Fri, Sep 25
V L MEDIA PVT.LTD.
Advertisement
ब्रेकिंग न्यूज़
★ UP के इटावा में पूर्ति निरीक्षक 30 हज़ार की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार।★ मुंबई। अपने दमदार अभिनय से लोगों को हंसाने वाले मशहूर एक्टर मुश्ताक खान का निधन। 56 साल के हास्य अभिनेता लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे थे और पिछले 15 दिनों से नानावती अस्पताल में भर्ती थे। लाख कोशिशों के बाद भी डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। उनके जाने से पूरी फिल्म इंडस्ट्री सदमे में है।★ 1986 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से Law करने वाले जस्टिस विक्रमनाथ देश के अगले CJI होंगे। उनकी पत्नी संगीता श्रीवास्तव इलाहाबाद (प्रयागराज) यूनिवर्सिटी की VC हैं। कौशांबी , प्रयागराज में आपका परिवार बीते 125 साल से वकालत और न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा है।★ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश दौरा स्थगित। 25 सितंबर को मेरठ और 28 सितंबर को वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रम अब नहीं होंगे। मेरठ में ELC 2.0, ECIनेट सम्मेलन और युवाओं से संवाद, जबकि वाराणसी में Gen-Z संवाद का कार्यक्रम था।★ लखनऊ: BJP ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रभारियों की लिस्ट जारी की। उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनाए गए विनोद तावड़े। यूपी में 4 सह-प्रभारी भी नियुक्त किए गए। जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा बने सह-प्रभारी। पंजाब के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, सह-प्रभारी अलका गुर्जर बनीं। राजस्थान के प्रभारी संजय भाटिया बनाए गए। राजस्थान में कविता पाटीदार और कुलजीत चहल सह-प्रभारी बने। महाराष्ट्र के प्रभारी बैजयंत जय पांडा बनाए गए। महाराष्ट्र में अमित मालवीय, सदानंद शेट तनावाडे और कमलजीत सहरावत सह-प्रभारी। बिहार के प्रभारी हरीश द्विवेदी, संगीता यादव और रोहन गुप्ता सह-प्रभारी। छत्तीसगढ़ की प्रभारी स्मृति ईरानी, सिद्धार्थ शम्भू सह-प्रभारी बनाए गए। विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने राज्यों के प्रभारियों और सह-प्रभारियों की नई टीम तय की।★ लखनऊ। राज्यसभा चुनाव के बाद बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा फिर खतरे में पड़ जाएगा। बसपा की स्थापना वर्ष 1984 में कांशीराम ने की थी। पार्टी को वर्ष 1997 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था। हालांकि चुनाव आयोग ने पिछले साल बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखा था। अब अगले वर्ष होने वाले यूपी समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव बसपा के राष्ट्रीय पार्टी होने का भविष्य तय कर सकते हैं।★ मौसम का हाल : यूपी-बिहार से बंगाल तक बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी; ओडिशा, आंध्र-तेलंगाना में स्कूल बंद। बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है और 23 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार कर सकता है। ओडिशा में भारी बारिश के चलते ODRAF टीमें तैनात की गई हैं। समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक और पुरी में समुद्र स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं तेलंगाना के कई जिलों में 23-24 सितंबर को बेहद भारी बारिश का अलर्ट है।★ लखनऊ। सीएम आज करेंगे भारत टैक्सी योजना का शुभारंभ। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का भी शुभारंभ। CM आवास पर सुबह 9:30 बजे से कार्यक्रम। लखनऊ में होगा भारत टैक्सी योजना का शुभारंभ। कृषक समृद्धि योजना के ई-पोर्टल की लॉन्चिंग। भारत टैक्सी योजना में यात्रियों को मिलेंगी सुविधाएं। कृषक समृद्धि योजना में 6% प्रभावी ब्याज दर। किसानों को 6 लाख तक ऋण का प्रावधान। 5 साल में 5 लाख किसानों को लाभ का लक्ष्य। पात्र किसानों के लिए 384 करोड़ की योजना।★ गोरखपुर। सीएम योगी आदित्यनाथ आज गोरखपुर आएंगे। राजकीय महिला शरणालय का करेंगे लोकार्पण। कोविड प्रभावित बच्चों को लैपटॉप करेंगे वितरित। सीएम बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप। गोरखपुर के चरगांवा में 3.30 बजे होगा कार्यक्रम। कार्यक्रम में लाभार्थियों को बांटे जाएंगे लैपटॉप।★ लखनऊ। बसपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक आज। मायावती की अध्यक्षता में होगी राष्ट्रीय बैठक। आज BSP मुख्यालय में 11 बजे होगी बैठक। यूपी, उत्तराखंड, पंजाब चुनाव पर होगा मंथन।