
ऑपरेशन सिंदूर पर संवाद परिचर्चा आयोजित
दया शंकर चौधरी।
लखनऊ। लखनऊ स्थित पूर्व सैनिकों के थिंक टैंक, स्ट्राइव इंडिया ने लखनऊ छावनी स्थित सूर्या ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट में "ऑपरेशन सिंदूर - उभरते भू-राजनीतिक परिदृश्य के कारण चुनौतियाँ और भारत के लिए प्रतिक्रिया हेतु दिशा-निर्देशों में सुधार की आवश्यकता" विषय पर एक संवाद सत्र का आयोजन किया। उत्तरी सेना कमांडर रहे लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, और उरी के बाद 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक के सूत्रधार, ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को एक ऐसी सफलता बताया जिसकी वैश्विक स्तर पर गूंज हुई और जिसने एक आधुनिक सैन्य शक्ति के रूप में भारत की छवि को मज़बूत किया। उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणाली जैसी स्वदेशी प्रणालियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख किया और इन्हें विश्व स्तरीय तकनीक का उपयोग करने की भारत की क्षमता का प्रमाण बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर ने बहुत ही कम समय में निर्णायक परिणाम दिए, लेकिन आगाह किया कि यह भारत के युद्ध सिद्धांत की भविष्य की दिशा तय नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सिंदूर के बाद पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना और जनरल असीम मुनीर की छवि के कारण उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को और बढ़ावा देने का हौसला मिल सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत को पूरी तरह तैयार रहना होगा। व्यापक मंच पर, लेफ्टिनेंट जनरल हुड्डा ने भारत की अपनी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और इस बात पर ज़ोर दिया कि बदलती भू-राजनीति के लिए मज़बूत सैन्य तैयारी और बदलते समीकरणों को संभालने के लिए तेज़ कूटनीति की ज़रूरत है। इस सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, मध्य कमान ने भी भाग लिया, जिन्होंने पूर्व सैनिकों और सेवारत अधिकारियों के साथ बातचीत की। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी में पेशेवर संवाद के महत्व पर ज़ोर दिया। प्रतिभागियों ने आज के जटिल और तेज़ी से बदलते भू-राजनीतिक परिवेश में भारत के रणनीतिक विकल्पों पर एक जीवंत चर्चा की।
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