बच्चियों के आत्मसम्मान की समझ विकसित करेंगे शिक्षक, योगी सरकार ने शुरू की 450 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने की मुहिम

रूप-रंग और बॉडी इमेज से लेकर सोशल मीडिया व लैंगिक रूढ़ियों तक पर होगी चर्चा, 100 प्रतिभागियों के दो बैच का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा को अब केवल विद्यालयी पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उनके आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व क्षमता से जोड़ने की दिशा में पहल तेज की गई है। योगी सरकार विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर दे रही है, जहां बच्चे अपनी बात सुरक्षित और बिना किसी पूर्वाग्रह के रख सकें।
इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग की विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के तहत मीना मंच कार्यक्रम और सेल्फ-एस्टीम परियोजना के लिए मास्टर ट्रेनर्स का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया है। प्रशिक्षण के दो बैचों में कुल 100 प्रतिभागी शामिल हैं। व्यापक योजना के तहत प्रदेश में कुल 450 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे विद्यालय स्तर पर शिक्षकों और बच्चों तक इस पहल की समझ पहुंचाएंगे।
आत्मसम्मान को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर होगी गहन चर्चा
प्रशिक्षण में बच्चों के आत्मसम्मान को प्रभावित करने वाले कई संवेदनशील विषयों को शामिल किया गया है। इनमें रूप-रंग या शारीरिक बनावट को लेकर चिढ़ाने की प्रवृत्ति, बॉडी इमेज, शरीर को लेकर धारणा, सोशल मीडिया का प्रभाव और लैंगिक रूढ़ियां प्रमुख हैं।
शिक्षकों को यह समझाने पर जोर दिया जा रहा है कि बच्चे स्वयं और दूसरों को केवल शरीर या बाहरी रूप-रंग के आधार पर न आंकें, बल्कि अपने शरीर, उसकी क्षमताओं और अपनी पहचान को सकारात्मक तरीके से समझें।
इन विषयों को बच्चों तक सहज तरीके से पहुंचाने के लिए चार नव-विकसित कॉमिक पुस्तकों को शिक्षण संसाधन के रूप में शामिल किया गया है। इनके माध्यम से बच्चों के विद्यालय में नामांकन, नियमित उपस्थिति और स्कूल की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के तरीकों को समझाया जाएगा।
संदीप सिंह बोले- बालिकाओं को मिलेगा सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ-साथ आत्मसम्मान, सुरक्षा और नेतृत्व का वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। मीना मंच के माध्यम से शिक्षकों को संवेदनशील बनाने से विद्यालयों में बच्चों के साथ संवाद की गुणवत्ता और बेहतर होगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों की समस्याओं को समझने और उन्हें सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए शिक्षकों को संवेदनशील विषयों पर प्रशिक्षित किया जाना जरूरी है।
विद्यालयों में सुरक्षित संवाद पर जोर
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि बच्चों के आत्मसम्मान और सुरक्षित वातावरण के लिए शिक्षकों का संवेदनशील होना बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से यह समझ प्रदेश के विद्यालयों तक पहुंचाई जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान मीना मंच के गठन, ‘पॉवर एंजिल’ की भूमिका और एसटीएआरएस सिद्धांत के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में बच्चों की बात सुनने और बिना पूर्वधारणा के संवाद करने की प्रक्रिया समझाई जा रही है।
पॉक्सो अधिनियम और बाल सुरक्षा पर भी प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के पहले दिन पॉक्सो अधिनियम पर विशेष चर्चा की गई। इसके माध्यम से बाल यौन अपराधों से सुरक्षा से जुड़े प्रमुख संदेशों और विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की जिम्मेदारियों को समझाया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कानूनी जानकारी देना नहीं, बल्कि शिक्षकों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील संकेतों को समझने और उचित तरीके से संवाद करने के लिए तैयार करना भी है।
मासिक धर्म स्वास्थ्य पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दूसरे दिन संशोधित ‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल के चार नए अध्यायों और 13 सत्रों के साथ ‘अरमान’ मॉड्यूल तथा अभिभावक सत्रों की जानकारी दी जाएगी।
इसके साथ ही मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर भी विशेष जोर रहेगा। प्रशिक्षण में सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय, पानी की उपलब्धता, आवश्यक स्वच्छता उत्पाद, गोपनीयता और जागरूकता जैसे मुद्दों पर विद्यालय स्तर पर उठाए जा सकने वाले व्यावहारिक कदमों का अभ्यास कराया जाएगा।
उच्चतम न्यायालय के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार (2026) मामले के निर्णय के निहितार्थों पर भी चर्चा की जाएगी। इसका उद्देश्य बालिकाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और विद्यालयी वातावरण से जुड़े विषयों को अधिक संवेदनशीलता के साथ समझना है।
कुल मिलाकर, 450 मास्टर ट्रेनर्स को तैयार करने की यह पहल प्रदेश के विद्यालयों में बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित, संवेदनशील और सम्मानजनक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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