ऑपरेशन सिंदूर पर पूर्व CDS अनिल चौहान का खुलासा : सीजफायर के लिए सुबह ही फोन खटखटाता रहा पाकिस्तान का DGMO
कुंवर अशोक सिंह राजपूत
नई दिल्ली। भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण खुलासा किया है। नई दिल्ली स्थित विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) में एक विशेष व्याख्यान देते हुए पूर्व CDS ने बताया कि भारतीय सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की स्थिति इतनी असहज और कमजोर हो गई थी कि सुबह होते ही उसके डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGMO) ने युद्धविराम (सीजफायर) और बातचीत के लिए भारत के DGMO को हॉटलाइन पर संपर्क करना शुरू कर दिया था।
बैकफुट पर पाकिस्तान और सीजफायर की गुहार: भारतीय सेना के सटीक और आक्रामक प्रहार के सामने पाकिस्तान टिक नहीं पाया। सुबह होते ही उनके DGMO ने हॉटलाइन के जरिए संपर्क कर युद्धविराम का प्रस्ताव रखा। हालांकि, भारत ने तुरंत अभियान रोकने के बजाय अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखी और अपने तय रक्षात्मक लक्ष्यों को पूरा किया।
किराना हिल्स (Kirana Hills) घटना का सच: अमरीका और पाकिस्तान के रणनीतिक/परमाणु परिसंपत्तियों से जुड़े सरगोधा क्षेत्र के 'किराना हिल्स' स्थित हवाई अड्डे के पास हुए विस्फोट पर उठ रहे सवालों पर भी पूर्व CDS ने स्थिति साफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का उद्देश्य किसी परमाणु केंद्र को निशाना बनाना नहीं था।
भारतीय ड्रोन प्रहार (Loitering Munitions): भारत ने सरगोधा क्षेत्र में सक्रिय पाकिस्तानी रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह करने के लिए 'लोइटरिंग म्यूनिशन' (जैसे हैरॉप ड्रोन) तैनात किए थे। करीब 2 घंटे तक हवा में मंडराकर लक्ष्य ढूंढने वाले इस ड्रोन का ईंधन जब समाप्त हुआ, तो वह सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर स्थित किराना हिल्स की पहाड़ियों में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके बाद वहां धुएं का गुबार देखा गया था।
अमेरिकी और चीनी सैटेलाइट की मदद मांगता रहा पाक: जनरल चौहान ने खुलासा किया कि भारतीय हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना इतनी असमंजस में थी कि उसे अपने ही क्षेत्र में हुए नुकसान का सटीक आकलन नहीं था। नुकसान के साक्ष्य जुटाने के लिए वे अमेरिकी और चीनी कंपनियों से व्यावसायिक सैटेलाइट तस्वीरें प्राप्त करने की मशक्कत करते रहे।
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