
प्रदेश में मानव-बंदर संघर्ष रोकने को अंतरिम कार्ययोजना लागू
पीसीसीएफ सुनील चौधरी ने जारी किए सख्त निर्देश
दीप चन्द त्रिपाठी
लखनऊ। प्रदेश में बढ़ते मानव-बंदर संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने एक व्यापक अंतरिम कार्ययोजना लागू कर दी है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बंदरों से उत्पन्न हो रही समस्याओं को तात्कालिक, निरोधात्मक एवं दीर्घकालीन उपायों के माध्यम से प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) एवं विभागाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश सुनील चौधरी ने इस कार्ययोजना को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने के निर्देश देते हुए सभी प्रभागीय वनाधिकारियों एवं प्रभागीय निदेशकों को स्पष्ट रूप से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देशित किया कि जिलाधिकारियों एवं अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यों की नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
कार्ययोजना के अंतर्गत तात्कालिक उपायों में सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों को एक माह के भीतर बंदर-प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने, संघर्ष उत्पन्न करने वाले बंदरों की संख्या का आकलन करने तथा हेल्पलाइन नंबर जारी कर उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त बंदरों को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित व्यक्तियों एवं संस्थाओं का चिन्हांकन कर उनका पंजीकरण भी अनिवार्य किया गया है।
निरोधात्मक उपायों के तहत जन-जागरूकता अभियान, लक्ष्य आधारित संपर्क कार्यक्रम एवं कुड़ा प्रबंधन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। साथ ही, धार्मिक मान्यताओं के चलते बंदरों को भोजन कराने की परंपरा को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय निकायों को चिन्हित स्थान निर्धारित कर आमजन को वहां ही भोजन कराने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे बंदरों का अनियंत्रित जमावड़ा रोकने में मदद मिलेगी।
दीर्घकालीन उपायों में बंदरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने हेतु वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपायों के क्रियान्वयन पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, पकड़े गए बंदरों के लिए विशेष रेस्क्यू सेंटर स्थापित कर उन्हें आजीवन रखने की व्यवस्था की जाएगी। अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों में सीमित अवधि के लिए बंदरों को ‘पीड़ित जंतु’ घोषित करने का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कार्ययोजना के प्रभावी अनुश्रवण के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जिसमें नगर निकाय, पुलिस, वन विभाग, पशुपालन विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी सदस्य होंगे। यह समिति बंदरों को पकड़ने, उनके पुनर्वास एवं अन्य उपायों की निगरानी करेगी।
वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा जनपद एवं रेंज स्तर पर कुशल व्यक्तियों एवं संस्थाओं का विवरण संधारित किया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनकी सेवाएं ली जा सकें। पकड़े गए बंदरों को प्राथमिकता के आधार पर संबंधित जनपद के वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा, जबकि राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव विहारों में उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा।
पीसीसीएफ सुनील चौधरी ने कहा कि यह कार्ययोजना जनहित में अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में मानव-बंदर संघर्ष की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं।





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