
काशी में विशेष परंपरा के साथ मनाया जाएगा पर्व
वाराणसी। बसंत ऋतु का प्रमुख त्योहार होली वर्ष 2026 में फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाएगा। श्री सनातन ज्योतिष पद्धति के अनुसार विक्रम संवत 2082 और शाके 1947 के अंतर्गत होलिका दहन 2 मार्च 2026, सोमवार को होगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष अश्वलेशा/मघा नक्षत्र में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रात्रि 11:53 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा, जो भद्रा के पुच्छ में शुभ माना गया है। भद्रा काल सायं 5:18 बजे से प्रातः 4:56 बजे तक रहेगा।
काशी महावीर पंचांग के अनुसार 3 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण के उपरांत काशी की परंपरा के अनुसार भगवान शंकर पर गुलाल अर्पित किया जाएगा। वहीं सर्वत्र रंगोत्सव और बसंतोत्सव 4 मार्च 2026, बुधवार को प्रातः 8 बजे के बाद मनाना शुभ बताया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार होली का पर्व भक्त प्रह्लाद और असुर राजा हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ा है। कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप के अत्याचारों के बावजूद भक्त प्रह्लाद की भगवान विष्णु के प्रति अटूट श्रद्धा बनी रही। अंततः अग्नि में बैठी होलिका भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी इस पर्व को महत्वपूर्ण माना जाता है। मौसम परिवर्तन के दौरान बढ़ते जीवाणुओं को समाप्त करने के लिए होलिका दहन को उपयोगी बताया जाता है। साथ ही रंगों के प्रयोग को रंग-चिकित्सा से भी जोड़ा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार नारंगी रंग उत्साहवर्धक, नीला शीतलता प्रदान करने वाला, पीला मानसिक स्फूर्ति देने वाला तथा लाल रंग ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
इस प्रकार होली 2026 धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यताओं के साथ उत्साहपूर्वक मनाई जाएगी।





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