केंद्र से हस्तांतरण में कमी का आरोप
राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र द्वारा उधारी सीमा में कटौती और विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) की उधारी को राज्य के कर्ज में शामिल करने जैसे कदमों से वित्तीय दबाव बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार, केंद्र से कुल राजस्व हस्तांतरण 2020-21 में जीएसडीपी के 5.52% से घटकर 2024-25 में 2.54% रह गया है। इसी अवधि में कुल राजस्व व्यय 18% से घटकर 13.92% पर आ गया।
कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार
बजट में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए 14,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 2016 में 600 रुपये की पेंशन पाने वाले 32 लाख लाभार्थियों की संख्या अब 62 लाख हो गई है और पेंशन राशि 2,000 रुपये तक पहुंचाई गई है।
-
16 लाख महिला गृहणियों के सुरक्षा भुगतान हेतु 3,720 करोड़ रुपये
-
कौशल पाठ्यक्रमों में पंजीकृत युवाओं की छात्रवृत्ति के लिए 400 करोड़ रुपये
-
आंगनबाड़ी, आशा और अन्य योजनाकर्मियों के मानदेय में अतिरिक्त 1,000 रुपये वृद्धि
सामाजिक क्षेत्र पर विशेष फोकस
राजस्व व्यय का 34% सामाजिक सेवाओं पर खर्च होगा, जिसमें 62% शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए निर्धारित है। केंद्र द्वारा बंद किए गए रोजगार गारंटी कार्यक्रम को राज्य 1,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त प्रावधान के साथ जारी रखेगा।
स्थानीय निकायों को 17,901 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।
कर्मचारियों को राहत
सरकार ने आश्वासन दिया है कि मार्च तक महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) की लंबित किश्तों को मंजूरी दे दी जाएगी। वेतन पुनरीक्षण आयोग गठित करने और अंशदायी पेंशन योजना से सुनिश्चित पेंशन योजना की ओर बढ़ने की घोषणा भी की गई है।
पूंजीगत व्यय में 20% वृद्धि
बजट में पूंजीगत व्यय में 20% बढ़ोतरी का अनुमान है। जीएसडीपी का 3.4% राजकोषीय घाटा रहने का अनुमान है। अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए बजट-इतर संसाधनों पर जोर जारी रहेगा।
राज्य ने दिल्ली-मेरठ रैपिड ट्रांजिट सिस्टम की तर्ज पर एक क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम प्रस्तावित किया है, जिसकी लागत लगभग 2 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) के माध्यम से अब तक 96,554 करोड़ रुपये की 1,216 परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं।
राजनीतिक असर
सरकार का संकेत है कि केंद्र के साथ वित्तीय अधिकारों को लेकर संघर्ष तेज होगा और आगामी विधानसभा चुनाव में इसे प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। विपक्ष ने बजट को “चुनावी” करार दिया है, जबकि सरकार का दावा है कि यह बजट कठिन परिस्थितियों में भी गरीबों के साथ खड़े रहने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के चुनाव से पहले यह बजट राज्य की विकास बनाम वित्तीय प्रतिबंध की बहस को और तेज कर सकता है।






Leave A Comment
Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).