तेज बारिश के बीच ‘मनौतियों के राजा’ को नम आंखों से विदाई, भू-विसर्जन के साथ गणेशोत्सव संपन्न

लखनऊ। तेज बारिश के बीच शुक्रवार को झूलेलाल वाटिका में चल रहे 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन हुआ। बारिश के कारण भगवान गणेश की शोभायात्रा को संक्षिप्त कर कार्यक्रम स्थल पर ही भू-विसर्जन की व्यवस्था की गई। श्री गणेश प्राकट्य कमेटी की ओर से आयोजित उत्सव में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
विसर्जन से पहले पंडाल में आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कराई। इसमें कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य और कार्यकर्ता परिवार सहित शामिल हुए। इसके बाद भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा को रथ पर विराजमान किया गया। श्रद्धालुओं ने ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ बप्पा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की।
इस अवसर पर कमेटी के संरक्षक भारत भूषण गुप्ता, अध्यक्ष घनश्याम अग्रवाल, पार्षद रंजीत सिंह, जय करन सिंह, अखिलेश बंसल, संजय सिंह गांधी, गोपाल अग्रवाल और सुधांशु बाथम समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। महिलाओं में संध्या बंसल, उषा अग्रवाल, रुक्मणी अग्रवाल, अंशु बंसल, विमी बंसल, नेहा बंसल, नीरजा सिंह, अंजू गुप्ता, अनुराधा गोयल और कविता अग्रवाल सहित अन्य श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में भाग लिया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए किया गया भू-विसर्जन
कमेटी के संरक्षक भारत भूषण गुप्ता ने बताया कि गोमती नदी को प्रदूषण से बचाने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी प्रतिमा का भू-विसर्जन किया गया। इसके लिए करीब 25 फुट चौड़ा और 15 फुट गहरा गड्ढा तैयार कर उसमें गोमती नदी का पानी भरा गया। इसके बाद क्रेन की मदद से भगवान गणेश की प्रतिमा को जलाशय में स्थापित कर वैदिक रीति-रिवाज से विसर्जन किया गया।
बप्पा के साथ विसर्जित हुईं 2 लाख चिट्ठियां
संरक्षक भारत भूषण गुप्ता और घनश्याम अग्रवाल ‘गुड्डा’ ने बताया कि 10 दिनों तक चले गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने ‘मनौतियों के राजा’ श्री गजानन के चरणों में करीब 2 लाख चिट्ठियां अर्पित कीं। इन पत्रों में भक्तों ने अपनी मनोकामनाएं लिखीं और उनके पूरा होने की प्रार्थना की। श्रद्धा और विश्वास के साथ लिखी गई इन चिट्ठियों को भी भगवान गणेश की प्रतिमा के साथ विसर्जित कर दिया गया।
विदाई के वक्त नम हुईं श्रद्धालुओं की आंखें
विसर्जन के लिए जब भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा को क्रेन की मदद से जलाशय में उतारा गया तो वहां मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे। बप्पा की विदाई के क्षणों में कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भक्तों ने हाथ जोड़कर भगवान गणेश से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की और ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ गणेशोत्सव का समापन किया।
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