नागपुर में दो दवाओं के बैच गुणवत्ता जांच में फेल, सरकारी अस्पतालों में वितरण पर रोक

पैरासिटामोल 500 mg और टेल्मिसार्टन 40 mg के संबंधित बैच वापस लेने के निर्देश, FDA ने सप्लाई और वितरण की जानकारी मांगी
नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल के लिए पहुंची दो दवाओं के कुछ बैच गुणवत्ता जांच में निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की जांच के बाद पैरासिटामोल 500 मिलीग्राम और टेल्मिसार्टन 40 मिलीग्राम के प्रभावित बैचों का वितरण रोक दिया गया है। अस्पतालों में उपलब्ध स्टॉक को भी वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मामला नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (मेयो) से जुड़ा है। FDA ने नियमित गुणवत्ता जांच के तहत दवाओं के नमूने लिए थे। अधिकारियों के मुताबिक अगस्त में लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट 10 सितंबर को सामने आई, जिसमें दोनों दवाओं के संबंधित बैच निर्धारित गुणवत्ता विनिर्देशों के अनुरूप नहीं पाए गए।
पैरासिटामोल के बैच में रंग और सतह से जुड़ी समस्या
FDA की आधिकारिक NSQ सूची में Parasev-500 (Paracetamol Tablet IP 500 mg) का बैच नंबर PTTC-108 दर्ज है। इसका निर्माता Cureza Healthcare Pvt. Ltd., इंदौर बताया गया है। FDA रिकॉर्ड में इस बैच के लिए गुणवत्ता संबंधी समस्या दर्ज की गई है।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक नमूने में गोलियों के रंग में मामूली अंतर और सतह पर दाग जैसी समस्या देखी गई। हालांकि उपलब्ध शेष स्टॉक के फार्माकोलॉजिकल आकलन में ऐसी असामान्यता नहीं मिलने की जानकारी भी सामने आई है। एहतियात के तौर पर संबंधित बैच का वितरण रोककर स्टॉक वापस लेने के निर्देश दिए गए।
GMCH में जुलाई में करीब 25 हजार पैरासिटामोल टैबलेट की आपूर्ति हुई थी। अस्पताल प्रशासन ने FDA की सूचना मिलने के बाद संबंधित स्टॉक को वापस लेने की कार्रवाई शुरू की। दोनों सरकारी अस्पतालों में इस ब्रांड की एक लाख से अधिक टैबलेट की खरीद की गई थी।
टेल्मिसार्टन का बैच डिसॉल्यूशन टेस्ट में असफल
दूसरी दवा Telmisev-40 (Telmisartan Tablets IP 40 mg) है। इसका संबंधित बैच नंबर CHPLT416 है। महाराष्ट्र FDA की NSQ सूची में इस बैच को dissolution test में असफल बताया गया है। निर्माता के रूप में भी Cureza Healthcare Pvt. Ltd., इंदौर का नाम दर्ज है।

डिसॉल्यूशन टेस्ट यह जांचने के लिए किया जाता है कि टैबलेट निर्धारित परिस्थितियों में कितनी मात्रा में और कितनी तेजी से दवा के सक्रिय घटक को रिलीज करती है। टेल्मिसार्टन का इस्तेमाल आमतौर पर उच्च रक्तचाप के उपचार में किया जाता है। संबंधित बैच की दवा को मरीजों तक पहुंचने से रोकने के लिए अस्पतालों को स्टॉक वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं।
सप्लाई चेन की भी होगी जांच
FDA अब यह जानकारी जुटा रहा है कि संबंधित बैच की दवाएं किन अस्पतालों और किन विभागों तक पहुंचीं और उनमें से कितनी मात्रा वितरित हो चुकी थी। मेयो अस्पताल से दवाओं की खरीद, बिक्री और वितरण से संबंधित दस्तावेज भी मांगे गए हैं। साथ ही प्रभावित बैच की सप्लाई और निर्माता से जुड़े अनुपालन की भी जांच की जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने प्रभावित दवाओं को वार्ड और ओपीडी में जारी करने पर रोक लगा दी है। उपलब्ध स्टॉक को वापस मंगाने के साथ संबंधित विभागों को भी इसकी सूचना दी गई है। FDA अधिकारियों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में दवाओं के नमूनों की नियमित जांच की जाती है और मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले बैचों के वितरण को रोकने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

