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'नीतीश कुमार इस पर जवाब दें'- RJD आपको बता दें, बाहुबली नेता अनंत सिंह ने कहा है कि 'मैंने नीतीश कुमार के साथ रहते 9 मर्डर करवाए'।★ लखनऊ: मां चंद्रिका देवी मंदिर के कपाट खुले। मंदिर खुलने से श्रद्धालुओं में खुशी की लहर। सुबह से ही मंदिर में दर्शनों को पहुंचे श्रद्धालु। गोमती का जलस्तर घटा, मार्ग से हटा जलभराव। रास्तों की सफाई के बाद आवागमन सुचारु हुआ। बैरियर पर वाहनों को रोककर पैदल गए श्रद्धालु।★ CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने पर कहा, "SEM कोर्ट में हमने जो देखा, वह किसी सर्कस से कम नहीं है. यहां जो कुछ हो रहा है, उसकी जांच होनी चाहिए और यह भी देखा जाना चाहिए कि ये लोग किस तरह किसी की आज़ादी को कुचलकर काम कर रहे हैं।★ दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला। उत्तराखंड नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का बयान। उत्तराखंड की बेटी को न्याय नहीं मिला। कांग्रेस ने सदन में उठाया था मुद्दा- यशपाल। सरकार पर मामले में चुप्पी साधने का आरोप। सिटिंग जज की निगरानी में ब्ठप् जांच की मांग। आरोपियों को बचाने का सरकार पर आरोप। रेखा आर्य से जुड़े आरोपों को बताया चिंताजनक। महिलाएं खुद को असहज महसूस कर रही-यशपाल।★ यूपी: लखनऊ में एसटीएफ ने अवैध असलहा तस्करी गिरोह के सदस्य को पकड़ा, तीन पिस्टल बरामद।लखनऊ में एसटीएफ ने अवैध असलहा तस्करी गिरोह के कथित सदस्य दुर्गेश पांडेय उर्फ विशु को गिरफ्तार किया है। विभूतिखंड में वेव मॉल के पास हुई कार्रवाई में तीन अवैध पिस्टल बरामद हुईं। आरोपी के मुताबिक, गिरोह मध्य प्रदेश और बिहार से हथियार खरीदकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में महंगे दामों पर बेचता था।★ उत्तराखंड: 26 अक्टूबर से मिठाई की हर ट्रे पर लिखनी होगी बनाने और एक्सपायरी डेट ।★ शेयर बाजार, सेंसेक्स 876 अंक गिरकर 73,852 पर, निफ्टी 257 पॉइंट टूटकर 22,888 पर बंद हुआ ।★ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी (काशी) के दौरे पर रहेंगे, नमो घाट पर भारतीय वायुसेना के भव्य एयर शो को देखेंगे, इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह के भी शामिल होने की संभावना है।★ लखनऊ शिवा शर्मा हत्याकांड में बड़ी अपडेट लखनऊ। हत्याकांड की मुख्य आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे ने कोर्ट में सरेंडर के लिए अर्जी दाखिल की। नौ दिनों से फरार श्रद्धा, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश की तलाश में पुलिस की 10 टीमें जुटी हैं। तीनों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित है, गैर-जमानती वारंट भी जारी हो चुका है। 9 अक्टूबर को अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरकर कारोबारी शिवा शर्मा की मौत हुई थी। नेपाल में ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा देने की चर्चा, लखनऊ से सीतापुर और बहराइच के रास्ते पहुंचने का दावा।★ मेरठ। अमित कश्यप हत्याकांड: पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा,पति की हत्या कर 10 बार सांप से डंसवाया था अमित कश्यप को।★ अनंत सिंह के बयान पर RJD का बड़ा हमला.. 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मुफ्त UPI का सफर खत्म? जानिए कैसे 2,000+ रुपये के ट्रांसफर पर ढीली होगी आपकी जेब

Published By News Desk·26 Aug 2026 08:25 AM (IST)
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मुफ्त UPI का सफर खत्म? जानिए कैसे 2,000+ रुपये के ट्रांसफर पर ढीली होगी आपकी जेब

लेखक : सी पी कृष्णन, अनुवाद : संजय पराते

मोदी सरकार का यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) लेन-देन पर शुल्क लगाने का कदम आम लोगों पर हमला है। 6 अगस्त को सरकार ने लोकसभा में यह विधेयक पारित किया, जिससे यूपीआई ऐप्स के ज़रिए किए जाने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की मंज़ूरी मिल गई है।

