राखी का धागा है छोटा सा

राखी का धागा है छोटा सा,
पर इसमें संसार समाया है,
बहन के स्नेह की खुशबू है,
भाई का प्यार समाया है।
बचपन की वो मीठी यादें,
वो लड़ना और मनाना,
कभी रूठना, कभी हँसना,
फिर चुपके से पास आ जाना।
समय की धारा बहती गई,
बचपन पीछे छूट गया,
घर की वो प्यारी गलियाँ छूटीं,
जीवन अपने रास्ते चल गया।
पर एक रिश्ता ऐसा है,
जो वक्त के साथ नहीं बदलता,
दूरियाँ चाहे कितनी हों,
बहन का प्यार कभी कम नहीं होता।
राखी केवल धागा नहीं,
ये विश्वास की पहचान है,
भाई की कलाई पर बंधकर
बहन के दिल का अरमान है।
बहन की हँसी में खुशियाँ हैं,
उसकी आँखों में दुआएँ हैं,
उसके होने से ही तो
घर में कितनी रौनकें हैं।
आज इस पावन पर्व पर
बस इतनी सी दुआ है मेरी—
तेरे जीवन की हर राह पर
खुशियाँ हों साथी तेरी।
न कोई ग़म तुझे छू पाए,
न आँखों में आँसू आएँ,
तेरे हिस्से में खुशियाँ हों,
और होंठ सदा मुस्कुराएँ।
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