★ UP के इटावा में पूर्ति निरीक्षक 30 हज़ार की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार।★ मुंबई। अपने दमदार अभिनय से लोगों को हंसाने वाले मशहूर एक्टर मुश्ताक खान का निधन। 56 साल के हास्य अभिनेता लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे थे और पिछले 15 दिनों से नानावती अस्पताल में भर्ती थे। लाख कोशिशों के बाद भी डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए। उनके जाने से पूरी फिल्म इंडस्ट्री सदमे में है।★ 1986 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से Law करने वाले जस्टिस विक्रमनाथ देश के अगले CJI होंगे। उनकी पत्नी संगीता श्रीवास्तव इलाहाबाद (प्रयागराज) यूनिवर्सिटी की VC हैं। कौशांबी , प्रयागराज में आपका परिवार बीते 125 साल से वकालत और न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा है।★ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश दौरा स्थगित। 25 सितंबर को मेरठ और 28 सितंबर को वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रम अब नहीं होंगे। मेरठ में ELC 2.0, ECIनेट सम्मेलन और युवाओं से संवाद, जबकि वाराणसी में Gen-Z संवाद का कार्यक्रम था।★ लखनऊ: BJP ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रभारियों की लिस्ट जारी की। उत्तर प्रदेश के प्रभारी बनाए गए विनोद तावड़े। यूपी में 4 सह-प्रभारी भी नियुक्त किए गए। जगदीश पटेल, मेधा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा बने सह-प्रभारी। पंजाब के प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, सह-प्रभारी अलका गुर्जर बनीं। राजस्थान के प्रभारी संजय भाटिया बनाए गए। राजस्थान में कविता पाटीदार और कुलजीत चहल सह-प्रभारी बने। महाराष्ट्र के प्रभारी बैजयंत जय पांडा बनाए गए। महाराष्ट्र में अमित मालवीय, सदानंद शेट तनावाडे और कमलजीत सहरावत सह-प्रभारी। बिहार के प्रभारी हरीश द्विवेदी, संगीता यादव और रोहन गुप्ता सह-प्रभारी। छत्तीसगढ़ की प्रभारी स्मृति ईरानी, सिद्धार्थ शम्भू सह-प्रभारी बनाए गए। विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने राज्यों के प्रभारियों और सह-प्रभारियों की नई टीम तय की।★ लखनऊ। राज्यसभा चुनाव के बाद बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा फिर खतरे में पड़ जाएगा। बसपा की स्थापना वर्ष 1984 में कांशीराम ने की थी। पार्टी को वर्ष 1997 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था। हालांकि चुनाव आयोग ने पिछले साल बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखा था। अब अगले वर्ष होने वाले यूपी समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव बसपा के राष्ट्रीय पार्टी होने का भविष्य तय कर सकते हैं।★ मौसम का हाल : यूपी-बिहार से बंगाल तक बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी; ओडिशा, आंध्र-तेलंगाना में स्कूल बंद। बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है और 23 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार कर सकता है। ओडिशा में भारी बारिश के चलते ODRAF टीमें तैनात की गई हैं। समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक और पुरी में समुद्र स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं तेलंगाना के कई जिलों में 23-24 सितंबर को बेहद भारी बारिश का अलर्ट है।★ लखनऊ। सीएम आज करेंगे भारत टैक्सी योजना का शुभारंभ। मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का भी शुभारंभ। CM आवास पर सुबह 9:30 बजे से कार्यक्रम। लखनऊ में होगा भारत टैक्सी योजना का शुभारंभ। कृषक समृद्धि योजना के ई-पोर्टल की लॉन्चिंग। भारत टैक्सी योजना में यात्रियों को मिलेंगी सुविधाएं। कृषक समृद्धि योजना में 6% प्रभावी ब्याज दर। किसानों को 6 लाख तक ऋण का प्रावधान। 5 साल में 5 लाख किसानों को लाभ का लक्ष्य। पात्र किसानों के लिए 384 करोड़ की योजना।★ गोरखपुर। सीएम योगी आदित्यनाथ आज गोरखपुर आएंगे। राजकीय महिला शरणालय का करेंगे लोकार्पण। कोविड प्रभावित बच्चों को लैपटॉप करेंगे वितरित। सीएम बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप। गोरखपुर के चरगांवा में 3.30 बजे होगा कार्यक्रम। कार्यक्रम में लाभार्थियों को बांटे जाएंगे लैपटॉप।★ लखनऊ। बसपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक आज। मायावती की अध्यक्षता में होगी राष्ट्रीय बैठक। आज BSP मुख्यालय में 11 बजे होगी बैठक। यूपी, उत्तराखंड, पंजाब चुनाव पर होगा मंथन।