यह विधेयक विपक्ष की राय सुने बिना और बिना किसी बहस के पारित कर दिया गया। इसे तानाशाही तरीके से ध्वनि मत के ज़रिए पारित कराया गया है। इस संशोधन के ज़रिए, कॉर्पोरेटों को फायदा पहुंचाने के लिए, सरकार आम लोगों से शुल्क वसूलकर उन्हें सज़ा दे रही है।

आम जनता पर असर

सत्ताधारियों का दावा है कि ये शुल्क केवल व्यापारियों से ही वसूले जाएंगे। लेकिन असल में, व्यापारियों पर लगाया गया कोई भी शुल्क आखिरकार आम लोगों के सिर पर ही पड़ेगा।

करारोपण और अन्य कानून संशोधन विधेयक, 2026 के तहत भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में बदलाव किया गया है। अब तक, यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लेने पर रोक लगाने वाला एक कानून था। 6 अगस्त को सरकार ने उस कानून में बदलाव किया है। अब, अगर सरकार चाहे तो शुल्क लगा सकती है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, केवल 2,000 रूपये से ज़्यादा के यूपीआई लेन-देन पर 0.3–0.5% का चार्ज लग सकता है।

डिजिटलीकरण की ओर बढ़ावा

8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की गई थी। केंद्र सरकार ने दावा किया था कि इससे काला धन, भ्रष्टाचार और नकली नोट की समस्या खत्म हो जाएगी। असल में, इनमें से कोई भी समस्या हल नहीं हुई। इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने लोगों को डिजिटलीकरण (जिसमें यूपीआई भी शामिल था) की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और वादा किया था कि इस पर कभी कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इस भरोसे के कारण लोगों ने इसे बड़े पैमाने पर अपनाया, भले ही शुरुआती दिनों में यह मुश्किल रहा हो।

ज़बरदस्त बढ़ोतरी

यूपीआई लेन-देन में बहुत तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है और यह हर रोज़ तेज़ी से बढ़ रहा है। नवंबर 2016 में, एक महीने में मुश्किल से 3,00,000 लेन-देन हुए थे, जिनका कुल मूल्य 100 रूपये करोड़ था। जुलाई 2026 तक, लेन-देन की संख्या बढ़कर एक महीने में 2,366 करोड़ हो गई, जिनका कुल मूल्य 30 लाख करोड़ रूपये था। इसका मतलब है कि हर दिन लगभग 79 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका मूल्य 1 लाख करोड़ रूपये था। अगस्त 2025 और जुलाई 2026 के बीच, कुल 24,000 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका मूल्य 330 लाख करोड़ रूपये था।

विदेशी कंपनियों का दबदबा

मुख्य सवाल यह है कि इन लेन-देनोंं को कौन नियंत्रित करता है? विदेशी कंपनियों का दबदबा है। अमेरिका की वॉलमार्ट के मालिकाना हक वाली फोनपे 50% और अमेरिका की गूगल पे 33% लेन-देन संभालती हैं। ये दोनों विदेशी कंपनियाँ मिलकर यूपीआई लेन-देन का 83% हिस्सा नियंत्रित करती हैं। दूसरी ओर, एसबीआई पे, पीएनबी पे और बड़ौदा एम पे जैसे सरकारी बैंकों के ऐप्स बाज़ार में नहीं के बराबर हैं। कुल मिलाकर, सभी सरकारी ऐप्स की हिस्सेदारी संख्या और आकार, दोनों ही मामलों में 1% से भी कम है। यह मोदी सरकार का डिज़ाइन है, जो सिर्फ़ विदेशी कंपनियों के ज़रिए ही डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

