
अवमानना याचिका दायर होते ही एक और राज्य कर अधिकारी बहाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के मुजफ्फरनगर जोन की एसआईबी विंग मे तैनात राज्य कर अधिकारी हिमांशु सुधीर लाल ने 30 जुलाई 2025 को हुई निलंबन की कार्रवाई को दिनांक 16/9/25 को उच्च न्यायालय मे चुनौती दी थी। कोर्ट ने उनके निलंबन की कार्रवाई पर स्थगन आदेश दे दिया, लेकिन इसके बाद भी उनकी बहाली नही हुई, जिसके बाद हिमांशु सुधीर लाल ने कोर्ट के आदेश की अवमानना की अपील इलाहाबाद हाई कोर्ट मे दायर की जिसकी सुनवाई मंगलवार को होनी है, इससे पहले 14 जनवरी 2026.को राज्य जीएसटी आयुक्त ने राज्य कर अधिकारी का बहाली का आदेश जारी कर दिया। हिमांशु सुधीर लाल अपर आयुक्त ग्रेड वन इलावा जोन मे बहाल किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी। उनको राजेश जैन एकजिम इंडिया मुजफ्फरनगर नगर की शिकायत पर निलंबित किया गया था। गौरतलब है विभाग मे एक साल के दौरान 65 अधिकारियों को निलंबित किया गया। जिसमे से 30 अधिकारियों के निलंबन पर हाई कोर्ट ने स्थगन आदेश दिया, लेकिन शासन ने अभी तक मात्र 4 अधिकारियों को बहाल किया । इसमे से तीन वह अधिकारी हैं जिन्होंने कोर्ट मे अवमानना याचिका दायर की शेष वे अधिकारी जिन्होंने अवमानना याचिका दायर नही की है उनके मामले मे कोर्ट के आदेश को परीक्षण के नाम पर फिलहाल रोक कर रखा गया है। इन अधिकारियों को सरकार की नियमावली के तहत जीवन यापन के लिए आधा वेतन दिया जा रहा है। हालांकि कोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के की तिथि से यह अपनी सेवाएं देने के कानूनी हक दार ह़ो गए है, जिसके क्रम मे इन अधिकारियों ने अपनी योगदान आख्या भी जोन कार्यालय, मुख्यालय व शासन को सौप दी है। इसलिए ये अधिक आगे चलकर अपने बकाया वेतन को पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाएंगे। एरियर मिलने के बाद यह बात साफ हो जाएंगी कि विभाग ने अधिकारियों को बिना काम के वेतन दिया। यहां सबसे हैरत करने की बात यह है कि एक तरफ विभाग अपने अधिकारियों को जांचो को विधिक मजबूती देने के लिए साक्ष्यो के साथ कार्रवाई करने की नसीहत देता है, वही अधिकारियों को निलंबित करते समय कितनी विधिक प्रक्रिया का पालन किया गया है कोर्ट ने 30 अधिकारियों के निलंबन की प्रक्रिया मे कमी पाने के बाद 30 अधिकारियों के निलंबन पर स्थगन आदेश जारी कर दिया। विभाग मे हुई लगातार निलंबन की कार्रवाई से राजस्व मे वृद्धि तो नही हुई लेकिन विभाग पर भ्रष्टाचार का धब्बा जरूर लग गया कयोंकि आम जनता निलंबन जांच की प्रक्रिया है यह बात नही समझती बल्कि निलंबित व्यक्ति भ्रष्टाचार मे लिप्त है, ये धारणा जरूर बना लेता है। ऐसे मे विभाग मे इतने सारे अधिकारियों के निलंबित होने से कोई नायक फिल्म का अनिल कपूर बना हो या न बना हो लेकिन विभाग के दामन पर जरूर कई धब्बे लग गए।





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