ईमानदार मतदाता बेईमान चुनाव आयोग के कटघरे में!

Published By News DeskAuthor: कामेश्वर पांडे -(लेखक जनवादी लेखक संघ, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष हैं।)·25 Sept 2026 08:53 AM (IST)
0
ईमानदार मतदाता बेईमान चुनाव आयोग के कटघरे में!

दिल्ली में 33 लाख से अधिक मतदाताओं को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किए हैं। कारण—‘नो मैपिंग’ और ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’। यानी पुराने मतदाता रिकॉर्ड से नाम का मेल नहीं बैठ रहा या मतदाता द्वारा दिए गए विवरण में आयोग को कोई ‘तार्किक विसंगति’ दिखाई दे रही है। 33.13 लाख में लगभग 13.80 लाख ‘नो मैपिंग’ और 19.33 लाख ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की श्रेणी में हैं।

यह कोई छोटी-मोटी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है। इन नोटिसों की सूची में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, निर्वाचन आयुक्त एस.एस. संधू जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।

यानी जिस व्यवस्था को देश के करोड़ों नागरिकों के मताधिकार की रखवाली करनी है, वह यह पता लगाने में असमर्थ है कि देश के विदेश मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे लोगों का पुरानी मतदाता सूची से संबंध कहाँ है! तो फिर उस गरीब आदमी का क्या होगा जिसके पास पुराने कागज नहीं हैं? उस प्रवासी मजदूर का क्या होगा जो रोजी-रोटी के लिए शहर बदलता रहा? उस किरायेदार का क्या होगा, जिसका पता दस साल में तीन बार बदला? उस बूढ़े का क्या होगा जिसके पास अपने पिता या दादा की मतदाता सूची की प्रति नहीं है? और उस नागरिक का क्या होगा, जिसे यह भी पता नहीं कि चुनाव आयोग ने उसके नाम के आगे ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ लिख दिया है?

यही वह जगह है जहाँ मामला खतरनाक हो जाता है, क्योंकि गलती व्यवस्था करती है और सबूत नागरिक से माँगती है।

और बात केवल 33 लाख नोटिसों की नहीं है। दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची में लगभग 47.56 लाख नाम नहीं आए। इनमें ‘अनुपस्थित, शिफ्ट, मृत या डुप्लीकेट' जैसी श्रेणियाँ इस्तेमाल की गई हैं। दूसरी ओर मसौदा सूची में शामिल 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस के लिए चिन्हित किया गया। इससे पहले भी बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे।

अब जरा कल्पना कीजिए — दिल्ली विधानसभा का चुनाव हो चुका है। अगर मतदाता सूची इतनी ही अविश्वसनीय, अधूरी और गड़बड़ थी कि लाखों नाम गलत थे, लाखों नाम गायब थे और लाखों दूसरे नामों पर अब सवाल उठ रहे हैं, तो उसी मतदाता सूची से कराया गया विधानसभा चुनाव कितनी विश्वसनीयता का दावा कर सकता है?

