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‘हनुमान अंश’- फिल्म जो मन-मंदि‍र में बस जाए...

By Abhimanyu Kumar Sharma·02 Sept 20266415
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‘हनुमान अंश’- फिल्म जो मन-मंदि‍र में बस जाए...

धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं की तीर्थयात्रा

सिनेमा के पर्दे पर सैकडों फिल्में आती हैं, जिन्हें देखकर हम बाहर निकलते हैं और कुछ देर बाद भूल जाते हैं। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो सिनेमाघर से बाहर निकलने के वर्षाें बाद भी मन के किसी कोने में चुपचाप बनी रहती हैं। ताजा रिलीज हुई फिल्म ’‘हनुमान अंश’’ एक ऐसी ही फिल्म नजर आती है।

इन दिनों इस फिल्म का एक बुंदेलखंडी भजन ’’‘मैंने तेरे ही सहारे हनुमान’’’ सोशल मीडिया और सिनेमा प्रेमियों के बीच धूम मचाए हुए है। कोई इसे सुनकर भावुक हो रहा है, किसी की आंखें नम हो जा रही हैं तो कोई इसके सुरों में डूबकर झूम उठता है। इस गीत की खासियत शायद यही है कि यह सिर्फ कानों तक नहीं पहुंचता, सीधे मन को छूता है।

हिंदी भक्ति सिनेमा के दर्शकों को लंबे समय बाद ऐसी फिल्म देखने को मिली है, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ-साथ इंसानी संवेदनाओं और आध्यात्मिक शांति को भी जगह मिली है। ’‘हनुमान अंश’’ देखने के बाद हर दर्शक के मन में एक सवाल जरूर रह जाता है कि हम ईश्वर को कहां खोजते हैं और क्या ईश्वर तक पहुंचने का रास्ता इंसानियत से होकर भी गुजरता है? आध्‍यत्‍मकि प्‍यास को जगाती यह फि‍ल्‍म हर वर्ग और उम्र के दर्शक को कुछ न कुछ सीख देती नजर आती है।

बड़े सितारों के बिना कहती है बड़ी बात

फिल्मों की चर्चा अक्सर उनके बजट, बड़े सितारों, भव्य सेट और उच्च तकनीकि वाले वीएफएक्स से शुरू होती है। ऐसे समय में ‘हनुमान अंश’ का सफर थोड़ा अलग है। सीमित बजट और बिना किसी बड़े स्टार के बनी इस फिल्म ने धीरे-धीरे दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई है।

लगभग ’’दो करोड़ रुपये के बजट’’ में बनी फिल्म का कारोबार 25 दिनों में करीब ’’50 करोड़ रुपये’’ तक पहुंचना अपने आप में उल्लेखनीय है। शुरुआत में फिल्म को सीमित प्रचार और बड़ी फिल्मों के बीच स्क्रीन की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा, लेकिन दर्शकों की प्रतिक्रिया ने धीरे-धीरे इसकी तस्वीर बदल दी। यही वजह है कि इसे 2026 की चर्चित ’’स्लीपर हिट’’ फिल्मों में शामिल किया जा रहा है। लेकिन ‘हनुमान अंश’ की कहानी केवल बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों की नहीं है। इसकी असली कहानी उन दर्शकों की है, जिन्होंने फिल्म को दूसरों तक पहुंचाया और कहा ''एक बार इसे देखिए''।

लक्ष्मीनारायण से नीम करोली बाबा तक का सफर

विशाल चतुर्वेदी के लेखन और निर्देशन में बनी ‘हनुमान अंश’ एक जिज्ञासु युवा लक्ष्मीनारायण की आध्यात्मिक यात्रा को सामने लाती है। जीवन, मृत्यु और मानव पीड़ा से जुड़े सवाल उसे भीतर तक बेचैन करते हैं। इन सवालों के जवाब तलाशते हुए वह घर छोड़कर उत्तर भारत की यात्रा पर निकल पड़ते है। इस यात्रा में उसका सामना साधु-संतों, श्रद्धालुओं और आम लोगों से होता है। धीरे-धीरे यही यात्रा उन्‍हें उस आध्यात्मिक व्यक्तित्व में ढ़ालती जाती है, जिसे दुनिया आगे चलकर ’’नीम करोली बाबा’’ के नाम से जानती है। फिल्म की खूबसूरती यह है कि यह केवल घटनाओं का सिलसिला नहीं सुनाती। यह एक मनुष्य के भीतर होने वाले बदलावों को महसूस कराने की कोशिश भी करती है।

