
यूपी बजट काग़ज़ी विकास का दस्तावेज़” — दीपक सिंह का सरकार पर तीखा हमला
लखनऊ | उत्तर प्रदेश सरकार के बजट और विकास दावों पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। वरिष्ठ नेता दीपक सिंह ने राज्य सरकार के बजट को “सत्यम कंप्यूटर के बी. रामलिंगा राजू की बैलेंसशीट” से तुलना करते हुए इसे काग़ज़ी दावों का दस्तावेज़ बताया। उन्होंने कहा कि “काग़ज़ों में सब ठीक दिखता है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त बिल्कुल अलग है। यह विकास का नहीं, बल्कि काग़ज़ी दावों और ज़मीनी नाकामी का दस्तावेज़ है।”
दीपक सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश का किसान आज भी घाटे में है। डीज़ल, बिजली, खाद और बीज की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे खेती की लागत तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन फसलों के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े। उन्होंने कहा कि “मुनाफ़ा घट रहा है, फिर भी सरकार काग़ज़ों में किसान की आय बढ़ने का दावा कर रही है।” युवा बेरोज़गारी को लेकर भी उन्होंने सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन नई भर्तियाँ नहीं की गईं। लाखों सरकारी पद खाली पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो नए बड़े शिक्षण संस्थान खोले गए और न ही सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत किया गया, जिससे आम परिवार महंगी निजी शिक्षा लेने को मजबूर है। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी उन्होंने चिंता जताई। उनके अनुसार, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और स्टाफ की भारी कमी है। साथ ही पूर्व में स्थापित कई उद्योग बंद हो चुके हैं, जिससे रोजगार के अवसर घटे हैं। दीपक सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि कई विभाग पिछले बजट में आवंटित धनराशि को पूरी तरह खर्च नहीं कर पाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार कुल बजट का लगभग 50 प्रतिशत ही खर्च कर सकी है। नगर विकास विभाग में 47 प्रतिशत, लोक निर्माण विभाग (PWD) में 60 प्रतिशत और नमामि गंगे योजना में मात्र 39 प्रतिशत खर्च का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “सरकार बजट तो पेश कर रही है, लेकिन उसे खर्च नहीं कर पा रही।”
उन्होंने CAG की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कई विभागों में अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए। साथ ही कहा कि लोकायुक्त द्वारा भ्रष्टाचार के मामलों में दी गई सिफारिशों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
“हर घर जल” योजना पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना “देश का सबसे बड़ा घोटाला बनने की ओर बढ़ रही है”, जहाँ काग़ज़ों में काम पूरा दिखाया जा रहा है, लेकिन ज़मीन पर पानी और जवाबदेही दोनों की कमी है।
दीपक सिंह ने निष्कर्ष में कहा कि यह बजट न तो किसानों को राहत देता है, न युवाओं को रोजगार, और न ही शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूती देता है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि “जनता को अब काग़ज़ी दावों की नहीं, ठोस परिणामों की ज़रूरत है।”
हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।





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