यह कोई मामूली तकनीकी प्रश्न नहीं है। मतदाता सूची ही चुनाव की पहली मतपेटी है। जिसका नाम उसमें है, वह वोट दे सकता है। जिसका नाम नहीं है, उसका लोकतंत्र में कोई वोट नहीं है। इसलिए मतदाता सूची से किसी का नाम हटाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है। यह उसके नागरिक अस्तित्व को मिटा देना है।

लेकिन सबसे विचित्र बात अभी बाकी है। कुछ लोग कह रहे हैं— इसमें चिंता की क्या बात है? देखिए, भाजपा के बड़े नेताओं को भी नोटिस मिला है। विदेश मंत्री को मिला, मुख्यमंत्री को मिला, पूर्व उपप्रधानमंत्री को मिला। इससे तो सिद्ध होता है कि आयोग निष्पक्ष है।

नहीं। असली सवाल इससे कहीं गहरा है। सवाल यह नहीं है कि नोटिस भाजपा वाले को भी मिला या विपक्ष वाले को भी। सवाल यह है कि इतने बड़े-बड़े और सार्वजनिक जीवन में सर्वाधिक पहचाने जाने वाले नामों को भी इस प्रक्रिया में लपेटने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह केवल प्रशासनिक संयोग है? या फिर इससे एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत राजनीतिक तस्वीर बनाई जा रही है — “देखिए, हम किसी को नहीं छोड़ रहे। हमारे लोग भी घेरे में हैं, विपक्षी भी।” इस तरह लाखों सामान्य नागरिकों पर चल रही कार्रवाई को निष्पक्षता का प्रमाणपत्र मिल जाता है।

लेकिन इसका दूसरा अर्थ और ज्यादा भयावह हो सकता है। सत्ता में बैठे लोगों का मनोबल यदि इतना बढ़ गया हो कि वे संवैधानिक पदों पर रह चुके लोगों तक को अपनी प्रशासनिक मशीनरी के सामने खड़ा कर सकें, तो सामान्य नागरिक को क्या संदेश जाता है? यही कि व्यवस्था के सामने कोई बड़ा नहीं है। और यह लोकतंत्र में नागरिक की निर्भयता का नहीं, नागरिक के भीतर भय पैदा करने का संदेश बन सकता है।

बिहार में यह भयावहता एक और रूप में सामने आई थी। योगेंद्र यादव दो ऐसे जीवित मतदाताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे, जिन्हें चुनावी प्रक्रिया में मृत घोषित कर दिया गया था। वे दोनों अदालत में सामने खड़े थे। जीवित। और सरकारी रिकॉर्ड में मृत! यानी, जिस व्यवस्था को नागरिक की पहचान बचानी थी, उसने उसकी पहचान ही मिटा दी।

और जब यही प्रक्रिया लाखों लोगों पर लागू हो, तो इसे केवल कंप्यूटर की गलती कहकर आगे बढ़ जाना लोकतंत्र के साथ मजाक है।

पश्चिम बंगाल में मामला और बड़ा है। लगभग 27 लाख मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया। फिर अपील का रास्ता खोला गया। लाखों अपीलें आईं। लगभग 38 लाख अपीलों में सितंबर तक केवल करीब 1.02 लाख का निपटारा हो सका था। लगभग 97 प्रतिशत मामले लंबित! यह कैसी अपील व्यवस्था है? अगर इसी गति से काम चलता रहा, तो चुनाव आते रहेंगे और मतदाताओं के मामले अदालतों और ट्रिब्यूनलों में पड़े रहेंगे। और तब तक जिन लोगों का वोट छिन गया, वे क्या करेंगे? अगले चुनाव का इंतजार? लेकिन जिस चुनाव में उनका वोट नहीं पड़ा, वह चुनाव तो वापस नहीं आएगा। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के इसी मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची की टिप्पणी का आशय यह था कि यदि कोई इस बार मतदान नहीं कर पाया, तो अगली बार कर सकता है।

