यूपी में बारिश का दोहरा असर: कहीं जलभराव और तबाही, कहीं धान-गन्ने को मिली संजीवनी

कुंवर अशोक सिंह राजपूत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरे दिन बारिश का दौर जारी है। पिछले 40 से 48 घंटों से हो रही भारी वर्षा के चलते प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। कई इलाकों में खेत, तालाब और नहरें जलमग्न हैं, जबकि शहरों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, लंबे समय से कम बारिश से परेशान किसानों के लिए यह वर्षा धान और गन्ने की फसल के लिहाज से राहत लेकर आई है।
भारी बारिश और आंधी-तूफान से प्रदेश में पिछले 48 घंटों के दौरान 15 जनहानि, चार पशुहानि और 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। पांच लोग घायल भी हुए हैं। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान कराने और अनुमन्य राहत सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
24 घंटे में सामान्य से 19 गुना अधिक बारिश
राहत आयुक्त के अनुसार प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा दर्ज की गई। फर्रुखाबाद में सामान्य से 200 गुना, कानपुर नगर में 160 गुना तथा कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में सामान्य से 130 गुना अधिक बारिश हुई। वहीं भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में सामान्य वर्षा दर्ज की गई, जबकि गाजीपुर में सबसे कम बारिश हुई। बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में बारिश नहीं हुई।
कई जिलों में जनहानि, मकानों को नुकसान
अतिवृष्टि और आंधी-तूफान से अमेठी, बहराइच, बांदा, बाराबंकी, बस्ती, फतेहपुर, हमीरपुर, हरदोई और कानपुर नगर में एक-एक, अयोध्या में दो तथा लखीमपुर खीरी में चार जनहानि की सूचना है। बहराइच में दीवार गिरने और बस्ती में आंधी-तूफान के कारण भी मौत की सूचना मिली है।
मकानों के नुकसान की बात करें तो बांदा में 32, जालौन में 21 और हरदोई में 14 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा औरैया और पीलीभीत में सात-सात, बहराइच और सुल्तानपुर में पांच-पांच तथा कई अन्य जिलों में भी मकानों को नुकसान पहुंचा है।
नेपाल सीमा से लगे जिलों में विशेष सतर्कता
नेपाल में हो रही भारी बारिश को देखते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। नेपाल से अचानक भारी पानी आने की स्थिति में नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। ऐसे में संबंधित जिलाधिकारियों को बाढ़ राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने और स्वयं क्षेत्र में रहकर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों को कच्चे मकानों के आसपास जलभराव पर तत्काल नजर रखने, जल निकासी की व्यवस्था कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं भी जरूरत के अनुसार लेने को कहा गया है।
बारिश से किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
लगातार बारिश से शहरों में भले ही जलभराव और आवागमन की समस्या बढ़ी हो, लेकिन पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में किसान इसे फसलों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देख रहे हैं। इस वर्ष जुलाई-अगस्त में कम बारिश के कारण कई क्षेत्रों में ताल-तलैया और खेत सूखे थे। धान की फसल में बालियां निकलने के समय पानी की जरूरत बढ़ जाती है, जबकि गन्ने के लिए भी इस समय पर्याप्त नमी महत्वपूर्ण होती है।
कम बारिश के चलते किसान ट्यूबवेल और ट्रैक्टर से खेतों की सिंचाई की तैयारी कर रहे थे। ऐसे में बंगाल की खाड़ी से उठे मौसम तंत्र के प्रभाव से हुई बारिश ने किसानों को बड़ी राहत दी है। कई इलाकों में धान और गन्ने की फसल को आवश्यक नमी मिली है। हालांकि जहां बारिश की तीव्रता अधिक है, वहां जलभराव और तेज हवाओं से फसलों को नुकसान की आशंका भी बनी हुई है।
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मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तीसरे दिन रुक-रुककर हल्की बारिश और बूंदाबांदी जारी है। हवा की गति अपेक्षाकृत कम रहने से फिलहाल धान और गन्ने की फसल को तेज हवाओं से गिरने का खतरा सीमित है।
अगले 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने की उम्मीद
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 36 घंटे के बाद मौसम में सुधार की संभावना जताई गई है। इसके बाद बारिश थमने पर तापमान में बदलाव और मौसम के गुलाबी ठंड की ओर बढ़ने की उम्मीद है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें, सुरक्षित स्थानों पर रहें और मौसम विभाग तथा प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों का पालन करें। आपदा की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।
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