
राज्य कर के अपर आयुक्त ग्रेड 2 अरुण शंकर राय हुए बहाल
रवींद्र प्रकाश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त ग्रेड 2 अरुण शंकर राय को उत्तर प्रदेश शासन ने बांदा के ग्रेड 2 अपील के पद पर बहाल कर दिया है।
श्री राय को दस साल पुराने मामले मे 11 सितंबर 2025 को तत्कालीन प्रमुख सचिव राज्य कर एम देवराज ने निलंबित किया था। अरुण शंकर राय ने निलंबन की कार्रवाई को कोर्ट मे चुनौती दी थी। श्री राय के वकील गौरव मेहरोत्रा ने इस मामले में तमाम विधिक सबूतों के साथ यह दलील दी थी कि अरुण शंकर राय को वर्ष 2015 में खंड 9 के उपायुक्त पद पर रहते हुए एक बिल्डर फॉर्म को लाभ पहुंचा कर राजस्व हानि किए जाने के जिस मामले में निलंबित किया गया था वह पूरी तरह निराधार है क्योंकि अरुण शंकर राय के द्वारा किए गए कर करनिर्धारण के दो आदेशों पर तत्कालीन एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 2 अपील अरविंद कुमार ने एक आदेश को पुनर्विचार के लिए भेज दिया था जबकि प्रवेश करके एक मामले को सही ठहराया था जिस पर प्रवेश करके मामले में राजस्व सरकारी खजाने में जमा हो गया था। इस तरीके से विभाग को किसी तरीके से राजस्व का नुकसान नहीं हुआ बल्कि शासन ने निलंबन से पूर्व अरुण शंकर राय को अपना पक्ष रखने का मौका ही नहीं दिया। कोर्ट ने इस मामले में विभाग की ओर से दी गई दलीलों में तमाम खामियां पाई बल्की उस गुब्बारे की तरह पाया जिसमे आरोपो की गैस भरी थी। जिसके आधार पर कोर्ट ने 10 अक्टूबर 2025 को अरुण शंकर राय के निलंबन पर रोक लगा दी थी इसके बावजूद शासन ने कोर्ट के आदेश का पालन न करते हुए अरुण शंकर राय को पद पर बाहल नहीं किया। जिस पर अरुण शंकर राय ने कोर्ट के आदेश की अवमानना की याचिका दायर की थी। इसके बाद शासन में गुरुवार को उनको बहाल कर दिया। अरुण शंकर राय के वकील गौरव मल्होत्रा ने बताया कि कोर्ट ने यह भी पाया है कि इस मामले में अगर अरुण शंकर राय का पक्ष सुना जाता तो उनके निलंबन की आवश्यकता ही नहीं थी क्योंकि अरुण शंकर राय के खिलाफ कोई भी जांच विभाग में लंबित नहीं चल रही थी और वह लगातार पदोन्नति पाते हुए उपयुक्त से लेकर अपर आयुक्त तक बन गए। यही नहीं जिस मामले की जांच के लिए उनको निलंबित किया गया उस समय अरुण शंकर राय कानपुर में तैनात थे जबकि जांच नोएडा की थी इसलिए वह किसी भी तरीके से जाच को प्रभावित नहीं कर सकते थे लिहाजा उनका निलंबन पूरी तरीके से निराधार वह व्यक्तिगत हम को प्रदर्शित करता है जिसकी पूर्ति के लिए श्री राय के खिलाफ यह कार्रवाई करके उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश की गई है।





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