लेकिन लोकतंत्र में यह कैसी व्यवस्था है, जिसमें नागरिक के मताधिकार को “इस बार नहीं, तो अगली बार” कहकर टाला जा सकता है? वोट कोई बस नहीं है कि छूट गई, तो अगली पकड़ लेंगे। जिस चुनाव में नागरिक का वोट नहीं पड़ा, उस चुनाव में वह नागरिक सत्ता के निर्माण से बाहर कर दिया गया।

और फिर चुनावी प्रक्रिया की दूसरी विसंगतियाँ। एक ही मतदाता के एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में नाम होने के आरोप। एक ही मकान के पते पर असामान्य संख्या में मतदाताओं के नाम। मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में बने रहने के मामले। हरियाणा में एक ब्राजीलियाई मॉडल की तस्वीर अलग-अलग नामों के साथ अनेक मतदाता प्रविष्टियों में मिलने का मामला। उम्मीदवारों के नामांकन को लेकर उठे सवाल। और श्याम रंगीला जैसे व्यक्ति का प्रधानमंत्री के विरुद्ध वाराणसी से चुनाव लड़ने का प्रयास नामांकन प्रक्रिया में ही समाप्त हो जाना।

क्या ये सब लोकतंत्र की सामान्य धड़कनें हैं? नहीं। जब ऐसी घटनाएँ एक-दूसरे के साथ दिखाई देने लगें, तो नागरिक को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। और सवाल पूछने वाला नागरिक किसी राजनीतिक दल का एजेंट नहीं होता। वह लोकतंत्र का असली मालिक होता है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज चुनाव आयोग कह रहा है— “नोटिस मिला है, नाम अभी नहीं कटा है।” लेकिन नागरिक पूछ रहा है — नाम काटने की नौबत ही क्यों आई? पुराना रिकॉर्ड तुम रखो और मुझे ढूँढ़ने का काम क्यों? तुम्हारे पास मेरा आधार है, पता है, मतदाता पहचान-पत्र है, पिछले चुनावों का रिकॉर्ड है — फिर भी मुझे साबित क्यों करना है कि मैं, मैं हूँ?

यह कैसी व्यवस्था है, जिसमें नागरिक अपनी पहचान का प्रमाण देता है और व्यवस्था अपनी गलती का नहीं। संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान होना चाहिए। लेकिन संवैधानिक संस्था और उस संस्था पर बैठे व्यक्ति एक ही चीज नहीं हैं। संस्था संविधान से बड़ी नहीं हो सकती। और संस्था पर बैठे व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं हो सकते। इसलिए यदि किसी निर्वाचन अधिकारी के निर्णय पर सवाल उठता है, तो केवल इसलिए उसे सम्मान की ढाल नहीं दी जा सकती कि वह चुनाव आयोग में बैठा है। यदि किसी न्यायिक निर्णय पर सवाल उठता है, तो केवल इसलिए सवाल पूछना बंद नहीं किया जा सकता कि निर्णय देने वाला न्यायाधीश है।

संविधान का सम्मान करने का अर्थ संवैधानिक पद पर बैठे हर व्यक्ति के प्रति अंध-श्रद्धा रखना नहीं है। लोकतंत्र में संस्थाओं की सबसे बड़ी सुरक्षा यही है कि उनके काम पर कठोर सवाल पूछे जाएँ।

आज जरूरत इस बात की नहीं है कि हम इन संस्थाओं के प्रति ‘सदय’ हों। सदय तो मतदाता के प्रति होना चाहिए। उस बूढ़े मतदाता के प्रति, जिसे मृत बता दिया गया। उस गरीब के प्रति, जिसके पास पुराने कागज नहीं हैं। उस प्रवासी के प्रति, जिसका पता बदल गया है। उस नागरिक के प्रति, जिसका नाम सूची से गायब हो गया है। और उस नागरिक के प्रति, जिसे कहा जा रहा है — “इस बार नहीं, तो अगली बार वोट दे देना।”

