यूपी राज्यसभा चुनाव: बीजेपी के 8 नामों पर मंथन, सपा के तीन प्रत्याशियों की चर्चा से बढ़ी सियासी हलचल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सियासी हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक 29 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है और प्रत्याशी 6 अक्टूबर 2026 तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर नाम वापसी की अंतिम तिथि है। जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना शुरू होगी।
राज्यसभा की इन 10 सीटों को लेकर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों की रणनीति पर निगाहें टिकी हैं। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर बीजेपी गठबंधन की स्थिति मजबूत है, जबकि सपा के लिए दो सीटों पर जीत का गणित अपेक्षाकृत स्पष्ट माना जा रहा है। इसके बावजूद दोनों दल अतिरिक्त सीट को लेकर अपने-अपने स्तर पर रणनीति तैयार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बीजेपी आठवें प्रत्याशी के लिए भी मैदान में उतरने की संभावनाएं तलाश रही है, जबकि सपा तीन प्रत्याशी उतारने की तैयारी में बताई जा रही है।

बीजेपी के 8 नामों पर केंद्रीय नेतृत्व की मुहर का इंतजार
उत्तर प्रदेश बीजेपी की ओर से राज्यसभा की आठ सीटों के लिए संभावित नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजे जाने की खबर है। रिपोर्टों के अनुसार प्रत्येक सीट के लिए तीन-तीन नामों का पैनल तैयार किया गया है, जिनमें से केंद्रीय नेतृत्व को अंतिम आठ नामों पर फैसला करना है। हालांकि, पार्टी की ओर से सामने आया यह पैनल अभी आधिकारिक प्रत्याशी सूची नहीं माना जा सकता।
संभावित नामों को लेकर कई पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों और संगठन से जुड़े नेताओं की चर्चा है। इनमें स्मृति ईरानी, संजीव बालियान, वरुण गांधी, हरीश द्विवेदी समेत कई नाम मीडिया रिपोर्टों में सामने आए हैं। वहीं बीएल वर्मा समेत कुछ मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोबारा मौका मिलने की संभावनाओं पर भी चर्चा है। अंतिम तस्वीर बीजेपी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड के निर्णय के बाद ही साफ होगी।
बीजेपी के भीतर चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि राज्यसभा के लिए संगठन में सक्रिय पदाधिकारियों, सामाजिक एवं क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व तथा नए चेहरों के बीच किस तरह संतुलन बनाया जाता है। महिला प्रतिनिधित्व और ओबीसी सहित विभिन्न सामाजिक समूहों को जगह देने को लेकर भी संभावित नामों के स्तर पर चर्चाएं हैं।

लोक सभा से हारे नेताओं के नाम भी राज्यसभा की रेस में
कौशल किशोर (मोहनलालगंज), राजवीर सिंह ‘राजू’ (एटा), स्मृति ईरानी (अमेठी) और संजीव बालियान (मुजफ्फरनगर) समेत लोकसभा चुनाव में हार चुके करीब आधा दर्जन नेताओं के नाम उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने की संभावित सूची में चर्चा में हैं। इसके अलावा बीजेपी में कुछ ऐसे नामों की भी चर्चा है, जो पहले राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं या केंद्र सरकार में मंत्री हैं। इनमें से कुछ नेताओं को दोबारा मौका दिए जाने की अटकलें हैं।
पार्टी के भीतर इस संभावित चयन को लेकर यह चर्चा भी है कि मेहनत करने वाले मूल संगठन कार्यकर्ताओं की बजाय कुछ नेताओं को ‘पैराशूट’ के जरिए लखनऊ लाकर राज्यसभा का टिकट दिया जा सकता है। हालांकि, बीजेपी की ओर से सोमवार से मीडिया में प्रसारित सूची को आधिकारिक प्रत्याशी सूची नहीं बताया गया है। यह केवल संभावित नामों का पैनल है, जिसकी चर्चा मीडिया रिपोर्टों में की जा रही है। अंतिम फैसला बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
पुराने चेहरों की वापसी या संगठन के नए चेहरों पर दांव?
राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के सामने एक अहम सवाल यह भी है कि कार्यकाल पूरा कर रहे मौजूदा सदस्यों में से कितनों को दोबारा मौका दिया जाए और कितने नए चेहरों को संसद के उच्च सदन में भेजा जाए। मीडिया रिपोर्टों में कुछ ऐसे नाम भी चर्चा में हैं जो पहले राज्यसभा में रह चुके हैं या केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
इसके साथ ही संगठन के स्तर पर सक्रिय नेताओं और पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं में से कुछ अप्रत्याशित नाम सामने आने की संभावना की भी चर्चा है। हालांकि, ऐसे किसी नाम की पुष्टि पार्टी की ओर से नहीं की गई है।
सपा के तीन नामों को लेकर भी सस्पेंस
उधर समाजवादी पार्टी की ओर से राज्यसभा के लिए तीन प्रत्याशी उतारने की तैयारी की चर्चा है। मौजूदा राज्यसभा सदस्य प्रो. रामगोपाल यादव और पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम प्रमुखता से सामने आए हैं। तीसरे प्रत्याशी को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है और अलग-अलग नामों पर अटकलें जारी हैं।
सपा की ओर से तीसरा प्रत्याशी उतारने के पीछे पार्टी के सामाजिक समीकरण और आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर राजनीतिक संदेश देने की रणनीति की चर्चा है। हालांकि संख्या बल के लिहाज से तीसरी सीट के लिए मुकाबला आसान नहीं होगा।
तीसरी सीट पर दिलचस्प होगा मुकाबला
राज्यसभा चुनाव में एक प्रत्याशी को जीत के लिए प्रथम वरीयता के 40 मतों की जरूरत होगी। इसी संख्या बल के कारण सपा के तीसरे और बीजेपी के आठवें प्रत्याशी के बीच संभावित मुकाबला चुनाव को रोचक बना सकता है। हालांकि वास्तविक स्थिति नामांकन पूरा होने और प्रत्याशियों की अंतिम संख्या सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
ऐसे में क्रॉस वोटिंग, अनुपस्थित रहने वाले विधायकों और सहयोगी दलों के रुख पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। पिछले राज्यसभा चुनावों में भी संख्या बल से इतर राजनीतिक रणनीति और क्रॉस वोटिंग ने मुकाबले को प्रभावित किया था, इसलिए इस बार भी अंतिम क्षण तक समीकरणों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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