
बिजली विभाग मे 15 साल से जकड़ी व्यवस्था! “आम्मलेन” नीति ने हजारों कर्मचारियों को बना दिया बंधक |
नाराजगी का बडा कारणबनी आम्मेलन नियमावली
लखनऊ। बिजली विभाग में विभाजन तो हुआ, पर न्याय नहीं हुआ! उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपी सी एल) के कर्मचारियों के बीच “आम्मलेन व्यवस्था” अब नाराजगी का बड़ा कारण बन गई है। 2009 से लागू इस व्यवस्था ने हजारों कर्मचारियों के जीवन को ठहरा दिया है — न ट्रांसफर, न प्रमोशन, न घर लौटने की उम्मीद!
जबकि विभाग ने कार्यकुशलता बढ़ाने के नाम पर अलग-अलग डिस्कॉम (जैसे पीवीवीएनएल, एमपीवीवीएनएल, डीवीवीएनएल और पीटीवीवीएनएल) तो बना दिए, पर इससे सबसे अधिक मार पड़ी उन कर्मचारियों पर जो सीधी भर्ती से आए और “आम्मलेन” के नाम पर पराए डिस्कॉमों में फेंक दिए गए।
इन कर्मचारियों में बाबू, स्टेनो और टीजी-2 (तकनीकी ग्रेड-2) तक शामिल हैं। स्थिति यह है कि 15 वर्षों से एक भी कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं हुआ।
यहां तक कि महिला और विकलांग कोटे से चयनित कर्मचारी भी इस जंजीर में जकड़े हुए हैं।
“आम्मलेन” व्यवस्था: नाम विकास का, असर विनाश का यह व्यवस्था कहने को तो संगठनात्मक स्थिरता के लिए थी, लेकिन अब यह कर्मचारियों के लिए कारावास बन चुकी है।
कई कर्मचारी अपने गृह जनपद से सैकड़ों किलोमीटर दूर 10-15 सालों से तैनात हैं, परिवार से दूर, जिम्मेदारियों से दूर और हर साल एक ही सवाल के साथ – क्या इस बार ट्रांसफर होगा?
सरकार और निगम प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल
बिजली विभाग में रोज़ नई नीति बनती है, पर “आम्मलेन” की समीक्षा कोई नहीं करता। सवाल उठता है –
क्या ये कर्मचारी सरकारी मशीन का हिस्सा हैं या भूल गए वादों का बोझ?
कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय अफसर और यूनियनें भी अब मौन दर्शक बनी हुई हैं।
कर्मचारियों की मांग:
1. “आम्मलेन” व्यवस्था को तत्काल खत्म किया जाए।
2. 15 साल से फंसे कर्मचारियों को गृह जनपद या निकट डिस्कॉम में ट्रांसफर का अवसर मिले।
3. महिला और दिव्यांग कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।
ए यूपीपीसीएल की अपील:
विभाग के शीर्ष अधिकारी कर्मचारियों की इस पीड़ा को सुनें।





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