
संघो से संवाद का रास्त बंद होने बढी समस्याएं
एक साल मे संघो के साथ हुई शासन की हुई मात्र एक बैक
लखनऊ। लोकतांत्रिक व्यवस्था मे अधिकारियों/ कर्मचारियों व शासन सरकार के बीच संघ सेतु का काम करता है, लेकिन अगर इस सेतु को ही तोड दिया जाए तो कार्य स्थल पर समस्याओं का आना लाजिमी है।
उतर प्रदेश राज्य कर विभाग मे एक साल के दौरान लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुनी गयी संघो की कार्यकारिणी से ऐसी दूरी बनायी गयी कि पूरे विभाग का दम घुट गया। विभागीय सूत्रो के अनुसार साल भर मे संघो के साथ मात्र एक ही बैठक हुई, जिसमे भी.सीधी भर्ती के अधिकारियों के सबसे बडे संघ वाणिज्य कर सेवासंघ जो की विभाग की स्थापना से चल रहा है। शासन इसके अधिवेशन के लिए दो दिन का अवकाश भी देता रहा । इसके अध्यक्ष व महासचिवो को वार्ता के लिए बुलाया जाता रहा, इस संघ की मान्यता पर ही सवाल खडे कर दिए गए। बात यही पर समाप्त नही हो जाती है। सभी संघो के पदाधिकारियों से जिनसे वार्ता होनी चाहिए थी, उनको भी निशाना बना जाता रहा। ये हाल तब रहा जबकि मुख्य सचिव का आदेश है कि संघो के साथ हर माह बैठक होनी चाहिए। इन हालातों का परिणाम यह हुआ कि मेडिकल ग्राउंड के तबादले, कपल पालिसी जो कि सरकार की प्राथमिकता मे शामिल है सब हाशिए पर आ गए। हालत यह है कि दर्जनों प्रत्यवेदन आज भी शासन मे लम्बित पडे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगर उनके नाम पर कोई गुमनाम पत्र के माध्यम से शिकायत हो जाए तो निलंबन की कार्रवाई मे देरी नही होती है, लेकिन उनके प्रत्यवेदन पर कोई विचार नही होता। ये बात गाजियाबाद के उपायुक्त गिरीश कुमार के सोमवार को हुए निधन के बाद चर्चा मे आयी। हालांकि अब विभाग मे नयी ऊर्जा का संचार हुआ है कयोंकि नवनियुक्त प्रमुख सचिव कामिनी रतन चौहान सभी संघो के पदाधिकारियों व पत्रकारों से मिलकर समस्याओं कख समाधान कर विभाग मे कार्यक्रम का महौल बना रही है। अभी हाल ही मे सरकार के निर्देश पर सभी जोनो मे हुए व्यापारी संवाद कार्यक्रम मे लखनऊ के व्यापारियों ने प्रमुख सचिव के सामने अपनी समस्याएं रखी। वही कानपुर के व्यापारियों ने कमिशनर डा नितिन बंसल के सामने सचल दल का लक्ष्य कम करने की बात रखी जिससे लक्ष्य को पूरा करने के लिए उनके माल को मानवीय चूक होने पर भी न पकडा जाए।





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