बेगम पारा "भारत की पहली “पिनअप गर्ल" - जिसकी तस्वीर के दीवाने थे अमेरिकन सोल्जर
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो सिर्फ फिल्मों की वजह से नहीं, बल्कि अपनी शख्सियत, अंदाज़ और समय से आगे की सोच के कारण याद किए जाते हैं। ऐसा ही एक नाम था Begum Para का। उन्हें भारत की पहली “पिनअप गर्ल” कहा जाता है। यह सिर्फ एक उपाधि नहीं थी, बल्कि उस दौर में उनकी लोकप्रियता, ग्लैमर और अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रतीक थी।
आज जब सोशल मीडिया और ग्लैमर इंडस्ट्री आम बात लगती है, तब यह याद रखना जरूरी है कि 1950 के दशक का भारत बेहद रूढ़िवादी समाज था। ऐसे समय में किसी भारतीय अभिनेत्री की तस्वीरें विदेशी मैगज़ीनों में छपना अपने आप में बड़ी घटना थी। बेगम पारा ने वही कर दिखाया।
क्यों कहा गया “भारत की पहली पिनअप गर्ल”?
साल 1951 में अमेरिका की मशहूर Life Magazine में बेगम पारा की कुछ तस्वीरें प्रकाशित हुईं। इन तस्वीरों को उस समय के हिसाब से काफी बोल्ड और ग्लैमरस माना गया। खास बात यह थी कि उस दौर में भारतीय अभिनेत्रियां आमतौर पर बहुत पारंपरिक छवि में दिखाई जाती थीं, लेकिन बेगम पारा का आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस अलग था।
उसी समय कोरिया युद्ध चल रहा था और बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक युद्ध में तैनात थे। कहा जाता है कि लाइफ मैगज़ीन में छपी बेगम पारा की तस्वीरें अमेरिकी सैनिकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई थीं। कई बैरकों में उनकी तस्वीरें लगी मिलती थीं। यही वह दौर था जब उन्हें “India’s First Pin-Up Girl” कहा जाने लगा।
एक न्यायधीश की बेटी से फिल्म स्टार बनने तक
बेगम पारा का जन्म एक शिक्षित और आधुनिक सोच वाले परिवार में हुआ था। उनके पिता मियां अहसान-उल-हक न्यायपालिका में उच्च पद पर थे और विभिन्न रियासतों में उनकी नियुक्ति होती रहती थी। नौकरी के अंतिम वर्षों में वे राजस्थान में मुख्य न्यायधीश रहे।
लगातार तबादलों के कारण परिवार ने बेगम पारा की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए उन्हें अलीगढ़ के हॉस्टल में भेज दिया। वहीं रहकर उन्होंने बारहवीं तक शिक्षा प्राप्त की। उस समय लड़कियों को हॉस्टल भेजना भी बड़े खुले विचारों की निशानी माना जाता था।
उनके भाई कोलकाता में Bata में काम करते थे और उन्होंने बंगाली अभिनेत्री प्रोतिमा दासगुप्ता से प्रेम विवाह किया था। परिवार ने इस रिश्ते का विरोध नहीं किया। बाद में यही रिश्ता बेगम पारा को फिल्मों की दुनिया तक ले आया।
फिल्मों में एंट्री: एक संयोग जिसने इतिहास बना दिया
जब बेगम पारा छुट्टियां बिताने मुंबई आईं, तब उनकी भाभी प्रोतिमा दासगुप्ता फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय थीं। इसी दौरान Baburao Pai की नजर बेगम पारा पर पड़ी। उन्होंने अपनी फिल्म चांद (1944) में उन्हें हीरोइन बनने का प्रस्ताव दिया।
यहीं से शुरू हुआ उनका फिल्मी सफर।
1940 और 50 के दशक में उन्होंने लगातार कई फिल्मों में काम किया। सोहनी महिवाल, नीलकमल, शहनाज़, दादा, उस्ताद पेड्रो, लैला मजनूं, सौ का नोट और आदमी जैसी फिल्मों ने उन्हें पहचान दिलाई।
