बीकानेर से दिल्ली तक 700+ KM की पदयात्रा, दमित गहलोत ने उठाई खाद्य मिलावट के खिलाफ आवाज; अब हर जिले तक पहुंचेगा अभियान

नई दिल्ली। थाली में पहुंचने वाले भोजन की गुणवत्ता और खाद्य पदार्थों में मिलावट के मुद्दे को लेकर राजस्थान के बीकानेर निवासी दमित गहलोत ने 700 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा कर अपनी आवाज दिल्ली तक पहुंचाई। 4 सितंबर 2026 को बीकानेर से शुरू हुई उनकी #FoodRealityMarch 20 दिन बाद दिल्ली के राजघाट पहुंचकर संपन्न हुई। इस दौरान पदयात्रियों ने बीकानेर से दिल्ली तक पैदल सफर करते हुए खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया।
दमित गहलोत की इस मुहिम का उद्देश्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ सख्त कार्रवाई, खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन और आम लोगों को सुरक्षित भोजन के अधिकार के प्रति जागरूक करना बताया गया है। यात्रा के दौरान लोगों से संवाद करते हुए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी जांच को लेकर जागरूकता फैलाने का भी प्रयास किया गया।
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बीकानेर से दिल्ली तक पैदल सफर
दमित गहलोत ने 4 सितंबर को बीकानेर से अपनी पदयात्रा शुरू की। यात्रा चूरू, सीकर, जयपुर, शाहपुरा, नीमराणा और गुरुग्राम होते हुए दिल्ली पहुंची। करीब 700 किलोमीटर से अधिक का सफर पैदल तय करने के बाद अभियान का दिल्ली के राजघाट पर समापन हुआ।

अभियान से जुड़े लोगों के मुताबिक यह पहल किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में नहीं है। इसका फोकस खाद्य सुरक्षा, मिलावट और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को सरकार, नीति-निर्माताओं और आम लोगों तक पहुंचाना है।
क्या हैं दमित गहलोत की प्रमुख मांगें?
अभियान की ओर से खाद्य सुरक्षा को लेकर 12 सूत्रीय मांगें रखी गई हैं। इनमें खाद्य मिलावट के मामलों में कठोर कानून, गंभीर मामलों में मृत्युदंड के प्रावधान की मांग, प्रत्येक जिले में फूड टेस्टिंग लैब की स्थापना और पैकेज्ड फूड पर हेल्थ स्टार रेटिंग तथा हिंदी में Ingredients की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग शामिल है।

इसके साथ ही हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर रोक, भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, खाद्य सुरक्षा मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और FSS Act में सख्त प्रावधान किए जाने जैसी मांगें भी अभियान का हिस्सा हैं।
‘पदयात्रा खत्म हुई है, संकल्प नहीं’
दिल्ली पहुंचने के बाद अभियान ने अपने अगले चरण की घोषणा भी की है। इसके तहत राजस्थान के हर जिले में एक दिवसीय Food Reality March आयोजित करने की योजना है। इसकी शुरुआत झुंझुनूं से किए जाने की बात कही गई है। इसके बाद देश के अन्य राज्यों में भी खाद्य सुरक्षा और मिलावट के खिलाफ जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
अभियान के लिए Legal Cell का गठन भी किया गया है। इसके माध्यम से खाद्य सुरक्षा कानून, उसके प्रवर्तन और उपभोक्ता अधिकारों का अध्ययन किए जाने की बात कही गई है। आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध कानूनी उपायों के जरिए संबंधित मुद्दों को न्यायालय के समक्ष उठाने की योजना भी बताई गई है।

अभियान के संयोजक एडवोकेट जयन्त मूण्ड ने कहा, बीकानेर से दिल्ली तक 700+ किलोमीटर चले कदम अब देश के हर जिले तक जाएंगे। पदयात्रा खत्म हुई है, संकल्प नहीं।
यात्रा के दौरान धमकियों के भी लगाए आरोप
अभियान से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि पदयात्रा के दौरान दमित गहलोत को फोन पर धमकियां मिलने और यात्रा रोकने के प्रयास किए जाने के आरोप भी सामने आए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। दमित गहलोत की ओर से यात्रा जारी रखने की बात कही गई।
सुरक्षित भोजन का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण?
आज बड़ी संख्या में लोग पैकेज्ड फूड, पेय पदार्थ, मसाले, मिठाइयां और बाहर तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, लेबलिंग, जांच और निगरानी उपभोक्ता सुरक्षा से सीधे जुड़े विषय हैं।
दमित गहलोत की पदयात्रा इसी व्यापक मुद्दे को जनचर्चा में लाने का प्रयास है। अभियान के जरिए नियमित और सख्त खाद्य जांच, मिलावट करने वालों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई, कंपनियों और विक्रेताओं की जवाबदेही तथा खाद्य सुरक्षा नियमों के कड़ाई से पालन की मांग उठाई जा रही है।
बीकानेर से शुरू हुई यह पदयात्रा भले ही दिल्ली पहुंचकर समाप्त हो गई हो, लेकिन अभियान से जुड़े लोगों के मुताबिक अब इसका अगला लक्ष्य राजस्थान के हर जिले और फिर देश के अन्य हिस्सों तक खाद्य सुरक्षा की आवाज पहुंचाना है।
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