
प्रशिक्षण कार्यक्रम के जरिए राज्य कर विभाग ने कराया अपने पन का अहसास
रवींद्र प्रकाश
लखनऊ। कहते है कि किसी के द्वारा कहां गया एक शब्द कि मैं हूं न अकेले पड चुके व्यक्ति के जीवन मे नई ऊर्जा का संचार करता है। नई ऊर्जा का संचार करने वाले इन दो शब्दों को राज्य कर विभाग के वाणिज्य कर प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में साकार होते देखा गया। जहां अन्य सरकारी विभागों में सेवानिवृत होने वाले अधिकारी कर्मचारियों को अपने देय भतो , पेशन प्रक्रिया के लिए महिनो कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह सोचकर अधिकारी एवं कर्मचारी सेवा निवृत्ति से पूर्व ही घोर निराशा में इस बात को लेकर डूब जाते हैं कि सेवा निवृत होने के बाद विभाग में उनकी सुनवाई होगी कि नहीं कई मामलों में तो ऐसा भी देखा गया है कि सरकारी कर्मचारियों को अपने देय व पेंशन के कोर्ट की शरण तक में जाना पड़ता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के प्रशिक्षण केंद्र में अपरायुक्त भूपेंद्र शुक्ला के मार्गदर्शन में छह माह के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पेंशन से लेकर चिकित्सा भत्ता, ग्रेजिएटी व अन्य देय का भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया विस्तार से बतायी गयी। यही नही विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि अगर सेवाकाल के दौरान कोई जांच लम्बित है तो ऐसे मामलो मे कया प्रक्रिया करनी होगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम मे औपचरिकताओ को पूरी करने मे किन किन दस्तावेजों की जरूरत होगी इसकी भी जानकारी विशेषज्ञों द्वारा दी गई। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विभाग की नवनियुक्त प्रमुख सचिव कामिनी रतन चौहान कि उस विचारधारा को आगे बढ़ता है जिसमें उन्होंने विभाग के कमिश्नर के पद पर रहते हुए अपने अधिकारी एवं कर्मचारियों की समस्याओं को दूर करने के लिए एवं उनके भुगतानों को करवाने की प्रक्रिया के लिए सेवा माह का आयोजन किया था। वही दूसरे विभागों मे मानवीय संवेदनाओं को हाशिए पर रखते हुए केवल वही प्रशिक्षण दिए जाते हैं जिससे विभाग को आर्थिक लाभ होता है, जिस विभाग मे बडे दिल के अभिभावक स्वरूप उच्च अधिकारी होते है ऐसे विभागो मे ही ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम हो पाते है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सरकारी कार्य प्रणाली मे मील का पत्थर साबित होगा ऐसा कहना गलत नही होगा।





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