प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के छह साल पूरे, मछली उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के छह वर्ष पूरे होने के मौके पर केंद्र सरकार ने मत्स्य क्षेत्र में हुई प्रगति के आंकड़े साझा किए हैं। सरकार के अनुसार, योजना ने मछली उत्पादन, निर्यात, रोजगार, आधुनिक अवसंरचना और तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव को गति दी है। 10 सितंबर 2026 को पीएमएमएसवाई के छह वर्ष पूरे हो गए हैं।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में पीएमएमएसवाई के तहत रिकॉर्ड 2,500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। योजना के तहत वर्ष 2020-21 से कुल 20,750 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ काम किया जा रहा है। 11 अगस्त 2026 तक मत्स्य पालन विभाग ने 2020-21 से 2025-26 के दौरान 21,394.88 करोड़ रुपये की मत्स्य पालन और जलीय कृषि परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें 9,510.89 करोड़ रुपये केंद्रीय हिस्से के रूप में शामिल हैं।
141.64 लाख टन से बढ़कर 197.75 लाख टन हुआ उत्पादन
पीएमएमएसवाई के छह वर्षों में मछली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2019-20 में देश का मछली उत्पादन 141.64 लाख टन था, जो 2024-25 में बढ़कर रिकॉर्ड 197.75 लाख टन हो गया। वहीं, मत्स्य निर्यात भी 2019-20 के 46,663 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 73,890 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
58 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर
सरकार के मुताबिक, पीएमएमएसवाई के तहत मत्स्य पालन और जलीय कृषि से जुड़ी गतिविधियों में करीब 58 लाख लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। योजना का उद्देश्य उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ मछुआरों की आय, सुरक्षा और कल्याण को मजबूत करना तथा मत्स्य क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला को आधुनिक बनाना है।

कोल्ड-चेन और बाजार ढांचे पर जोर
मत्स्य क्षेत्र में फसलोत्तर प्रबंधन और बाजार तक पहुंच मजबूत करने के लिए कोल्ड-चेन और मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी निवेश किया गया है। सरकार ने इसके लिए 2,797 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। 11 अगस्त 2026 तक स्वीकृत परियोजनाओं में 28,489 मछली परिवहन इकाइयां, 1,394 जीवित मछली बिक्री इकाइयां, 6,018 मछली कियोस्क, 117 खुदरा मछली बाजार, 775 कोल्ड स्टोरेज व आइस प्लांट और 24 थोक मछली बाजार शामिल हैं।
2,195 एफएफपीओ को मिली सहायता
मछुआरों और मत्स्य पालकों को सामूहिक रूप से मजबूत करने के लिए मछुआरा किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) को भी सहायता दी गई है। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक देशभर में 2,195 एफएफपीओ की स्थापना के लिए 544.86 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य मछुआरों और मत्स्य पालकों की आर्थिक क्षमता और सौदेबाजी की शक्ति को बढ़ाना है।
आधुनिक तकनीक और जलीय कृषि को बढ़ावा
पीएमएमएसवाई के तहत आधुनिक जलीय कृषि प्रणालियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत 12 एकीकृत एक्वापार्क के लिए 713.80 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 12,081 पुनर्चक्रणीय जलीय कृषि प्रणालियों (आरएएस) और 4,205 बायो-फ्लोक इकाइयों को भी सहायता दी गई है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ रहे मछुआरे
मत्स्य क्षेत्र के डिजिटल रूपांतरण के लिए सितंबर 2024 में राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) शुरू किया गया। इसका उद्देश्य क्षेत्र में डिजिटल शासन और औपचारिकीकरण को बढ़ावा देना है। 8 सितंबर 2026 तक एनएफडीपी पर 37.01 लाख से अधिक व्यक्तिगत पंजीकरण दर्ज किए गए, जबकि कुल पंजीकरण 37.23 लाख से अधिक हो चुके थे।
नीली अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति
सरकार के अनुसार, मत्स्य क्षेत्र देश की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और आजीविका, खाद्य सुरक्षा, रोजगार तथा निर्यात में योगदान देता है। पीएमएमएसवाई के माध्यम से आधुनिक अवसंरचना, कोल्ड-चेन, तकनीक आधारित जलीय कृषि और डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देकर भारत की नीली अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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