अंकित हत्याकांड: SHRC द्वारा मोहित-सुमित प्रकरण में केस दर्ज

अंकित बालियान हत्याकांड के कथित आरोपियों मोहित और सुमित की पुलिस मुठभेड़ में मौत पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
लखनऊ/शामली। उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने शामली के चर्चित अंकित बालियान हत्याकांड के कथित आरोपियों मोहित और सुमित की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के मामले में औपचारिक रूप से केस दर्ज कर लिया है। आयोग ने यह कार्रवाई पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर की ओर से दाखिल शिकायत के आधार पर की है।
आयोग ने शिकायत को Case No. 19186/24/76/2026-AFE के रूप में पंजीकृत किया है। शिकायत में मुठभेड़ की परिस्थितियों, घटनाक्रम और उससे जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

‘हत्याकांड जघन्य था, लेकिन एनकाउंटर की जांच भी जरूरी’
अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में कहा है कि अंकित बालियान की हत्या बेहद जघन्य घटना थी और इसके दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को इस हत्याकांड का आरोपी बताया गया, उनकी पुलिस मुठभेड़ में मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी निष्पक्ष जांच होना भी उतना ही जरूरी है।
उनका कहना है कि किसी अपराध के आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत होने की स्थिति में घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि पूरी कार्रवाई कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुई या नहीं।
30 अगस्त की सोशल मीडिया पोस्ट का शिकायत में जिक्र
अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में 30 अगस्त की रात 8:19 बजे पत्रकार अरुण (आजाद) चहल के X अकाउंट @ArunAzadchahal से की गई एक पोस्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया है।
शिकायत के मुताबिक, इस पोस्ट में दो कथित आरोपियों के पुलिस के हाथ लगने, दो अन्य आरोपियों के भारत से बाहर भागने और उसी रात एनकाउंटर होने की बात कही गई थी।
अमिताभ ठाकुर ने इस पोस्ट और इसके बाद हुए घटनाक्रम के बीच के समय को महत्वपूर्ण बताते हुए आयोग से इसकी जांच कराने की मांग की है।
करीब आठ घंटे बाद मुठभेड़ में दो की मौत
शिकायत में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर उक्त पोस्ट किए जाने के करीब आठ घंटे बाद दो कथित शूटर पुलिस मुठभेड़ में मारे गए। अमिताभ ठाकुर ने इस घटनाक्रम को असाधारण बताते हुए इससे जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
उन्होंने सवाल उठाया है कि सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों और उसके कुछ घंटों बाद हुई कथित पुलिस मुठभेड़ के बीच क्या कोई संबंध था और पुलिस के पास आरोपियों के संबंध में पहले से क्या जानकारी थी।
मानवाधिकार आयोग के सामने अब मामले की जांच का रास्ता खुला
शिकायत को केस के रूप में दर्ज किए जाने के बाद अब यह मामला उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष औपचारिक रूप से पहुंच गया है। आयोग द्वारा आगे की प्रक्रिया के तहत संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट और घटनाक्रम से जुड़े रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं।
फिलहाल आयोग के केस दर्ज करने का अर्थ यह नहीं है कि मुठभेड़ में पुलिस की भूमिका को लेकर कोई निष्कर्ष सामने आ गया है। मुठभेड़ की परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अमिताभ ठाकुर ने आयोग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि मुठभेड़ से जुड़े प्रत्येक तथ्य सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके।
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