मेधा रूपम को ₹5 लाख वसूली के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक

नई दिल्ली। गौतम बुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के उस हिस्से पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत छात्रा को ₹5 लाख मुआवजा देने और इसकी वसूली संबंधित अधिकारियों, जिसमें जिलाधिकारी भी शामिल थीं, से करने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए प्रक्रिया जारी रखते हुए अपना आदेश सुरक्षित रखा है।
यह मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन से जुड़ा है। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरुद्ध किया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को उनकी NSA हिरासत को रद्द करते हुए मुआवजे का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने मुआवजे की रकम की वसूली उन अधिकारियों से करने को कहा था, जो हिरासत की कार्रवाई की प्रक्रिया में शामिल थे।

मेधा रूपम ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान उनकी ओर से दलील दी गई कि NSA के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया में कई स्तरों पर अधिकारी शामिल होते हैं और जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पूरी जिम्मेदारी के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने इस पहलू पर सवाल उठाया कि जब पूरी प्रक्रिया में कई अधिकारी शामिल थे तो मुआवजे की व्यक्तिगत देनदारी केवल जिलाधिकारी पर कैसे तय की जा सकती है। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले में अगली कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्पष्ट होगी।
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ऑडियो म्यूट किए जाने और मीडिया की पहुंच सीमित किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।
क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश?
2 सितंबर के अपने फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द कर दिया था और ₹5 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया था। अदालत ने हिरासत की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी कड़ी टिप्पणियां की थीं। हाईकोर्ट के आदेश को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और शीर्ष अदालत के अंतिम निर्णय तक मामले के कानूनी पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।
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