भक्ति का अर्थ सिर्फ पूजा नहीं

‘हनुमान अंश’ का सबसे मजबूत पक्ष इसका मानवीय संदेश है। फिल्म भगवान हनुमान के प्रति नीम करोली बाबा की अगाध भक्ति को सामने रखते हुए यह समझाने की कोशिश करती है कि भक्ति केवल मंदिर में जाकर सिर झुकाने या मंत्रों का जाप करने तक सीमित नहीं है। अगर किसी भूखे को भोजन दिया, किसी दुखी के आंसू पोंछे, किसी जरूरतमंद का हाथ थामा या बिना किसी स्वार्थ के किसी की मदद की तो यह भी सच्ची भक्ति का ही रूप है। प्रेम, करुणा, सेवा और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता को फिल्म आध्यात्मिकता का वास्तविक रूप मानती है। यही बात इसे महज एक धार्मिक फिल्म से आगे ले जाती है।

चमत्कार से ज्यादा इंसानियत पर भरोसा

‘हनुमान अंश’ की एक खास बात यह भी है कि यह आध्यात्मिकता को केवल चमत्कारों के सहारे साबित करने की कोशिश नहीं करती। फिल्म में मानवीय रिश्ते, भावनाएं और संघर्ष ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं। एक दुखी बच्चे की अपनी मां को खोजने की यात्रा भी इसी मानवीय पक्ष को सामने लाती है। उसके लिए मां की तलाश केवल एक व्यक्तिगत पीड़ा नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे जीवन को समझने और आध्यात्मिक सत्य की ओर बढ़ने का माध्यम बन जाती है। यहीं फिल्म दर्शक के दिल के सबसे करीब पहुंचती है। हनुमान अंश’ ईश्वर को आसमान में खोजने के बजाय इंसान के भीतर और उसके अच्छे कर्मों में खोजने की कोशिश करती है।’’

शोभिनव सत्‍या ने निभाया नीम करोली बाबा का किरदार

फिल्म के केंद्र में हैं ’’शोभिनव सत्‍या’’, जिन्होंने नीम करोली बाबा की भूमिका निभाई है। यह उनका फिल्मी डेब्यू है। फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई), पुणे के पूर्व छात्र रहे शोभिनव ने बाबा के किरदार को निभाते हुए जिस सादगी और संयम का परिचय दिया है, वह फिल्म की बड़ी खूबियों में शामिल है। उनके अभिनय में दिखावा कम और भाव ज्यादा नजर आते हैं। चेहरे के भाव, संवाद बोलने का अंदाज और किरदार की सहजता दर्शक को धीरे-धीरे अपने साथ जोड़ती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि शोभिनव सत्‍या को किसी बड़े स्टार की लोकप्रियता का सहारा नहीं मिला। उन्होंने अपने किरदार के जरिए पहचान बनाने की कोशिश की है और यही इस फिल्म की पूरी भावना से भी मेल खाता है ’’नाम से ज्यादा काम मायने रखता है।’’

एक आवाज जो सीधे दिल तक पहुंचती है

फिल्म के संगीत की चर्चा किए बिना ‘हनुमान अंश’ की बात अधूरी रहेगी। खासकर बुंदेलखंड के दृष्टिबाधित गायक ’’सुनील लोधी’’ की आवाज में गाया गया ’’‘मैंने तेरे ही सहारे हनुमान’’’ लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना है। इस गीत में न कोई बनावटी चमक है और न ही आवाज में दिखावे की कोशिश। इसमें मिट्टी की खुशबू है, लोक संगीत की सहजता है और भक्ति की सच्चाई है। शायद यही कारण है कि गीत सुनते हुए कई लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। एक तरह से यह गीत फिल्म के पूरे भाव को आवाज देता है ’’भरोसा, समर्पण और उस अदृश्य शक्ति के प्रति आस्था, जो मुश्किल समय में इंसान को संभालती है।’’

इनके अलावा गायक साधु एस तिवारी, श्रेयश धर्माधिकारी, निवेदिता पद्मनाभन, ऋष‍ि पाठक और कृृृृृष्‍णा दास ने भी अपने सुरों से इस धार्मिक कहानी को जीवंत किया है।

