
‘मेलुहा पर रणवीर सिंह की नजर, लेकिन किताबों से फिल्मों का रिश्ता नया नहीं
Ranveer Singh इन दिनों अपने बड़े स्केल वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर लगातार चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर अब लेखक Amish Tripathi के चर्चित उपन्यास The Immortals of Meluha को बड़े पर्दे पर लाने की तैयारी कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि रणवीर ने इस किताब के स्क्रीन राइट्स अपनी कंपनी “मां कसम फिल्म्स” के लिए खरीदे हैं और इस प्रोजेक्ट में वह भगवान शिव से प्रेरित मुख्य किरदार निभाना चाहते हैं।
अगर यह प्रोजेक्ट अपने पूरे विजुअल स्केल और पौराणिक दुनिया के साथ बनता है, तो यह भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े फैंटेसी फ्रेंचाइज़ प्रयासों में शामिल हो सकता है। हालांकि अभी स्क्रिप्ट और डायरेक्टर को लेकर आधिकारिक ऐलान बाकी है, लेकिन चर्चा इतनी जरूर है कि रणवीर इस कहानी को सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़े सिनेमैटिक यूनिवर्स की तरह देख रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कई साल पहले इस किताब पर फिल्म बनाने की चर्चा Sanjay Leela Bhansali के साथ भी जुड़ी थी, लेकिन वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब माना जा रहा है कि रणवीर इस ड्रीम प्रोजेक्ट को नए तरीके से विकसित करना चाहते हैं।
किताबों से फिल्मों का यह रिश्ता नया नहीं
हालांकि सोशल मीडिया पर इस खबर को “नई शुरुआत” की तरह देखा जा रहा है, लेकिन सच यह है कि किताबों पर फिल्में बनाने का चलन भारतीय और वैश्विक सिनेमा में दशकों पुराना है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब बड़े बजट और फ्रेंचाइज़ मॉडल ने इसे फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
भारत में किताबों से निकली कई बड़ी फिल्में
भारतीय सिनेमा लंबे समय से साहित्य से प्रेरणा लेता रहा है।
Guide प्रसिद्ध लेखक R. K. Narayan के उपन्यास पर आधारित थी और आज भी हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है।
Devdas की जड़ें Sarat Chandra Chattopadhyay के मशहूर उपन्यास में थीं, जिसे अलग-अलग दौर में कई बार फिल्माया गया।
इसी तरह:
3 Idiots — Five Point Someone से प्रेरित
Kai Po Che! — The 3 Mistakes of My Life पर आधारित
The Namesake — The Namesake से निकली कहानी
Pinjar — Pinjar पर आधारित
इन फिल्मों ने साबित किया कि मजबूत साहित्यिक दुनिया को अगर सही सिनेमाई ट्रीटमेंट मिले, तो दर्शक उससे गहराई से जुड़ते हैं।
विदेशों में किताबों ने बनाए अरबों डॉलर के सिनेमैटिक यूनिवर्स
अगर वैश्विक सिनेमा की बात करें, तो वहां किताबों पर आधारित फिल्मों ने पूरी इंडस्ट्री की दिशा बदल दी।
Harry Potter and the Philosopher's Stone से शुरू हुई Harry Potter फ्रेंचाइज़ ने दुनिया का सबसे बड़ा फैन बेस खड़ा किया।
The Lord of the Rings: The Fellowship of the Ring ने J. R. R. Tolkien की काल्पनिक दुनिया को इस स्तर पर स्क्रीन पर उतारा कि फैंटेसी सिनेमा की परिभाषा ही बदल गई।
इसके अलावा:
Dune
The Hunger Games
The Chronicles of Narnia: The Lion, the Witch and the Wardrobe
Game of Thrones
जैसे प्रोजेक्ट्स ने दिखाया कि किताबें केवल कहानी नहीं देतीं, बल्कि पूरी दुनिया, राजनीति, संस्कृति और किरदारों का विशाल कैनवास देती हैं।
आखिर फिल्म इंडस्ट्री फिर किताबों की ओर क्यों लौट रही है?
इसकी कई वजहें हैं।
पहली वजह है—पहले से मौजूद फैन बेस।
जब कोई उपन्यास करोड़ों लोग पढ़ चुके हों, तो फिल्म के लिए शुरुआती दर्शक तैयार मिल जाते हैं।
दूसरी वजह है—वर्ल्ड बिल्डिंग।
आज दर्शक सिर्फ दो घंटे की कहानी नहीं, बल्कि “यूनिवर्स” देखना चाहते हैं। यही कारण है कि पौराणिक, फैंटेसी और साइंस फिक्शन किताबें फिल्म निर्माताओं को आकर्षित कर रही हैं।
तीसरी वजह OTT और ग्लोबल मार्केट है।
अब भारतीय फिल्में केवल घरेलू दर्शकों के लिए नहीं बन रहीं। अगर “मेलुहा” जैसा प्रोजेक्ट सफल होता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पेश किया जा सकता है।
रणवीर के लिए यह सिर्फ फिल्म नहीं, बड़ा जोखिम भी होगा
Ranveer Singh ऊर्जा और बड़े किरदारों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन “मेलुहा” जैसा प्रोजेक्ट केवल स्टार पावर से नहीं चलेगा। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि:
विजुअल इफेक्ट्स कितने विश्वसनीय हैं
पौराणिक भावनाओं को कितना संतुलित रखा जाता है
कहानी कितनी सिनेमाई बन पाती है
और किरदारों में कितनी गहराई दिखाई जाती है
क्योंकि किताबों के प्रशंसकों की उम्मीदें हमेशा ज्यादा होती हैं।
दीपिका पादुकोण की एंट्री की चर्चा क्यों?
अमीश त्रिपाठी की कहानी में सती का किरदार बेहद मजबूत माना जाता है। ऐसे में अगर Deepika Padukone इस प्रोजेक्ट से जुड़ती हैं, तो फिल्म को एक बड़ा स्टार आकर्षण मिल सकता है।
रियल लाइफ कपल को शिव-सती के रूप में देखने का विचार पहले से ही सोशल मीडिया पर चर्चा में है। हालांकि फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भारतीय सिनेमा अब “मिथोलॉजिकल यूनिवर्स” की ओर?
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सिनेमा में पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियों की मांग तेजी से बढ़ी है। बड़े स्केल, विजुअल इफेक्ट्स और सांस्कृतिक पहचान के मिश्रण ने इस जॉनर को फिर से मुख्यधारा में ला दिया है।
ऐसे में अगर “मेलुहा के मृत्युंजय” सही तरीके से बनती है, तो यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए नए फ्रेंचाइज़ मॉडल की शुरुआत भी बन सकती है।
लेकिन इतिहास यही कहता है कि किताबों को पर्दे पर उतारना हमेशा आसान नहीं रहा। दर्शक तब ही स्वीकार करते हैं जब फिल्म किताब की आत्मा को बचाए रखते हुए उसे नए माध्यम की ताकत भी दे सके।
Ankit Awasthi





Leave A Comment
Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).