विधान परिषद सभापति कुँवर मानवेन्द्र सिंह ने दो स्थायी समितियों की पहली बैठकों का किया उद्घाटन

विशेषाधिकार और आश्वासन समिति की बैठकों में सभापति ने सदन की गरिमा, सदस्यों के अधिकार और जवाबदेही पर दिया जोर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुँवर मानवेन्द्र सिंह ने सोमवार को विधान भवन में वर्ष 2026-27 के लिए पुनर्गठित दो प्रमुख स्थायी समितियों—विशेषाधिकार समिति और आश्वासन समिति—की प्रथम बैठकों का विधिवत उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने दोनों समितियों के सभापतियों और सदस्यों को संबोधित करते हुए उनके दायित्वों और सदन की कार्यप्रणाली में समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
दोनों बैठकों का आयोजन विधान परिषद के द्वितीय तल स्थित सभापति कक्ष संख्या-26 में किया गया। इस अवसर पर विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह, विशेष सचिव मुनेश कुमार, अनुसचिव एवं विधायी अधिकारी संजय कुमार समेत सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
विशेषाधिकार समिति की पहली बैठक
विशेषाधिकार समिति की प्रथम बैठक अपराह्न 3 बजे आयोजित हुई। समिति में कुल 10 सदस्य हैं और श्री मानवेन्द्र सिंह को कार्यकारी सभापति बनाया गया है।
समिति के सदस्यों में ध्रुव कुमार त्रिपाठी, पदमसेन चौधरी, अशोक अग्रवाल, सत्यपाल सिंह, हरि ओम पाण्डेय, डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह ‘गुरु जी’, अशोक कटारिया, शाह आलम और विच्छे लाल राम शामिल हैं।
बैठक के उद्घाटन अवसर पर सभापति कुँवर मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि विधान मंडल की समितियां सदन का लघु रूप होती हैं और सदन का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने विशेषाधिकार समिति को विधान परिषद की अत्यंत महत्वपूर्ण समितियों में से एक बताया।

‘सदस्यों के सम्मान और प्रतिष्ठा की रक्षा समिति की जिम्मेदारी’
सभापति ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को संविधान और सदन के माध्यम से मिले अधिकारों का सुचारू रूप से अनुपालन होना आवश्यक है। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति द्वारा जाने-अनजाने में किसी सदस्य के अधिकार या सम्मान की अवहेलना होती है तो ऐसे मामले सदन के समक्ष आते हैं।
उन्होंने बताया कि सदन द्वारा मामलों को गुण-दोष के आधार पर समिति के विचारार्थ भेजा जाता है। इसके बाद संबंधित अधिकारी या कर्मचारी समिति के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखते हैं और साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। सभी तथ्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद समिति अपना निर्णय देती है।
सभापति ने समिति के सभी सदस्यों को अनुभवी और विद्वान बताते हुए विश्वास जताया कि वे अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।
आश्वासन समिति की बैठक भी हुई
इसके बाद अपराह्न 3:30 बजे आश्वासन समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई। इस समिति के सभापति शाहनवाज खान हैं। समिति में कुल 11 सदस्य हैं।
समिति के सदस्यों में देवेन्द्र प्रताप सिंह, किरण पाल कश्यप, उमेश द्विवेदी, सी.पी. चन्द, नरेन्द्र सिंह भाटी, रमा निरंजन, अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह, अरूण पाठक, साकेत मिश्रा और राय धर्मेन्द्र सिंह शामिल हैं।
1958 में गठित हुई थी आश्वासन समिति
बैठक को संबोधित करते हुए विधान परिषद सभापति कुँवर मानवेन्द्र सिंह ने आश्वासन समिति के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह समिति वर्ष 1958 में गठित की गई थी और तब से सदन के महत्वपूर्ण कार्यों में अपनी भूमिका निभा रही है।
उन्होंने समिति के सदस्यों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनके कार्य के दौरान यदि किसी प्रकार की कठिनाई आती है और उसका समाधान उनके स्तर से संभव होगा तो वह उसका निराकरण करने का प्रयास करेंगे।
सभापति ने विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह की कार्यकुशलता और अनुभव की सराहना करते हुए कहा कि वे समिति के सदस्यों को आवश्यक सहयोग प्रदान करते रहेंगे।
दोनों समितियों के सदस्यों को दी शुभकामनाएं
सभापति कुँवर मानवेन्द्र सिंह ने दोनों समितियों के सभापतियों और सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों समितियां अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करते हुए विधान परिषद की कार्यप्रणाली को और मजबूत बनाने में योगदान देंगी।
बैठक के दौरान समिति के कार्यों, सदस्यों की जिम्मेदारियों और सचिवालय स्तर से मिलने वाले सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई। सभापति ने सदन की गरिमा और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ समितियों के माध्यम से प्रभावी विधायी कार्य सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
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