
वृक्षारोपण महायज्ञ 2026 को जन-जन का अभियान बनाने पर जोर
प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ने तैयारियों की समीक्षा कर दिए सख्त निर्देश
लखनऊ । प्रदेश में आगामी वृक्षारोपण अभियान 2026 को ऐतिहासिक बनाने की दिशा में वन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश सुनील चौधरी ने सोमवार को वन मुख्यालय स्थित पारिजात सभाकक्ष में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर अभियान की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस बार का लक्ष्य हर हाल में गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए।
बैठक में श्री चौधरी ने मुख्यमंत्री द्वारा 3 मई को जारी निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि इस वर्ष वृक्षारोपण को “वृक्षारोपण महायज्ञ 2026” के रूप में आयोजित किया जाएगा, जिसमें आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि “जन-जन की भागीदारी, हरित आवरण की तैयारी” के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए, ताकि यह अभियान केवल सरकारी न रहकर जन आंदोलन का रूप ले सके।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में लगभग 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें 27 विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। श्री चौधरी ने विशेष रूप से कहा कि लक्ष्य की पूर्ति के साथ-साथ पौधों का जीवित रहना (सर्वाइवल रेट) भी उतना ही महत्वपूर्ण है, इसलिए गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
बैठक में उन्होंने कई नवाचारी पहल की जानकारी देते हुए बताया कि इस बार वन्देमातरम् वाटिका, महर्षि चरक औषधीय वन, समरस वन, समृद्धि वन और ऊर्जा वन जैसे विशेष थीम आधारित वनों की स्थापना की जाएगी। इन वनों के लिए स्थानीय मृदा एवं जलवायु के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की तैयारी और संरक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
श्री चौधरी ने “मिशन छाया” को अभियान का प्रमुख हिस्सा बताते हुए कहा कि प्रदेश की सड़कों और एक्सप्रेस-वे के किनारे बड़े पैमाने पर छायादार पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नए बन रहे एक्सप्रेस-वे और प्रमुख मार्गों पर थीमैटिक वृक्षारोपण किया जाए, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ सौंदर्यीकरण भी हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण को सफल बनाने के लिए केवल रोपण ही नहीं, बल्कि पौधशाला प्रबंधन, तकनीकी प्रशिक्षण और जनजागरूकता भी आवश्यक है। इसके लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल और लघु वीडियो तैयार कर सभी संबंधित विभागों और हितधारकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, मृदा एवं जल संरक्षण तथा हरित आवरण बढ़ाने के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को भी कहा गया।
श्री चौधरी ने भूमि की उपलब्धता को लेकर भी सख्ती दिखाई और कहा कि सभी विभाग समय रहते पर्याप्त लैंड बैंक चिन्हित करें तथा श्रमबल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें। उन्होंने प्रदेश के विरासत वृक्षों की सुरक्षा और संरक्षण पर विशेष ध्यान देने का निर्देश देते हुए कहा कि ये हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं और इनकी रक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मिशन निदेशक रामकुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट टाइगर) दीपक कुमार सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और प्रदेश भर के फील्ड अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में सुनील चौधरी ने स्पष्ट संदेश दिया कि वृक्षारोपण महायज्ञ 2026 को केवल लक्ष्य पूरा करने का अभियान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जनभागीदारी का एक मजबूत आंदोलन बनाया जाएगा।





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