
वित वर्ष समाप्त राज्य कर अधिकारी करते सह गए पदोन्नति का इंतजार
रवींद्र प्रकाश
लखनऊ । सितंबर माह से पदोन्नति का इंतजार कर रहे राज्य कर अधिकारियों, सहायक आयुक्तों व उपयुकतो के सपनो पर लापरवाह नौकरशाही ने ऐसा पानी फेरा की पदोन्नति पाने का सपना सपना ही रह गया डीपीसी की फाइल संघो के स्मरण करवाने के बाद भी मालगाड़ी की रफ्तार से दौडी लेकिन विडम्बना ये है कि आईएएस.अधिकारियों की पदोन्नति के समय यह मालगाड़ी दिसम्बर माह से ही बुलेट ट्रेन की रफ्तार से दौड़ती है और पहली जनवरी को पद उन्नति सूची जारी होकर अपने स्टेशन पर पहुंच जाती है। सरकारी व्यवस्था में यह दोहरा मापदंड सरकारी सेवकों में भारी असंतोष का जनक बना हुआ है जिस पर राज्य सरकार को ध्यान देना होगा।
सूबे के मुख्यमंत्री के नियंत्रण मे आने वाले उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग मे अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर ऐसी उदासीनता है कि अधिकारियों का मनोबल टूट रहा है। हालत यह है वर्ष 2014 2015 बैच के करीब 50 राज्य कर अधिकारी 10 साल की सेवाएं पूरी करने के बाद भी पदोन्नति की बांट जो रहे है। वही सहायक आयुक्तों की डीपीसी की फाइल जीएसटी मुख्यालय के किसी कोने की शोभा बनी हुई है। हैरत की बात यह है जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी समीक्षा बैठको मे लगातार लेट लतीफी की आदत छोडने के लिए नौकर शाहो की चाभी कसते रहते है।
प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम देव राज ने सभी विभागों के लिए पत्र जारी किया था कि हर हाल मे 15 सितंबर तक डीपीसी की प्रक्रिया पूरी करवा ली जाए, लेकिन राज्य कर विभाग मे सहायक आयुक्त से उपायुक्त पद व उपायुक्त से संयुक्त आयुक्त पदो के लिए डीपीसी कमेटी की बैठक हुई ही नही उसके चलते राज्य कर अधिकारियों की कभी पदोन्नति फस गयी। वही विभाग के अधिकारियों का अपने संघो से भी मोह भंग हो चुका कयोकि 10 बिन्दु के पत्र मे 9 बिन्दुओं मे साहब की महिमा का गुणगान ऐसे होता है कोई आधत्मिक ग्रांथ लिखा हो। यही कारण है कि नौकरशाहों ने भी संघो से दोगज की दूरी मास्क है जरूरी का फारमूला अपना लिया है। ऐसे मे अधिकारियों की आश अब केवल मुख्यमंत्री से है।





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