116 ट्रकों का वजन बढ़ाने के मामले में आरटीओ कार्यालय पर आत्मदाह करने पहुंचे ट्रांसपोर्टर

आरटीआई में सामने आए दस्तावेजों का हवाला देकर परिवहन विभाग पर नियमों की अनदेखी का आरोप, एआरटीओ के आश्वासन पर वापस लिया आत्मदाह का फैसला
गोरखपुर। वाहनों के अधिकृत ग्रास व्हीकल वेट (GVW) में अनियमितता के विरोध में एक ट्रांसपोर्टर गुरुवार को गीडा स्थित संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) कार्यालय पर आत्मदाह करने पहुंच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए गीडा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रांसपोर्टर को आत्मदाह से रोका। बाद में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ने संबंधित ट्रकों के ग्रास व्हीकल वेट को एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद ट्रांसपोर्टर ने आत्मदाह का फैसला वापस ले लिया।
कुशीनगर के तमकुहीराज क्षेत्र के बसडीला बुजुर्ग निवासी ट्रांसपोर्टर मृत्युंजय ठाकुर का आरोप है कि परिवहन विभाग ने नियमों के विपरीत कुछ ट्रांसपोर्टरों के 116 ट्रकों का ग्रास व्हीकल वेट मनमाने तरीके से बढ़ा दिया। उनका दावा है कि कुछ वाहनों का वजन बढ़ाया गया, जबकि कुछ अन्य वाहनों का निर्धारित वजन कम कर दिया गया।
मृत्युंजय ठाकुर ने बताया कि इस संबंध में परिवहन विभाग के अधिकारियों और जिलाधिकारी से कई बार शिकायत की जा चुकी है। विभाग को पत्र भी दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से क्षुब्ध होकर उन्होंने आरटीओ कार्यालय पर आत्मदाह करने का निर्णय लिया।
आरटीआई में सामने आए वजन बढ़ाने के रिकॉर्ड
मामले में आरटीआई से प्राप्त सूचनाओं का हवाला दिया जा रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, 30 अगस्त 2023 को ट्रक संख्या यूपी 53 एफटी 2349 का ग्रास व्हीकल वेट 49,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 51,000 किलोग्राम किए जाने की जानकारी सामने आई। इसी तरह एक सितंबर 2023 को ट्रक संख्या यूपी 53 एफटी 2358 के वजन में भी बदलाव किए जाने का उल्लेख है।
आरटीआई में सामने आए अन्य रिकॉर्ड के मुताबिक, देवरिया के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी स्तर से भी कुछ ट्रकों के पंजीकरण के समय दर्ज कुल वजन में बदलाव किया गया। उदाहरण के तौर पर यूपी 52 बीटी 2329 और यूपी 52 बीटी 2330 का ग्रास व्हीकल वेट 47,500 किलोग्राम से बढ़ाकर 53,500 किलोग्राम किए जाने का उल्लेख है।
इसी तरह यूपी 53 केटी 9546 का पंजीकरण के समय दर्ज 49,000 किलोग्राम ग्रास व्हीकल वेट बढ़ाकर 51,000 किलोग्राम किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा यूपी 53 केटी 9547, 9548 और 9549 के वजन में भी बदलाव किए जाने का दावा किया गया है।
दो साल से 116 ट्रकों के वजन पर उठ रहे सवाल
ट्रांसपोर्टर का आरोप है कि 16 चक्का ट्रकों की दो श्रेणियां हैं। इनमें एक श्रेणी का ग्रास व्हीकल वेट 47.50 टन और दूसरी का 49 टन बताया गया है। आरोप है कि परिवहन विभाग ने 49 टन क्षमता वाले 116 ट्रकों का ग्रास व्हीकल वेट बढ़ाकर 51 टन कर दिया।
यदि यह आरोप और दस्तावेजों में दर्ज बदलाव सही पाए जाते हैं तो सवाल उठता है कि इन वाहनों को अतिरिक्त दो टन भार लेकर चलने की अनुमति किस आधार पर मिली और किस अधिकारी के आदेश से वजन में बदलाव किया गया? यह भी जांच का विषय है कि निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले इन वाहनों के खिलाफ पिछले दो वर्षों में क्या कार्रवाई हुई।
ट्रांसपोर्टर का कहना है कि वजन बढ़ने के बाद संबंधित ट्रक प्रत्येक फेरे में अतिरिक्त माल ढो रहे हैं। इससे न केवल परिवहन व्यवस्था और प्रतिस्पर्धा पर सवाल खड़े होते हैं, बल्कि सड़क पर ओवरलोडिंग के कारण सड़क क्षति और दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
पहले भी जांच के घेरे में आया था मामला
ग्रास व्हीकल वेट में बदलाव का मामला पहले भी सामने आ चुका है। विजुअल लाइव ने छह जनवरी 2026 को ''गोरखपुर RTO में GVW बढ़ाने का खेल! फर्जी वजन से मोटी कमाई-RTI में हुआ खुलासा’ शीर्षक से इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद मामला सामने आने पर उप परिवहन आयुक्त, वाराणसी परिक्षेत्र की ओर से जांच कराए जाने की बात भी सामने आई थी।

आरआई सीमा गौतम पहले ही हो चुकी हैं निलंबित
ग्रास व्हीकल वेट GVW अनधिकृत बढ़ोतरी का मामला विजुअल लाइव द्वारा प्रमुखता से उठाये जाने के बाद परिवहन आयुक्त ने गोरखपुर में तैनात तत्कालीन मोटरयान निरीक्षक (आरआई) सीमा गौतम को निलंबित कर दिया था। निलंबन के दौरान आरआई सीमा गौतम बस्ती में तैनात थी। विभागीय अधिकारियों ने सीमा गौतम का पहले गोरखपुर से बस्ती ट्रांसफर किया और जांच रिपोर्ट आने पर बाद में उसे निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई 172 माल वाहनों के सकल भार यान में अनपेक्षित और अनधिकृत वृद्धि’’ के मामले में की गई थी। मामले की जांच के लिए ’’10 सितंबर 2025 को वाराणसी के उप परिवहन आयुक्त (क्षेत्र) की अध्यक्षता में समिति गठित’’ की गई थी। जांच समिति की रिपोर्ट में एक वाहन के CVW में ’’42,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 43,500 किलोग्राम’’ किए जाने का उल्लेख किया गया था।

अब जांच का दायरा सिर्फ वजन सुधारने तक सीमित नहीं
एआरटीओ की ओर से एक सप्ताह में ग्रास व्हीकल वेट दुरुस्त कराने का आश्वासन दिए जाने के बाद तत्काल संकट टल गया है, लेकिन मामला केवल वजन सुधारने तक सीमित नहीं है। विभागीय स्तर पर यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि जिन वाहनों का वजन बदला गया, वह बदलाव किस अधिकारी ने, किस नियम और किस आधार पर किया।
साथ ही यह भी जांच का विषय है कि वजन में बदलाव के बाद इन वाहनों ने कितने समय तक अतिरिक्त भार के साथ संचालन किया और इस दौरान ओवरलोडिंग के नाम पर क्या कार्रवाई हुई। यदि नियमों के विपरीत वजन बढ़ाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित वाहन संचालकों की जवाबदेही तय करना भी जरूरी होगा। मामले में अब विभागीय अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर नजर है।
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