नहीं। लोकतंत्र में मतदाता अगली बार के भरोसे नहीं जीता। हर चुनाव में उसका अधिकार उसी चुनाव के दिन जीवित रहता है।

इसलिए आज सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दिल्ली में 33 लाख लोगों को नोटिस क्यों मिला। सवाल यह है कि मतदाता कटघरे में क्यों है? जिसे चुनाव कराना है, वह सवाल पूछ रहा है। जिसे वोट देना है, वह जवाब दे रहा है। जिसके पास रिकॉर्ड है, वह नागरिक से रिकॉर्ड माँग रहा है। और जिसकी मशीन ने गलती की है, उसी मशीन के सामने नागरिक अपनी बेगुनाही साबित कर रहा है।

यह लोकतंत्र की स्वाभाविक स्थिति नहीं है। यह लोकतंत्र का उलटा खड़ा कर दिया जाना है। ईमानदार मतदाता कटघरे में है। इसलिए सवाल पूछने की जरूरत अब मतदाता से नहीं, बेईमान चुनाव आयोग से है।

लेखक के बारे में

News Desk

‘विजुअल लाइव’ का न्यूज डेस्क खबरों के संकलन, संपादन, सत्यापन और प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण केंद्र है। देश-प्रदेश की राजनीति, प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था, अपराध, शिक्षा, रोजगार और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर लगातार नजर रखते हुए डेस्क पाठकों तक जरूरी और महत्वपूर्ण खबरें पहुंचाने का कार्य करता है। न्यूज डेस्क की टीम विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं की पड़ताल कर खबरों को तथ्यपरक, स्पष्ट और संतुलित स्वरूप देती है। खबर की भाषा, तथ्य, शीर्षक, प्रस्तुतीकरण और डिजिटल प्रकाशन से जुड़े प्रत्येक पहलू पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बदलते डिजिटल मीडिया के दौर में न्यूज डेस्क की भूमिका केवल खबर प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है। ब्रेकिंग न्यूज की त्वरित अपडेटिंग, SEO आधारित प्रस्तुतीकरण, सोशल मीडिया वितरण और पाठकों की रुचि के अनुरूप खबरों के प्रभावी डिजिटल प्रकाशन पर भी टीम लगातार काम करती है। ‘विजुअल लाइव’ का न्यूज डेस्क पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों—तथ्य, विश्वसनीयता, निष्पक्षता और जनसरोकार—को प्राथमिकता देते हुए पाठकों को तेज, भरोसेमंद और उपयोगी समाचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। News Desk की सभी खबरें देखें →

Leave a Comment

Don't worry! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

संबंधित लेख

टॉप रीड्स

23 Sept 2026

गोरखपुर में द हेजलनट फैक्ट्री का नया आउटलेट शुरू, CM योगी ने किया उद्घाटन

24 Sept 2026

यूपी में मौसम फिर बदलेगा मिजाज, 25-26 सितंबर को पूर्वांचल में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

24 Sept 2026

यूपी में सपा-कांग्रेस के गठबंधन पर बढ़ी खींचतान, इकरा हसन के बयान ने सीट बंटवारे की बहस को दी हवा

23 Sept 2026

वाराणसी मंडल के 11 रेलकर्मियों को Excellence Award से सम्मान

22 Sept 2026

जलस्तर घटने के बाद मणिकर्णिका घाट पर सफाई, गंगा की तलहटी से निकला करीब 100 किलो कपड़ा

22 Sept 2026

वाराणसी में IPS अधिकारियों को दी गई विदाई, पुलिस आयुक्त ने कार्यों की सराहना की

22 Sept 2026

यूपी विधान परिषद चुनाव 2026 का कार्यक्रम घोषित, 23 अक्टूबर को मतदान और 27 को मतगणना

24 Sept 2026

विदेशी आक्रांताओं ने भारत का वैभव ही नहीं, ज्ञान परंपरा मिटाने की भी कोशिश की: योगी