
राज्य कर के 250 अधिकारियों की निष्ठा संदेह मे
रवींद्र प्रकाश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के लगभग 250 अधिकारियों की निष्ठा पर पूर्व प्रमुख सचिव राज्य कर एम देवराज जाते-जाते सवालिया निशान लग गए हैं यही नहीं इन अधिकारियों की वार्षिक प्रविष्ट पर लिखा गया है कि अधिकारियों की निष्ठा पर संदेह है पर यह संदेह किन कारणो व आचरण से है उनको ऐसा आत्मज्ञान क्यों हुआ इस पर आज भी रहस्य बना हुआ है फिलहाल विभाग के अधिकारी घोर निराशा में हैं और इसको लेकर हर बुधवार को नवनियुक्त प्रमुख सचिव कामिनी चौहान रतन के दरबार में फरियाद लेकर आते हैं। हालांकि इन अधिकारियों को शासन स्तर से कोई न्याय मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है अन्त में न्यायालय की शरण में जाना ही एकमात्र रास्ता बचा है ऐसा इसलिए है क्योंकि जब कोर्ट के ऑर्डर के बावजूद विभाग के तमाम अधिकारी जिनको प्रमुख सचिव राज्य कर एम देवराज के कार्यकाल में निलंबित किया गया था और इन अधिकारियों ने निलंबन की कार्रवाई को न्यायालय में चुनौती दी थी जिसमें सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि इन अधिकारियों के निलंबन में विधिक प्रक्रिया का प्रयोग नहीं किया गया है और इनको अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया इस आधार पर 30 से अधिक अधिकारियों के निलंबन पर कोर्ट ने स्थगन आदेश लगा दिया , जिसका आदेश राज्य कर मुख्यालय व शासन में पहुंच जाने के बावजूद आज तक इन अधिकारियों की बहाली नहीं हो सकी। इन अधिकारियों की निराशा तब और बढ़ जाती है जबकि नव नियुक्त प्रमुख सचिव से कई बार मुलाकात करने के बावजूद अभी तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं हो सका है। अगर ऐसा कहा जाए की जिन अधिकारियों की निष्ठा पर सवाल उठाए गए हैं वह भी ठीक इसी तरह है जैसे तमाम अधिकारियों का निलंबन जिसको कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया तो गलत नही होगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस.बात पर ध्यान देना होगा कि उनके नियंत्रण मे आने वाले विभाग के इतने अधिकारियों की निष्ठ पर सवाल कैसे खडे हुए जबकि अधिकारियों के उच्च अधिकारियों व कमिशनर ने इनको उत्कृष्ट प्रविष्टि दी है। अब जबकि इन अधिकारियों की पदोन्नति बाधित हो रही तो अपनी निष्ठा को साबित करने के लिए कौन सी अग्नि परीक्षा देनी होगी इसको लेकर अधिकारी मंथन कर रहे है। जिक्र जरुरी है कि इसमे तमाम अधिकारी ऐसे भी है जिनको पूरे सेवाकाल मे एक भी नोटिस नही मिला तो इनकी निष्ठा की जांच के लिए इनके ब्लैड सैम्पल किस लैब मे फेल.हुए जिससे इनकी निष्ठा पर सवाल. खडे हुए इस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ध्यान देना होगा। यही नही अगर विभाग के इतने.अधिकारी भ्रष्टाचार मे लिप्त थे तो नियंत्रण किसका कमजोर था इसकी भी समीक्षा किए जाने की जरुरत है।





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