फर्जी IAS तृप्ति सिंह का नया खेल : होटल लीज और सरकारी नौकरी के नाम पर ₹39.17 लाख ठगे

भोपाल। खुद को ट्रेनी आईएएस और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की अतिरिक्त निदेशक बताकर कथित तौर पर लोगों से ठगी करने वाली तृप्ति सिंह राजपूत के खिलाफ धोखाधड़ी का एक और मामला सामने आया है। बागसेवनिया थाने में तृप्ति सिंह, उसके भाई सुधांशु और अन्य साथियों के खिलाफ 39.17 लाख रुपये की धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई है।
आरोप है कि गिरोह ने होटल और रिसॉर्ट लीज पर दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति से 35.30 लाख रुपये लिए। इसके अलावा सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर 3.87 लाख रुपये की रकम भी कथित तौर पर ऐंठी गई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
‘ट्रेनी IAS’ बताकर जमाती थी रुतबा
पुलिस के मुताबिक, तृप्ति सिंह खुद को ट्रेनी आईएएस अधिकारी बताती थी और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग में अतिरिक्त निदेशक होने का दावा करती थी। लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए वह कथित तौर पर ‘कलेक्टर’ लिखी लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल करती थी।

आरोपियों ने सरकारी पद और प्रशासनिक पहुंच का हवाला देकर लोगों को भरोसे में लिया और फिर होटल-रिसॉर्ट की लीज तथा सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप है।
छापेमारी में मिले फर्जी दस्तावेज
पुलिस की छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद होने की बात सामने आई है। इनमें फर्जी सीबीआई लेटरहेड, आईएएस आई-कार्ड और जाली नियुक्ति पत्र शामिल हैं।
इन दस्तावेजों के जरिए आरोपियों द्वारा अपनी पहचान और कथित सरकारी पहुंच को वास्तविक दिखाने की कोशिश किए जाने का आरोप है। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि इनका इस्तेमाल किन-किन लोगों के साथ ठगी में किया गया।
अशोकनगर में भी दर्ज है ठगी का मामला
तृप्ति सिंह और उसके भाई सुधांशु के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है। पुलिस दोनों को पहले ही अशोकनगर में सामने आए इसी तरह के ठगी के एक मामले में गिरफ्तार कर चुकी है।
अब भोपाल के बागसेवनिया थाने में दर्ज नई एफआईआर के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और फर्जी अधिकारी बनकर कितनी रकम की ठगी की।
पुलिस खंगाल रही पूरा नेटवर्क
नए मामले में पुलिस आरोपियों के संपर्कों, बैंक खातों, दस्तावेजों और कथित तौर पर इस्तेमाल की गई गाड़ियों समेत अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि आरोपियों ने फर्जी आईएएस पहचान और सरकारी दस्तावेज तैयार करने में किन लोगों की मदद ली।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। यदि जांच में और पीड़ित सामने आते हैं तो ठगी की रकम और मामलों की संख्या बढ़ सकती है।
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