आरटीओ-एआरटीओ कार्यालयों पर अब सीधी नजर, 75 अधिकारी करेंगे औचक जांच

लखनऊ। कानपुर आरटीओ कार्यालय में हुई छापेमारी के बाद परिवहन विभाग ने प्रदेशभर के आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों की व्यवस्थाओं की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है। दलालों की मौजूदगी, अनधिकृत लोगों की दखलंदाजी और सीसी कैमरों की खराब व्यवस्था को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच विभाग ने सभी कार्यालयों के औचक निरीक्षण के आदेश जारी किए हैं।
आरटीओ और उससे ऊपर के पदों पर तैनात 75 परिवहन अधिकारियों को जिलावार कार्यालयों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को बिना पूर्व सूचना के मौके पर पहुंचकर कार्यालय की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना होगा। निरीक्षण के बाद महज औपचारिक रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक अधिकारी को 10 दिन के भीतर कमियों और अनियमितताओं का स्पष्ट ब्योरा मुख्यालय को देना होगा।
कानपुर की छापेमारी के बाद बढ़ी सख्ती
दरअसल, 24 अगस्त को कानपुर आरटीओ कार्यालय में जिला प्रशासन और एसओजी क्राइम ब्रांच की संयुक्त छापेमारी की गई थी। कार्रवाई के दौरान नकदी बरामद होने के साथ कुछ दलालों को पकड़ा गया था। इस कार्रवाई के बाद परिवहन कार्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे थे। अब विभाग ने एक कार्यालय तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश में व्यवस्था की पड़ताल का निर्णय लिया है।
अपर परिवहन आयुक्त प्रशासन चित्रलेखा सिंह की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि इंटरनेट मीडिया, समाचार पत्रों और जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से परिवहन कार्यालयों में दलालों की गतिविधियों, अनधिकृत लोगों की मौजूदगी और पारदर्शिता की कमी से संबंधित शिकायतें लगातार मुख्यालय तक पहुंच रही हैं।
सीसीटीवी कैमरों की भी होगी जांच
औचक निरीक्षण के दौरान कार्यालयों में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति भी जांची जाएगी। विभाग के अनुसार कई कार्यालयों में अभी तक कैमरे नहीं लगाए गए हैं, जबकि कुछ जगह कैमरे होने के बावजूद उनके ठीक से काम नहीं करने की शिकायतें सामने आई हैं। निरीक्षण अधिकारी यह भी जांचेंगे कि कैमरे चालू हैं या नहीं और कार्यालय की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी हो रही है या नहीं।
इसके अलावा कार्यालयों में दलालों की आवाजाही, अनधिकृत लोगों की मध्यस्थता और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में होगी। तैनात कार्मिकों का विवरण, उनकी पहचान और ड्यूटी के दौरान पहचान पत्र पहनने की व्यवस्था की भी पड़ताल की जाएगी।
10 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली प्रत्येक कमी और अनियमितता को रिपोर्ट में दर्ज करना होगा। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर संबंधित आरटीओ-एआरटीओ कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।
जिलावार जांच के तहत लखनऊ आरटीओ कार्यालय का निरीक्षण अयोध्या के उप परिवहन आयुक्त राजकुमार सिंह करेंगे। प्रदेश के अन्य जिलों के कार्यालयों की जिम्मेदारी भी वरिष्ठ परिवहन अधिकारियों को दी गई है।
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि सभी अधिकारियों से 10 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट में कार्यालय की कमियों और अनियमितताओं का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इसके आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
परिवहन कार्यालयों को दलाल मुक्त और पारदर्शी बनाने के निर्देश पहले भी कई बार जारी किए जा चुके हैं। विभाग के मुताबिक वर्ष 2018 से अब तक इस संबंध में सात बार पत्र जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद शिकायतें जारी हैं। अब औचक निरीक्षण के जरिए जमीनी हकीकत सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
75 अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन कार्यालयों में व्यवस्था नियमों के मुताबिक चल रही है और कहां अनियमितताएं बरती जा रही हैं। विभाग ने गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई के संकेत पहले ही दे दिए हैं।
लेखक के बारे में
Syed Fiza Khatoon
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