उनकी खूबसूरती की चर्चा इतनी होती थी कि उस दौर के कई फिल्मी पत्रकार उन्हें “सबसे ग्लैमरस भारतीय अभिनेत्री” तक कहते थे। मशहूर फोटोग्राफर James Burke द्वारा खींची गई उनकी तस्वीरें आज भी भारतीय सिने इतिहास की प्रतिष्ठित तस्वीरों में गिनी जाती हैं।
नासिर खान से प्यार और फिल्मों से दूरी
फिल्म लुटेरा और बाद की कुछ फिल्मों में बेगम पारा के साथ अभिनेता Nasir Khan नजर आए, जो महान अभिनेता Dilip Kumar के छोटे भाई थे। साथ काम करते-करते दोनों करीब आए और 1958 में उन्होंने शादी कर ली।
शादी के बाद बेगम पारा ने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली। बाद में दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वे उस समय अपना घर और बच्चों की परवरिश संभालना चाहती थीं।
अधूरी फिल्म और जिंदगी का सबसे कठिन दौर
1974 में उन्होंने फिल्म ज़िद का निर्माण शुरू किया। इस फिल्म में Sanjay Khan, Saira Banu और Danny Denzongpa जैसे कलाकार शामिल थे। फिल्म के निर्देशक उनके पति नासिर खान थे।
फिल्म की शूटिंग काफी आगे बढ़ चुकी थी, लेकिन लोकेशन देखने गए नासिर खान को अमृतसर में दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। इस घटना ने बेगम पारा की जिंदगी बदल दी। उनकी जमा पूंजी फिल्म में लग चुकी थी और फिल्म अधूरी रह गई।
इसी कठिन समय में वे कुछ समय के लिए पाकिस्तान भी गईं, क्योंकि उनके कई रिश्तेदार वहां बस चुके थे। लेकिन वहां का सामाजिक माहौल उन्हें रास नहीं आया और वे वापस भारत लौट आईं।
अमृता सिंह से क्या रिश्ता था?
बहुत कम लोग जानते हैं कि अभिनेत्री Amrita Singh बेगम पारा की रिश्तेदार थीं। बेगम पारा की बहन ज़रीना की बेटी थीं Rukhsana Sultana, जो बाद में संजय गांधी के करीबी होने के कारण काफी चर्चित रहीं। रुख़साना सुल्ताना ही अमृता सिंह की मां थीं।
यानी बेगम पारा, अमृता सिंह की रिश्ते में मौसी लगती थीं।
बेटे अय्यूब खान ने आगे बढ़ाई अभिनय की विरासत
बेगम पारा के तीन बच्चे थे। उनके छोटे बेटे Ayub Khan ने बाद में टीवी और फिल्मों में पहचान बनाई। उन्होंने कई लोकप्रिय धारावाहिकों और फिल्मों में काम किया।
50 साल बाद वापसी
करीब पांच दशक तक फिल्मों से दूर रहने के बाद बेगम पारा ने Sanjay Leela Bhansali की फिल्म Saawariya से वापसी की। फिल्म में उनका छोटा लेकिन यादगार किरदार था।
यह उनकी आखिरी फिल्म भी साबित हुई। 10 दिसंबर 2008 को 82 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
बेगम पारा सिर्फ अभिनेत्री नहीं, एक दौर की निशानी थीं
बेगम पारा उस पीढ़ी की अभिनेत्री थीं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलते देखा। वे ऐसे समय में ग्लैमर, आत्मविश्वास और आधुनिकता की प्रतीक बनीं जब भारतीय समाज महिलाओं की स्वतंत्र छवि को सहजता से स्वीकार नहीं करता था।
आज भी जब भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर की चर्चा होती है, तो बेगम पारा का नाम एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में लिया जाता है जिसने अपने अंदाज़ से यह साबित किया कि स्क्रीन पर मौजूदगी सिर्फ अभिनय से नहीं, व्यक्तित्व से भी बनती है।
Ankit Awasthi





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