पुलिस फायरिंग में हर मौत/चोट पर FIR शिकायत: SHRC में केस दर्ज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पुलिस फायरिंग से होने वाली मृत्यु अथवा चोट के प्रत्येक मामले में तत्काल FIR दर्ज कर स्वतंत्र विवेचना कराये जाने की मांग को लेकर आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वारा की गयी शिकायत पर उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने केस नंबर 18343/24/48/2026-AFE के रूप में पंजीकृत किया है, जिसे आगे की कार्यवाही में संदर्भित किया जा सकता है।
अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में मांग की है कि पिछले दस वर्षों में उत्तर प्रदेश में पुलिस की गोली से किसी व्यक्ति की मृत्यु अथवा शारीरिक चोट होने के प्रत्येक मामले में तत्काल और अनिवार्य FIR दर्ज की जाए तथा उसकी विवेचना CBCID से करायी जाए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में पुलिस अक्सर यह कहकर कि संबंधित व्यक्ति ने पहले पुलिस पर गोली चलाई थी, घटना को आत्मरक्षा अथवा मुठभेड़ बताती है और उसी व्यक्ति के विरुद्ध FIR दर्ज कर देती है। ऐसी स्थिति में पुलिसकर्मी स्वयं फायरिंग करने वाले पक्ष होते हुए भी घटना से संबंधित अभिलेख और विवेचना की प्रक्रिया पर नियंत्रण रखते हैं।
अमिताभ ठाकुर ने कहा कि पुलिस फायरिंग वैध थी या अवैध, इसका फैसला पुलिस के प्रारंभिक दावे से नहीं, बल्कि FIR और निष्पक्ष विवेचना में सामने आने वाले साक्ष्यों से होना चाहिए। यदि पुलिस का आत्मरक्षा का दावा सही है तो विवेचना उसे प्रमाणित करेगी; यदि वह गलत है तो वही प्रक्रिया पीड़ित को न्याय का मार्ग देगी।
उन्होंने 2017 के सुमित गुर्जर, 2018 के जितेन्द्र यादव एवं इरशाद अहमद तथा 2021 के जीशान हैदर सहित विभिन्न मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में बाद में मानवाधिकार आयोग अथवा न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के PUCL v. State of Maharashtra, (2014) 10 SCC 635 में प्रतिपादित दिशा-निर्देशों के आलोक में यह व्यवस्था पूरे देश में लागू किये जाने की भी मांग की है।
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