
बर्ड डे: जब परों की रक्षा, भविष्य की रक्षा बन जाती है
पक्षी सिर्फ़ आकाश में उड़ती सुंदर आकृतियाँ नहीं हैं, वे जीवन के संतुलन के मूक रक्षक हैं। हर सुबह उनकी चहचहाहट हमें यह याद दिलाती है कि प्रकृति अभी जीवित है, साँस ले रही है। बर्ड डे केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि यह सवाल पूछने का अवसर है कि अगर पक्षी न रहें तो हमारा कल कैसा होगा। कीट नियंत्रण से लेकर बीजों के प्रसार तक, परागण से लेकर खाद्य-श्रृंखला के संतुलन तक—पक्षी पर्यावरण की उन डोरियों को थामे रखते हैं जिनके बिना मानव जीवन भी अस्थिर हो जाएगा।
आधुनिक विकास की अंधी दौड़ में हमने ऊँची इमारतें, कंक्रीट के जंगल और इलेक्ट्रॉनिक तरंगों से भरा आकाश तो बना लिया, लेकिन यह भूल गए कि आसमान भी किसी का घर होता है। मोबाइल टावर, काँच की इमारतें, पेड़ों की कटाई और प्रदूषण—इन सबका सबसे पहला और सबसे गहरा असर पक्षियों पर पड़ा है। जब पक्षी कम होते हैं, तो कीट बढ़ते हैं, फसलें प्रभावित होती हैं और जैव-विविधता टूटने लगती है। यानी पक्षियों की रक्षा करना दरअसल अपने भोजन, पानी और हवा की रक्षा करना है।
तमिल सिनेमा की चर्चित फिल्म रोबोट (और उसके विस्तार 2.0) में दिखा “पक्षीराज” का किरदार इसी सच्चाई का प्रतीक है। फिल्म में वह एक वैज्ञानिक है जो पक्षियों की मौत से व्यथित होकर व्यवस्था से लड़ता है। यह किरदार किसी काल्पनिक गुस्से से नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन के पक्षी-प्रेमियों और संरक्षणकर्ताओं से प्रेरित था—वे लोग जो वर्षों से यह चेतावनी देते रहे कि तकनीक अगर संवेदनशील न हुई तो प्रकृति जवाब देगी। पक्षीराज का ग़ुस्सा दरअसल हमारी सामूहिक लापरवाही का आईना है; उसका विद्रोह यह सवाल उठाता है कि क्या विकास का मतलब जीवन की क़ीमत पर आगे बढ़ना है?
पक्षी हमें विनम्रता सिखाते हैं—कम में जीना, बिना शोर के काम करना, और संतुलन बनाए रखना। वे न तो धरती के मालिक होने का दावा करते हैं, न ही प्रकृति को जीतने की कोशिश। फिर भी, वही सबसे पहले संकट में पड़ते हैं। बर्ड डे हमें याद दिलाता है कि संरक्षण सिर्फ़ कानूनों से नहीं, व्यवहार से होता है—पेड़ बचाने से, पानी के स्रोत साफ़ रखने से, काँच की इमारतों पर पक्षी-हितैषी डिज़ाइन अपनाने से, और अनावश्यक शोर व विकिरण को कम करने से।
संकल्प
आज बर्ड डे पर हम यह संकल्प लें कि हम पक्षियों के लिए जगह बनाएँगे—अपने घरों, शहरों और नीतियों में। हम पेड़ लगाएंगे, पानी रखेंगे, प्रदूषण घटाएँगे और ऐसे विकास का समर्थन करेंगे जो जीवन के साथ चले, उसके विरुद्ध नहीं। क्योंकि जब पक्षी सुरक्षित होंगे, तभी पर्यावरण सुरक्षित होगा—और तभी हमारा भविष्य भी।
Ankit Awasthi





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