पहले डर हटाया, फिर बेटी को पढ़ाया-हुनर दिया और रोजगार से जोड़ा, अब आत्मनिर्भरता की राह पर यूपी की महिलाएं : योगी

वाराणसी में कामकाजी महिला सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा- महिला केवल परिवार की शक्ति नहीं, प्रदेश और देश की आर्थिक शक्ति भी बने, यही सरकार का संकल्प
वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल नारों से नहीं, बल्कि महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता के वास्तविक अवसर उपलब्ध कराने से होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने ऐसा वातावरण तैयार किया है, जिसमें बेटियां घर की चौखट से निकलकर अपने सपनों की मंजिल तक पहुंच सकें।
मुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी में आयोजित ‘कामकाजी महिला सम्मान समारोह’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, रसोइयों, सफाई मित्रों और आशा वर्करों समेत विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम में महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और स्वावलंबन से जुड़ी सरकार की प्राथमिकताओं पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
काशी में करीब एक लाख करोड़ की परियोजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 वर्षों में नए कलेवर और नई काया के साथ वैश्विक पहचान दिलाई है। उनके अनुसार काशी में करीब एक लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं या तो पूरी हो चुकी हैं या संचालित हैं।
उन्होंने कहा कि काशी की माताओं, युवाओं, कारीगरों और समाज के प्रत्येक वर्ग ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। देश में नई तकनीक और नवाचार आने पर काशी को उसका लाभ मिल रहा है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय राजनेताओं की चर्चा होने पर काशी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम प्रमुखता से सामने आता है।
2017 के बाद बदली बेटियों की सुरक्षा की तस्वीर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बेटी को स्कूल भेजने से लेकर उसके कॉलेज, बाजार या कार्यस्थल जाने तक परिवार को उसकी सुरक्षा की चिंता रहती थी। घर में शौचालय नहीं होने पर महिलाओं की गरिमा, रसोई में धुएं से स्वास्थ्य और इलाज के लिए आर्थिक संसाधनों की चिंता सामने रहती थी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में डबल इंजन सरकार ने तय किया कि बेटी को पढ़ाना भी है, आगे बढ़ाना भी है और उसके रास्ते से सुरक्षा का भय भी खत्म करना है।
सरकार ने मिशन शक्ति के माध्यम से महिला सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार किया। मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए, महिला बीट पुलिस अधिकारियों की तैनाती और एकीकृत महिला बीट प्रणाली लागू की गई। महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा के लिए 1090 और 181 जैसी व्यवस्थाओं को भी प्रभावी रूप से जोड़ा गया।
महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 10 हजार से बढ़कर 45 हजार
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश पुलिस बल में करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं, जो अब बढ़कर लगभग 45 हजार हो गई हैं। वर्तमान पुलिस भर्ती के बाद यह संख्या और बढ़ेगी। प्रदेश पुलिस बल में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है।
उन्होंने बताया कि पीएसी की तीन महिला बटालियन भी स्थापित की जा रही हैं। इनका नाम वीरांगना अवंतीबाई लोधी, वीरांगना ऊदा देवी पासी और वीरांगना झलकारी बाई कोरी के नाम पर रखा गया है।
5 लाख से अधिक बेटियों के सामूहिक विवाह
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बेटी के जन्म से लेकर उसकी शिक्षा, रोजगार और विवाह तक विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग दे रही है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत बेटी के जन्म से स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 25 हजार रुपये का पैकेज दिया जा रहा है।
वहीं, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से अब तक पांच लाख से अधिक बेटियों का विवाह कराया जा चुका है।
अटल आवासीय विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के माध्यम से बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को कक्षा 6 से 12 तक विस्तारित किया गया है, जबकि अटल आवासीय विद्यालयों में आधी सीटें बेटियों के लिए रखी गई हैं। सैनिक स्कूलों में भी बेटियों के प्रवेश का अवसर सुनिश्चित किया गया है।
50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार जल्द ही स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी छात्राओं को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर प्रस्तावित स्कूटी योजना से जोड़ने की तैयारी कर रही है।

उन्होंने कहा कि बेटियों और युवाओं को टैबलेट एवं स्मार्टफोन देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। कौशल विकास मिशन और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान जैसी योजनाओं के माध्यम से युवाओं और बेटियों को रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
4 हजार महिला डिजिटल उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रोजेक्ट गंगा के तहत प्रदेश की करीब 8,000 न्याय पंचायतों में से 4,000 महिला डिजिटल उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। ये महिलाएं गांवों में डिजिटल माध्यम से विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेंगी।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी जैसी पहल महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन का रास्ता दिखा रही हैं। प्रदेश में 1.20 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, जबकि 28 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
महिला कार्यबल की भागीदारी 36 प्रतिशत से अधिक
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में महिला कार्यबल की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। पहले यह करीब 12 प्रतिशत थी, जो अब 36 प्रतिशत से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, खेल और सेना समेत हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के 24 हजार से अधिक स्टार्टअप में लगभग आधे का संचालन महिलाएं कर रही हैं। वस्त्र एवं हथकरघा उद्योग में भी 80 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं।
महिला केवल परिवार की शक्ति नहीं, आर्थिक शक्ति भी बने
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भूमिका केवल परिवार और रोजगार तक सीमित नहीं होनी चाहिए। निर्णय प्रक्रिया में भी उनकी भागीदारी बढ़ना जरूरी है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के बाद लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत सीटों पर प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा, “महिला केवल परिवार की शक्ति नहीं, बल्कि प्रदेश और देश की आर्थिक शक्ति भी बने, यह सरकार का संकल्प है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की पिछले नौ वर्षों की यात्रा को एक पंक्ति में कहा जाए तो “पहले डर हटाया, फिर बेटी को पढ़ाया, उसे हुनर दिया, रोजगार से जोड़ा और अब आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया।” उन्होंने कहा कि यह यात्रा घर की चौखट से अवसर, अवसर से आत्मविश्वास और आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता तक पहुंचने की यात्रा है।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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