मोदी के कार्यकारी भविष्य में 2028-29 हो सकता है महत्वपूर्ण संक्रमण काल: अमिताभ ठाकुर

लखनऊ। पूर्व आईपीएस अधिकारी और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भविष्य को लेकर अपने स्वतंत्र ज्योतिषीय अध्ययन में 2028 के उत्तरार्ध और 2029 को महत्वपूर्ण संक्रमण काल बताया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनका आकलन ज्योतिषीय अध्ययन पर आधारित है, इसे राजनीतिक भविष्यवाणी या किसी निश्चित राजनीतिक घटनाक्रम की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
2028 के अंत में ग्रह-दशा में बदलाव का दावा
अमिताभ ठाकुर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचलित जन्म जानकारी 17 सितंबर 1950, सुबह 11 बजे, वडनगर को आधार मानकर किए गए अध्ययन में वर्तमान मंगल महादशा लगभग 28 नवंबर 2028 के आसपास समाप्त होकर राहु महादशा शुरू होने की संभावना बनती है।
उनका कहना है कि ज्योतिषीय दृष्टि से यह परिवर्तन महत्वपूर्ण माना जा सकता है। उनके आकलन के अनुसार, मजबूत स्थिति वाला मंगल प्रत्यक्ष कार्रवाई, निर्णय क्षमता और अधिकार से जुड़ा माना जाता है, जबकि राहु अलग तरह के बदलाव, पुनर्संरचना या प्रभाव के स्वरूप में परिवर्तन का संकेत दे सकता है।
2027 में वर्तमान अवधि का अंतिम चरण
अमिताभ ठाकुर के अध्ययन के अनुसार, 2027 वर्तमान मंगल-प्रधान अवधि का अंतिम चरण हो सकता है। इसके बाद 2028 के उत्तरार्ध में मंगल से राहु महादशा में संभावित परिवर्तन को वह विशेष महत्व दे रहे हैं।
उनका आकलन है कि 2029 कार्यकारी भूमिका में संभावित बदलाव का महत्वपूर्ण वर्ष हो सकता है। इस निष्कर्ष के पीछे उन्होंने उस अवधि में शनि और गुरु के संभावित गोचर तथा अन्य ज्योतिषीय संकेतों को भी आधार बताया है।
क्या बदल सकती है कार्यकारी भूमिका?
अमिताभ ठाकुर के मुताबिक, ग्रह-दशा और गोचर के इन संकेतों को एक साथ देखने पर 2028-29 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रत्यक्ष कार्यकारी भूमिका या उसके स्वरूप में परिवर्तन की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
हालांकि, उन्होंने किसी निश्चित पद, राजनीतिक घटनाक्रम या सत्ता परिवर्तन का दावा नहीं किया है। उनका कहना है कि ज्योतिषीय संकेतों की व्याख्या संभावनाओं के रूप में ही की जानी चाहिए।
राजनीतिक भविष्यवाणी नहीं होने की दी स्पष्टता
अमिताभ ठाकुर ने अपने अध्ययन को लेकर स्पष्ट किया कि यह स्वतंत्र ज्योतिषीय विश्लेषण है और इसे किसी राजनीतिक घटना की निश्चित घोषणा नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में प्रधानमंत्री की वास्तविक राजनीतिक और कार्यकारी स्थिति संवैधानिक प्रक्रिया, लोकतांत्रिक जनादेश और उस समय की वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियों से ही तय होगी।
ऐसे में 2028-29 को लेकर किया गया यह ज्योतिषीय आकलन फिलहाल संभावनाओं तक सीमित है। वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियां क्या रूप लेती हैं, यह आने वाले वर्षों में होने वाले घटनाक्रमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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