
राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की बैठक, संरक्षण को लेकर अहम फैसले
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की छठी बैठक सोमवार को पारिजात सभागार, वन मुख्यालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राज्य की आर्द्रभूमियों के संरक्षण एवं प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत 14 गंगा जनपदों—अलीगढ़, बदायूँ, कासगंज, प्रयागराज, कानपुर नगर, चंदौली, फर्रुखाबाद, उन्नाव, भदोही, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, बलिया, बिजनौर तथा अमरोहा—में स्थित लगभग 750 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली 23 प्रमुख आर्द्रभूमियों को आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचित किए जाने हेतु प्राधिकरण ने संस्तुति प्रदान की।
इसके अतिरिक्त, तकनीकी समिति द्वारा प्रस्तावित महराजगंज, बलरामपुर, अयोध्या, संतकबीरनगर एवं सिद्धार्थनगर जनपदों में 1130.653 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली 28 आर्द्रभूमियों को भी उक्त नियमों के अंतर्गत अधिसूचित किए जाने पर प्राधिकरण ने सहमति जताई।
बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने बताया कि राज्य में अब तक एक आर्द्रभूमि पूर्ण रूप से अधिसूचित की जा चुकी है, जबकि 9 जनपदों की 50 आर्द्रभूमियों में से 20 को प्रारंभिक स्तर पर अधिसूचित किया जा चुका है। शेष 30 आर्द्रभूमियों की अधिसूचना की प्रक्रिया प्रचलित है। यह पहल आर्द्रभूमियों के संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
बैठक में प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग वी हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमूरी, सचिव बी० चन्द्रकला, राज्य जैव विविधता बोर्ड के सचिव बी० प्रभाकर तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव संजीव कुमार सहित सिंचाई, ग्राम विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्राधिकरण ने भविष्य में भी आर्द्रभूमि संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठाने का संकल्प दोहराया |





Leave A Comment
Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).