
वित्त वर्ष के अन्तिम माह मे बैठ गया राज्य जीएसटी का आन लाइन नेटवर्क
मीडिया के भारी दबाव के बाद शनिवार को चालू हो सका सिस्टम
वित्त वर्ष के अन्तिम दिनो मे कार्य से अधिक हो रही समीक्षा बैठके
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्यकर विभाग के सभी विभागीय पोर्टल और वेबसाइट सेवाएं 28 फरवरी से ठप पड़ी हैं । कामटेकस , विभागीय एमआईएस , एआई नोटिस मॉड्यूल एनफोर्समेंट ऐप्प ,स्कैनिंग , वेरिफिकेशन ऐप्प ,बकाया वैट आर सी डिटेल ,ई वे बिल डिटेल डाउनलोडिंग आदि सभी सेवाएं पूरी तरह से ठप हो गयी, ये तब हुआ जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त हो रहा है। हालांकि की मीडिया के माध्यम से जीएसटी मुख्यालय पर सवालो की मिसाईल दागी जाने के बाद शनिवार को दोपहर 3.31 बजे सिस्टम चालू हो गया। सूत्रो के अनुसी भुगतान न होने से संबंधित संस्था ने सेवाए बंद कर दी थी जिससे प्रदेश के किसी भी व्यापारी की कोई रसीद नही कट पा रही है । सभी अधिकारी कर्मचारी व व्यापारी परेशान रहे । जानकारी के अनुसार जीएसटी एन से मिले आंकड़ों को रिफाइंड करके कार्यवाही के लिए स्टेट जीएसटी के अधिकारियों को डाटा मिलता था जो कि बंद हो गया था। हैरत की बात यह है कि भुगतान न मिलने से कोई संस्था आगे अपडेट तो रोंक सकती थी लेकिन ऑनलाइन सिस्टम से पूरा डाटा गायब हो जाना किसी षडयंत्र के अंदेशा से इनकार नहीं किया जा सकता है । मार्च के महीने में ऐसी आफत पहली बार विभाग में आई है । अजूबा यह है कि राज्यकर के विभागीय कोई भी पोर्टल न चलने के बाद भी मुख्यालय से लेकर लोकल स्तर पर लगातार वीसी करके अधिकारियों के कार्य की तो समीक्षा जरूर होती रही लेकिन जिम्मेदार नौकर शाह जिनको की विभागीय अधिकारियों की बात बात पर चार्ज शीट बनाने की महारत हासिल है अगर कोशिश करते तो विभाग मे गैस.सिलेंडर की किल्लत जैसी समस्या न होती। वही अधिकारी मार्च माह में कदम ताल करते न नजर आते । मुख्यालय ,जोन ,संभाग ,जिले में लगातार मार्च माह में वीसी व बुलाकर मीटिंग होने से अधिकारी डाटा ही इकठ्ठा करने में अपनी पूरी ताकत लगाये हुए हैं । काम कब करें उन्हें समझ में नहीं आ रहा है। सूत्रो के अनुसार। संसासाधनो की कमी पर कभी भी कोई बैठक नही होती बल्कि मीडिया से ही खबर के सूत्र पूछे जाते है अगर साहब लोग अपने अधिकारियों से ही पूछ लेते तो मीडिया को कहने की जरुरत ही न पडती। विभाग मे अधिकांश खण्डों में फील्ड में जाने के लिए वाहनों की कमी, भट्ठों की जांच के लिए अधिकारी दूरदराज के क्षेत्रो मे कैसे जाएं।यही नही विभाग स्टेनो विहीन है ,सेवक विहीन ,पत्रवाहक विहीन ,अमीन विहीन ,बैठने की जगह भी विहीन है जरूर है लेकिन 10,(2) की नोटिस पाए अधिकारी प्रचूर मात्रा मे हैं।हाल ये है कि स्कूल खुले या न खुले बच्चों पर मास्टर साहब का जिला टापर बनाने का दबाव पूरा है।





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