हिजाब पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद सियासत तेज
प्रयागराज। स्कूल में हिजाब पहनने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद यूपी में सियासी और धार्मिक बयानबाजी तेज हो गई है। हाईकोर्ट ने प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की नाबालिग छात्रा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि स्कूल की तय यूनिफॉर्म में व्यक्तिगत पसंद के आधार पर अतिरिक्त पहनावा जोड़ने की अनुमति नहीं है। जिसके बाद यूपी समेत देश के राजनैतिक गलियारों में माहौल गर्म हो गया है! कोर्ट के फैसले के बाद अब अलग-अलग राजनीतिक दलों और धर्मगुरुओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
दरअसल, प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा सुकैना रिजवी ने स्कूल की निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ स्कार्फ यानी हिजाब पहनकर कक्षा में बैठने की अनुमति मांगी थी। स्कूल प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। मामले पर न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि स्कूल द्वारा निर्धारित ड्रेस कोड का पालन जरूरी है और व्यक्तिगत पसंद के आधार पर यूनिफॉर्म में बदलाव या अतिरिक्त पहनावा जोड़ने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्कूल यूनिफॉर्म को अनुशासन, समानता, संस्थागत पहचान और पंथनिरपेक्ष माहौल से भी जोड़ा। कोर्ट ने कहा कि तय यूनिफॉर्म में व्यक्तिगत पसंद के आधार पर अतिरिक्त पहनावा जोड़ने की अनुमति नहीं है। वहीं फैसले के बाद योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसा।
वहीं सपा प्रवक्ता आजम खान ने कहा कि पार्टी मामले को कानूनी तौर पर देखेगी और सुप्रीम कोर्ट में अपील के विकल्प पर विचार किया जाएगा।
मौलाना रशीदी ने फैसले पर नाराजगी जताई, जबकि शिया धर्मगुरु यासुब अब्बास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। वहीं मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने स्कूल के ड्रेस कोड का पालन करने की बात कही।
दूसरी तरफ आचार्य विक्रमादित्य महाराज ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। यानी हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिजाब का मुद्दा अब यूपी में सियासी और धार्मिक बहस का केंद्र बन गया है। अलग-अलग पक्षों के बयानों से विवाद और गरमाता नजर आ रहा है।
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