राम चरितमानस से मिलती है धर्म, मर्यादा और सदाचार की प्रेरणा : डा दिनेश शर्मा
गोस्वामी तुलसीदास ने लहराई थी सनातन की पताका
कानपुर की संस्कृति है बेजोड और लोगों का स्नेह बेमिसाल
कानपुर में गंगा के साथ बहती है ज्ञान की गंगा
परिवार के बुजुर्ग होते है घर की आत्मा
कानपुर / लखनऊ । राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने अलौकिक ग्रन्थ रामचरितमानस को अवधी में लिखकर जन जन तक पहुचाने का कार्य किया। इसके जरिए उन्होंने राम राज्य का एक ऐसा स्वरूप प्रस्तुत किया जिससे वे लोगों के दिल में बस गए। तुलसीदास द्वारा लिखित रामचरितमानस भारत की संस्कृति और परम्परा की परिचायक है। ये समाज को धर्म , मर्यादा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। ये व्यक्ति को बेहतर इंसान भी बनाती हैं।
तुलसी उपवन, मोतीझील, कानपुर में डॉ. बद्रीनारायण तिवारी को समर्पित साहित्यिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक संस्था ‘मानस संगम’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद ने कहा कि गोस्वामी जी ने मानस को समाज की विकृतियों को दूर करने के लिए ही लिखा था। कहा जाता है कि उन्हे भगवान शंकर ने स्वप्र में दर्शन देकर इसे लिखने की प्रेरणा दी थी। बजरंग गली हनुमान जी के आशीर्वाद से उन्होंने इसे लिखा था। प्रभु राम का नाम संकट को दूर करने वाला है। दूसरो को दुख देने वाले को जीवन में सुख की प्राप्ति नहीं होती है। जब व्यक्ति दूसरे के दुख की अनुभूति करने लगेगा तो उसका खुद ही भला हो जाएगा।
डा शर्मा ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी एक प्रतिष्ठित आचार्य थे जिन्होने सनातन मूल्यों की पताका लहराई थी। उन्होंने जेल में रहते हुए हनुमान चालीस को लिखा था। इसका पाठ संकट को दूर करने वाला है। गोस्वामी जी ने बजरंग बाण की भी रचना की थी।
कानपुर की संस्कृति को बेजोड बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां के लोगों का स्नेह बेमिसाल है। यहां पर केवल गंगा नदी ही नहीं बहती है बल्कि लोगों के मन में ज्ञान की गंगा भी बहा करती है। तुलसी उपवन को राम सर्किट में शामिल करने की मांग से सहमति जताते हुए कहा कि वे सीएम से भी इस सम्बन्ध में चर्चा करेंगे। उन्होंने विशेष अवसरों पर रामायण और हुनमान चालीसा के सार्वजनिक पाठ का अभियान चलाने की अपील करते हुए कहा कि ये आत्मा के जागरण के लिए जरूरी है। इससे समाज भी एकजुट होगा।
सांसद ने पारिवारिक व्यवस्था को बचाने की अपील करते हुए कहा कि संयुक्त परिवार का चूल्हा परिवार को जोडता है, उसे घरों में रखने की जरूरत है। बुजुर्ग घर की आत्मा की तरह होते हैं। बच्चों में संस्कारो का समावेश होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज तेजी से बदल रहा है । आने वाले समय में 2030 के बाद देश की आबादी कम होने लगेगी तथा इसके साथ युवाओं की आबादी भी कम होने और बुजुर्ग आबादी बढने लगेगी। इसका कारण सनातन आबादी की प्रजनन दर में कमी होना है। अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में सनातन के अस्तित्व पर ही संकट आ जाएगा। संस्कृति से दूर होने के कारण समाज का सांस्कृतिक पराभव हो रहा है। परिवार की व्यवस्था टूटने के कगार पर है जिसे बचाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मंत्री दया शंकर मिश्रा 'दयालू', अध्यक्ष महंत सिद्धनाथ धाम कानपुर पूज्य बालयोगी अरुण चैतन्यपुरी जी महाराज, सांसद रमेश अवस्थी, विधायक एवं पूर्व मंत्री नीलिमा कटियार, भाजपा अध्यक्ष अनिल दीक्षित, आचार्य पीयूष जी महाराज, सदस्य विधान परिषद अरुण पाठक, कार्यक्रम संयोजक विजय नारायण तिवारी "मुकुल", उपाध्यक्ष कानपुर भाजपा शशांक मिश्रा, भाजपा उपाध्यक्ष शिवांग मिश्रा, कानपुर भाजपा महामंत्री प्रमोद विश्वकर्मा, डॉo दिवाकर मिश्रा, प्रसिद्ध कवि रामायण धर द्विवेदी, वरिष्ठ भाजपा नेता आलोक मिश्रा, वरिष्ठ व्यापारी नेता विनोद गुप्ता, युवा शिक्षक नेता वेणुरंजन भदौरिया, मनोज तिवारी, सतीश तिवारी, संचालक डॉ. प्रदीप दीक्षित, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष केकेसी राजेश शुक्ला आदि उपस्थित रहे।
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