
मानव जीवन का आधार है जैव विविधता : डॉ अरुण सक्सेना
अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में जैव संरक्षण पर जोर
लखनऊ । अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर गुरुवार को नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान स्थित सारस प्रेक्षागृह में “वैश्विक प्रभाव के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करना” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ उत्तर प्रदेश सरकार के वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना ने किया। उन्होंने कहा कि जैव विविधता केवल एक शब्द नहीं बल्कि मानव जीवन का आधार है। अन्न, फल, औषधि, पर्यटन और पशु उत्पाद जैसी तमाम आवश्यकताएं जैव विविधता से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि जैव विविधता समाप्त होती है तो मानव अस्तित्व भी संकट में पड़ जाएगा।
मंत्री ने कहा कि भारत विश्व के कुल क्षेत्रफल का मात्र 2.5 प्रतिशत होने के बावजूद वैश्विक प्रजातियों की लगभग 7.5 प्रतिशत विविधता का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने इसका श्रेय भारतीय संस्कृति, परम्पराओं और संरक्षण के प्रयासों को दिया। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में मंत्री सहित अन्य अतिथियों ने उत्तर प्रदेश की जैव विविधता प्रतीक पोस्टर का अनावरण किया तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया। विश्व कछुआ दिवस की पूर्व संध्या पर ब्लैक पॉण्ड टर्टल प्रजाति के पांच कछुओं को प्राणि उद्यान स्थित तालाब में छोड़ा गया।
संगोष्ठी में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने विशेष रूप से जैव विविधता संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर मानव का स्वामित्व नहीं बल्कि ट्रस्टी का दायित्व है और इन्हें भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में किए गए अभिनव प्रयासों से वन जैव विविधता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। श्री चौधरी ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस जैसे आयोजन समाज को संरक्षण के प्रति जागरूक और प्रेरित करने का माध्यम बनते हैं।
प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग एवं उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की अध्यक्ष वी. हेकाली झिमोमी ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान वृद्धि आज पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में जैव विविधता संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सचिव, उत्तर प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड नीरज कुमार ने बताया कि प्रदेश में 2932 पादप और 2434 प्राणि प्रजातियां पाई जाती हैं तथा लगभग 60 हजार जैव विविधता प्रबंधन समितियां स्थानीय स्तर पर कार्य कर रही हैं।
तकनीकी सत्रों में पशुपालन विविधता, फसल संरक्षण, औषधीय जैव विविधता, विरासत वृक्षों के संरक्षण तथा जलीय आनुवंशिक संसाधनों के सतत प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम में प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा वेमूरी, राम कुमार , दीपक कुमार सहित अनेक वरिष्ठ वनाधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।





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