घटिया गुणवत्ता और नकली दवा एक बात नहीं
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘Not of Standard Quality’ (NSQ) पाए जाने का मतलब अपने आप में दवा का नकली या फर्जी होना नहीं है। NSQ का अर्थ है कि जांच किए गए नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों में से किसी मानक पर खरे नहीं उतरे। FDA की सूची में भी इन संबंधित बैचों को गुणवत्ता मानकों से जुड़ी जांच के तहत दर्ज किया गया है। फिलहाल FDA की कार्रवाई संबंधित बैचों का वितरण रोकने, उपलब्ध स्टॉक वापस लेने और उनकी सप्लाई चेन की जांच पर केंद्रित है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रभावित बैच की कितनी दवाएं अस्पतालों तक पहुंचीं और कितनी मात्रा मरीजों को वितरित की गई थी।
लेखक के बारे में
News Desk
‘विजुअल लाइव’ का न्यूज डेस्क खबरों के संकलन, संपादन, सत्यापन और प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण केंद्र है। देश-प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था, अपराध, शिक्षा, रोजगार और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लगातार नजर रखते हुए डेस्क पाठकों तक जरूरी और महत्वपूर्ण खबरें पहुंचाने का कार्य करता है। न्यूज डेस्क की टीम विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं की पड़ताल कर खबरों को तथ्यपरक, स्पष्ट और संतुलित स्वरूप देती है। खबर की भाषा, तथ्य, शीर्षक, प्रस्तुतीकरण और डिजिटल प्रकाशन से जुड़े प्रत्येक पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बदलते डिजिटल मीडिया के दौर में न्यूज डेस्क की भूमिका केवल खबर प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है। ब्रेकिंग न्यूज की त्वरित अपडेटिंग, SEO आधारित प्रस्तुतीकरण, सोशल मीडिया वितरण और पाठकों की रुचि के अनुरूप खबरों के प्रभावी डिजिटल प्रकाशन पर भी टीम लगातार काम करती है। ‘विजुअल लाइव’ का न्यूज डेस्क पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों—तथ्य, विश्वसनीयता, निष्पक्षता और जनसरोकार—को प्राथमिकता देते हुए पाठकों को तेज, भरोसेमंद और उपयोगी समाचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। News Desk की सभी खबरें देखें →
संबंधित लेख

खाने की गुणवत्ता पर खाद्य विभाग सख्त, लखनऊ-नोएडा-गोरखपुर में 233 प्रतिष्ठानों की जांच, 13 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया शुरू

लखनऊ में H1N1 के 6 नए मरीज मिले, एक्टिव केस 79

ब्लैडर कैंसर सर्जरी में RMLIMS की बड़ी उपलब्धि, 400 से अधिक मामलों का अनुभव टोरंटो में होगा पेश

लखनऊ में H1N1 के 9 नए मामले मिले, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
टॉप रीड्स

रसड़ा में मां-बेटी के शव मिलने से सनसनी, घर और धान के खेत में मिले शव, जांच में जुटी पुलिस

लखनऊ में BBD के पूर्व छात्रों पर फायरिंग, एक के हाथ में लगी गोली, दूसरा बाल-बाल बचा

गोरखपुर में एशियन न्यूज चैनल के एडिटर इन चीफ के छोटे भाई की हत्या, परिवार ने पहले भी जताया था खतरा

काशी से वडनगर तक ‘सेवा संकल्प बाइक यात्रा’ 10 राज्यों के 1,000 से अधिक युवा होंगे शामिल

लखनऊ में अचानक आई आंधी, दोपहर 1 बजे के बाद बदला मौसम का मिजाज

15 दिन पुराने विवाद में फिर भिड़े दो पक्ष, बांस के प्रहार से घायल युवक की मौत, परिवार में मचा कोहराम

करीब दो दर्जन मुकदमों में वांछित सहारा इंडिया के डायरेक्टर संजय अरोड़ा का हार्ट अटैक से निधन



Leave a Comment
Don't worry! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).