एकाधिकार रोकने में आरबीआई की नाकामी

दो विदेशी कंपनियों के यूपीआई लेन-देन पर एकाधिकार को लेकर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) के सामने शिकायतें की गई थीं। नवंबर 2020 में, आरबीआई ने एनपीसीआई के ज़रिए एक दिशा-निर्देश जारी किया था कि कोई भी अकेली कंपनी यूपीआई लेन-देन का 30% से ज़्यादा हिस्सा नहीं ले सकती। लेकिन असल में, फोनपे और गूगल पे इस दिशा-निर्देश का उल्लंघन कर रही हैं। आरबीआई ने इस एकाधिकार को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है ; बल्कि, उसने बार-बार इस दिशा-निर्देश को लागू करने में देरी की है और अब इसे जनवरी 2027 तक टाल दिया है। इससे यूपीआई सेवा में विदेशी कंपनियों का एकाधिकार रोकने में आरबीआई की पूरी नाकामी का पता चलता है और अमेरिकी साम्राज्यवाद के सामने भाजपा सरकार का चापलूसी भरा रवैया भी दिखता है।

1.2 लाख करोड़ रुपयों के शुल्क की लूट

अभी, हर महीने यूपीआई लेन-देन का कुल मूल्य 30 लाख करोड़ रूपये है। एक अनुमान के अनुसार, इनमें से लगभग 65% लेन-देन (मूल्य के हिसाब से 20 लाख करोड़ रूपये) 2,000 रूपये से ज़्यादा के हैं। अगर एमडीआर 0.5% हो, तो यूपीआई शुल्क हर महीने 10,000 करोड़ रूपये और सालाना 1.2 लाख करोड़ रूपये होगा। अगर यह 0.3% भी हो, तो भी यह हर महीने 6,000 करोड़ रूपये और सालाना 72,000 करोड़ रुपये होगा। इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा फोनेपे और गूगल पे को होगा, जिनका यूपीआई लेन-देन के कुल आकार में 83% हिस्सा है।

मोदी सरकार की नीति

वित्त वर्ष 2025–26 में, अकेले स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के ग्राहकों ने यूपीआई लेन-देन की संख्या और आकार, दोनों में 20% हिस्सेदारी निभाई थी। लेकिन एसबीआई के अपने ऐप, एसबीआई पे, का योगदान मुश्किल से 0.5% रहा। एसबीआई के ज़्यादातर ग्राहक फोनेपे या गूगल पे का इस्तेमाल करते हैं। इस तरह, राष्ट्रवादी बयानों के बावजूद, मोदी सरकार की नीति ने असल में अमेरिका की विदेशी कंपनियों को बढ़ावा दिया है, और ऐसा शायद अमेरिकी दबाव में किया गया है।

क्या वे नगद (कैश) के चलन को कम कर पाए?

नोटबंदी और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने का एक मकसद नगद के चलन को कम करना था। नवंबर 2016 में 18 लाख करोड़ रूपये का नगद चलन में था, जिसमें से 15.5 लाख करोड़ रूपये को चलन से बाहर कर दिया गया था। जनवरी 2017 तक, 6.5 लाख करोड़ रूपये के नए नोट जारी होने के बाद कुल नगद का चलन 9 लाख करोड़ रूपये के स्तर पर आ गया था। सरकार का दावा था कि कई विकसित पूंजीवादी देशों की तुलना में नगद के चलन को उस स्तर पर बनाए रखना सही था। लेकिन आज, नगद का चलन 42 लाख करोड़ रूपये को पार कर गया है। इसकी एक बड़ी वजह बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और काला धन है। भारी मात्रा में नगद जमा करके रखा गया है और उसे चलन में वापस नहीं लाया गया है।

पैसे के ज़्यादा चलन की एक और वजह कई ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में बिजली, इंटरनेट और दूर संचार टावरों की कमी के कारण डिजिटल सेवाओं को न अपना पाना है। यह बात लोगों के बीच बढ़ती आर्थिक असमानता को भी साफ़ तौर पर दिखाती है। मोदी सरकार, जो कई मामलों में नाकाम रही है, नगद के चलन को कम करने में भी नाकाम रही है।

शुल्क के नाम पर लूट बंद करो!

मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट घरानों — खासकर विदेशी कंपनियों — को फायदा पहुंचाने के लिए यूपीआई पर शुल्क लगाने के मकसद से कानून में बदलाव किया है। इस बदलाव के ज़रिए केंद्र सरकार आम लोगों से हज़ारों करोड़ रुपये लूटने की साफ़ कोशिश कर रही है। सरकार को यह बदलाव तुरंत वापस लेना चाहिए, वरना जनता उसे ऐसा करने पर मजबूर कर देगी।

(लेखक ट्रेड यूनियन नेता हैं। अनुवादक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)

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