सादगी में छिपी है फिल्म की खूबसूरती

‘हनुमान अंश’ को अगर बड़े बजट की पौराणिक फिल्मों के पैमाने पर देखा जाए तो शायद इसकी तुलना करना उचित नहीं होगा। इसकी अपनी गति है, अपना संसार है और अपनी भाषा है। यह फिल्म दर्शक को हर कुछ मिनट में चौंकाने या मनोरंजन का शोर पैदा करने की कोशिश नहीं करती। कई दृश्यों में इसकी खामोशी ही सबसे ज्यादा बोलती है।

इसके संवाद, भावनात्मक दृश्य और आध्यात्मिक वातावरण फिल्म को एक अलग अनुभव देते हैं। कुछ समीक्षकों ने इसकी गति को कुछ स्थानों पर धीमा जरूर माना है, लेकिन फिल्म के भावनात्मक और आध्यात्मिक प्रभाव की सराहना भी की गई है।

विशाल चतुर्वेदी की अलग कोशिश

‘हनुमान अंश’ का लेखन और निर्देशन ’’विशाल चतुर्वेदी’’ ने किया है। फिल्म के निर्माता विशाल चतुर्वेदी के साथ ’’अनुप्रिया नगर, नम्रता जी. सिंह और रागिनी सोना’’ हैं। संगीत साधु सुशील तिवारी, और पृष्ठभूमि संगीत - धीरेंद्र मुल्कलवार ने रचा है। ’’स्वम्भू मीडिया नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड’’ के बैनर तले बनी यह फिल्म लगभग 2 घंटे 30 मिनट लंबी है और 7 अगस्त 2026 को हिंदी में सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म को यू प्रमाणपत्र मिला है। निर्माण के स्तर पर यह एक ऐसी कोशिश है, जिसमें बड़े संसाधनों के बजाय विषय और भावनाओं को महत्व दिया गया है। यह फिल्‍म तीन फिल्‍मों की सीरीज के रूप में प्रस्‍तुत की जा रही है जिसकी पहली कड़ी आपके सामने है।

असली जीत दर्शकों के दिल में

किसी फिल्म की सफलता केवल इस बात से तय नहीं होती कि उसने कितने करोड़ रुपये कमाए। कभी-कभी किसी फिल्म की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह होता है कि दर्शक उसे देखने के बाद उसके बारे में दूसरों से बात करने लगते हैं। ‘हनुमान अंश’ के साथ भी कुछ ऐसा ही होता दिखाई दे रहा है। शुरुआत में भले ही इसे बहुत ज्यादा चर्चा नहीं मिली, लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों के बीच इसकी बात पहुंची। किसी ने गीत साझा किया, किसी ने फिल्म की कहानी बताई और किसी ने अपने अनुभव के बारे में लिखा। यही ’’वर्ड ऑफ माउथ’’ फिल्म के लिए सबसे बड़ा प्रचार बन गया।

लगभग दो करोड़ रुपये की लागत वाली फिल्म का करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंचना निश्चित रूप से व्यावसायिक उपलब्धि है, लेकिन इससे भी बड़ी उपलब्धि शायद यह है कि फिल्म ने दर्शकों को ’’कुछ महसूस करने, कुछ सोचने और कुछ देर ठहरने’’ के लिए मजबूर किया।

लेखक के बारे में

Abhimanyu Kumar Sharma

श्री शर्मा एक अनुभवी पत्रकार, संपादक एवं जनसंपर्क संचार विशेषज्ञ हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, मीडिया प्रबंधन, कंटेंट एडिटिंग और पब्लिक रिलेशंस के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वे एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान में वरिष्ठ संपादक, सूचना एवं जनसंपर्क के पद पर कार्यरत हैं। अपने पत्रकारिता करियर में उन्होंने दैनिक जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ कार्य किया है। लेखन एवं संपादन के साथ-साथ उन्हें फोटो-जर्नलिज्म और फोटोग्राफी में भी विशेष रुचि है। उनकी फोटोग्राफी को National Geographic द्वारा प्रकाशित एवं सम्मानित किया जा चुका है। मीडिया, संस्थागत संचार और रचनात्मक लेखन के अनुभव के साथ वे प्रभावी संचार, मीडिया संबंधों और सकारात्मक संस्थागत छवि निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। Abhimanyu Kumar Sharma की सभी खबरें देखें

टिप्पणियाँ (2)

  • Nice

    Shiva Singh

    · 02 Sept 2026, 12:45 pm
  • बहुत सुंदर फिल्म है

    Ram Karan yadav

    · 02 Sept 2026, 12:40 pm

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