
ज्ञानरंजन - एक साहित्य परंपरा का गुजर जाना
हिंदी साहित्य में ज्ञानरंजन का नाम उन लेखकों में गिना जाता है जिन्होंने कहानी को किसी विचारधारा का औज़ार नहीं, बल्कि मनुष्य की आंतरिक बेचैनी का दस्तावेज़ बनाया। उनके निधन के साथ साहित्य की वह आवाज़ शांत हुई है जो न तो ऊँचे स्वर में बोलती थी, न ही किसी निष्कर्ष की जल्दबाज़ी करती थी। ज्ञानरंजन की रचनाओं का केंद्र कोई विराट घटना या नाटकीय संघर्ष नहीं था, बल्कि साधारण मध्यवर्गीय जीवन की वह घुटन थी जिसे लोग जीते तो हैं, पर स्वीकार करने से कतराते हैं। उनकी कलम नौकरीपेशा जीवन की ऊब, टूटते संबंधों की चुप्पी, शहरी अकेलेपन, नैतिक असमंजस और अस्तित्वगत सवालों पर चली—जहाँ व्यक्ति सही होते हुए भी हारता है और गलत न होते हुए भी अपराधबोध से ग्रस्त रहता है। वे नायक और खलनायक की पारंपरिक संरचना से बाहर निकलकर उस आम इंसान को लिखते हैं जो भीतर से टूटा हुआ है, लेकिन बाहर से सामान्य दिखता है।
नई कहानी आंदोलन के प्रमुख रचनाकारों में शामिल होने के बावजूद ज्ञानरंजन ने कभी आंदोलनकारी मुद्रा नहीं अपनाई। वे नारे नहीं लिखते थे, अनुभव लिखते थे। उनके लिए कहानी किसी प्रयोगशाला का परिणाम नहीं, बल्कि जीवन की कसौटी पर खरा उतरता हुआ सच थी। उनकी भाषा में कोई अतिरिक्त सजावट नहीं थी—साधारण, संयत और लगभग निर्विकार—लेकिन उसी सादगी के भीतर एक स्थायी तनाव मौजूद रहता था। वे बातों को कहने से ज़्यादा छोड़ते थे, और पाठक को उस अधूरेपन के साथ जीने के लिए मजबूर करते थे। उनकी कहानियाँ अक्सर वहीं समाप्त होती हैं जहाँ पाठक किसी समाधान की उम्मीद करता है, और वही अधूरापन उनके साहित्य की सबसे बड़ी ताक़त बन जाता है। ज्ञानरंजन ने साहित्य को न तो भावुकता में बहने दिया और न ही उसे बौद्धिकता के बोझ तले दबने दिया; उन्होंने कथा को मानवीय आत्मसंघर्ष की दिशा में मोड़ा और यह स्थापित किया कि साहित्य का उद्देश्य सांत्वना देना नहीं, बल्कि सच से रू-बरू कराना है। आज, जब लेखन त्वरित प्रतिक्रिया और तात्कालिक प्रभाव की होड़ में है, ज्ञानरंजन की रचनाएँ हमें ठहरकर देखने और भीतर झाँकने की ज़रूरत का अहसास कराती हैं। उनका जाना केवल एक लेखक का जाना नहीं, बल्कि उस ईमानदार, अंतर्मुखी और संवेदनशील साहित्यिक परंपरा की क्षति है जो शोर से दूर रहकर मनुष्य के भीतर की दरारों को उजागर करती थी।
Ankit Awasthi





Leave A Comment
Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).