
छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण के लिए जीईएफ-7 परियोजना को मिली स्पीड
दीप चन्द त्रिपाठी
लखनऊ। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के उद्देश्य से जीईएफ-7 (GEF-7) परियोजना के अंतर्गत महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस परियोजना में उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से छोटी जंगली बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दो महत्वपूर्ण समितियों का गठन किया गया है। इनमें 18 सदस्यीय स्टेट प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी तथा 15 सदस्यीय लैंडस्केप लेवल एडवाइजरी कमेटी शामिल हैं। स्टेट प्रोजेक्ट स्टीयरिंग कमेटी के चेयरमैन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव होंगे, जबकि लैंडस्केप लेवल एडवाइजरी कमेटी की अध्यक्षता दुधवा नेशनल पार्क, लखीमपुर खीरी के फील्ड डायरेक्टर करेंगे। भारत सरकार ने छोटी जंगली बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए नौ प्रकार की प्रजातियों को चिन्हित किया है। इनमें दुधवा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पाई जाने वाली चार प्रमुख प्रजातियां शामिल हैं। इनमें फिशिंग कैट (Prionailurus viverrinus), लेपर्ड कैट (Prionailurus bengalensis), जंगल कैट (Felis chaus) तथा रस्टी-स्पॉटेड कैट (Prionailurus rubiginosus) प्रमुख हैं। इन प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष योजनाएं संचालित की जाएंगी।
परियोजना के अंतर्गत चार प्रमुख घटकों पर कार्य किया जाएगा। इसमें सहायक नीतियों और योजनाओं को मजबूत करना, जंगली बिल्लियों के प्राकृतिक आवासों का वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को बढ़ावा देना तथा भारत-नेपाल और अरुणाचल प्रदेश क्षेत्र में नेपाल और भूटान के सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ सहयोग को मजबूत करना शामिल है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इस परियोजना के संचालन और क्रियान्वयन हेतु लगभग 85.32 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस धनराशि का उपयोग अनुसंधान, निगरानी, संरक्षण गतिविधियों और समुदाय आधारित कार्यक्रमों के संचालन में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना 2017-31 के अनुरूप जंगली बिल्लियों के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक रणनीति पर भी कार्य किया जाएगा। इस योजना के तहत प्राकृतिक आवासों के संरक्षण, अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी की रोकथाम, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और वैज्ञानिक निगरानी तंत्र को मजबूत करने जैसे कदम उठाए जाएंगे। हाल ही में 13 और 14 नवंबर 2025 को भूटान के पारो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में भी सीमा पार संरक्षण तंत्र को मजबूत करने, अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोक लगाने और मानव-वन्यजीव संपर्क से जुड़ी चुनौतियों पर साझा रणनीति बनाने पर सहमति बनी। अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना के माध्यम से छोटी जंगली बिल्लियों के संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।





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