनवरी के आसपास भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है, जो स्वामी विवेकानंद की जयंती पर आधारित है। यह दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण के महत्व को याद करने का अवसर है। स्वामी विवेकानंद का जीवन और उनके विचार आज भी हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
स्वामी विवेकानंद का जीवन और संघर्ष
स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनका जीवन केवल महान व्यक्तित्व की कहानी नहीं है, बल्कि एक साधारण मनुष्य के दर्द और संघर्ष की गवाही भी है। उनके कई पत्रों में उन्होंने अपने लंबे समय तक चलने वाले स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र किया—बुखार, थकान और लगातार यात्रा से उत्पन्न अस्वस्थता।
उनके एक पत्र में लिखा है:
"शरीर कमजोर है, पर मन में साहस अडिग है; यही मेरे जीवन का मार्गदर्शन है।"
यह तथ्य हमें यह दिखाता है कि महान व्यक्तित्व और कार्य केवल मानसिक साहस से ही संभव हैं; शरीर की कमजोरी भी विचार और कर्म की शक्ति को रोक नहीं सकती।
100 युवा: भारत के भविष्य के निर्माता
स्वामी विवेकानंद ने युवा शक्ति पर विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि यदि भारत के 100 युवा सही दिशा में अपना योगदान दें, तो देश विश्व में एक महान शक्ति बन सकता है। उन्होंने कहा:
"उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।"
आज के समय में यह संदेश और भी प्रासंगिक है। युवा शिक्षा, विज्ञान, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम से अपने देश को प्रगति और सम्मान की ऊँचाइयों तक पहुँचा सकते हैं।
गुरु रामकृष्ण परमहंस की सादगी और प्रभाव
स्वामी विवेकानंद के जीवन में उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का योगदान अमूल्य था। गुरु ने उन्हें केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि सरलता, प्रेम और मानवता की भावना भी सिखाई।
रामकृष्ण परमहंस ने कहा:
"सत्य, भक्ति और सेवा ही जीवन का सबसे बड़ा धन हैं।"
उनकी सादगी और सहजता आज के समय में दुर्लभ हैं। विवेकानंद में जो साहस और दृष्टि दिखाई देती है, वह सीधे उनके गुरु की शिक्षाओं का परिणाम थी।
युवा शक्ति और भारत का उज्जवल भविष्य
भारत आज एक युवा देश है। युवाओं में ऊर्जा, कल्पना और बदलाव लाने की क्षमता है। विवेकानंद ने अपने एक पत्र में लिखा:
"युवा ही राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं; उनके कर्म, विचार और धैर्य देश की पहचान बनाते हैं।"
यदि युवा इस शक्ति का उपयोग सही दिशा में करें, तो भारत न केवल आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रगति करेगा, बल्कि एक महान राष्ट्र के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा। उनका संदेश यह भी है कि व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान देना सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए।
राष्ट्रीय युवा दिवस हमें याद दिलाता है कि युवा शक्ति ही राष्ट्र का भविष्य है। स्वामी विवेकानंद का जीवन यह सिखाता है कि महानता केवल पद या दिखावे से नहीं, बल्कि संघर्ष, सादगी और सेवा से आती है।
उनके प्रेरक उद्धरण और पत्र आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। यदि युवा अपने ज्ञान, ऊर्जा और शक्ति को सही दिशा में लगाएँ, तो भारत हमेशा एक महान राष्ट्र के रूप में जाना जाएगा।
Ankit Awasthi





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