काशी में कला और कारोबार का महाकुंभ, बनारस बिनाले में जुटेंगे 100 दिग्गज उद्योगपति

वाराणसी। अपनी प्राचीन परंपराओं, कला, संगीत और हस्तशिल्प के लिए दुनिया भर में पहचान रखने वाली काशी अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन की मेजबानी करने जा रही है। 27 नवंबर से 31 दिसंबर 2026 तक शहर में सीआईआई बनारस बिनाले का आयोजन होगा। इसमें देश-विदेश के कलाकारों, कला विशेषज्ञों, उद्यमियों और उद्योग जगत की हस्तियों के जुटने की तैयारी है। आयोजन से देश के शीर्ष 100 उद्योगपतियों को जोड़ने की योजना भी सामने आई है।
इस बिनाले की मुख्य थीम ‘काशी/लाइट: सिटी ऐज सेंसरियम’ रखी गई है। इसका उद्देश्य बनारस को केवल एक ऐतिहासिक और धार्मिक नगर के रूप में नहीं, बल्कि जीवंत कला, शिल्प, संगीत, विचार और रचनात्मकता के केंद्र के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है। इस आयोजन का संचालन भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) कर रहा है। इसमें संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार और काशी हिंदू विश्वविद्यालय सहित कई संस्थागत भागीदार जुड़े हैं।
PM मोदी और CM योगी के आने पर टिकी निगाहें
काशी बिनाले के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किए जाने से आयोजन को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि, दोनों नेताओं के वाराणसी आगमन और कार्यक्रम में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में सभी की निगाहें उनके संभावित कार्यक्रम पर टिकी हैं।
काशी बिनाले के जरिए वाराणसी की पहचान को धार्मिक पर्यटन से आगे बढ़ाकर कला, संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की योजना है।

शहर के अलग-अलग स्थानों पर होंगे कार्यक्रम
बिनाले किसी एक प्रदर्शनी स्थल तक सीमित नहीं रहेगा। इसकी गतिविधियां शहर के कई सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्रों में आयोजित होंगी। भारत कला भवन, बीएचयू, ज्ञान प्रवाह, नागरी प्रचारिणी सभा, नमो घाट और पेशवा हवेली जैसे स्थान कार्यक्रमों का हिस्सा होंगे। यहां कला और फोटोग्राफी प्रदर्शनियों, वस्त्र एवं हस्तशिल्प, संगीत, फिल्म, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संवाद सत्रों के माध्यम से बनारस की विरासत को अलग-अलग रूपों में सामने लाया जाएगा।
आयोजन के शुरुआती चरण में 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं। इसके बाद 2 से 31 दिसंबर तक अलग-अलग प्रदर्शनियां और सार्वजनिक गतिविधियां जारी रहेंगी। कार्यक्रम में संग्रहालय भ्रमण, कला प्रदर्शनियां, शिल्प से जुड़े सत्र, संगीत और विचार-विमर्श भी शामिल हैं।
उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी
बनारस बिनाले में देश के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ विभिन्न देशों से कला, संस्कृति और उद्यमिता से जुड़े प्रतिनिधियों को आमंत्रित किए जाने की तैयारी है। आयोजन को उद्योग, कला और सांस्कृतिक विरासत के बीच संवाद का मंच बनाने की योजना है। इससे बनारस के पारंपरिक शिल्प और स्थानीय उत्पादों को नए बाजारों तथा संभावित निवेशकों तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है।
बुनकरों और युवाओं के लिए भी पहल
इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पक्ष स्थानीय बुनकरों और कारीगरों से जुड़ी योजनाएं हैं। सीआईआई की ओर से वाराणसी के रामनगर, लोहता और बड़ी बाजार के बुनकर समूहों के लिए स्वास्थ्य संबंधी पहल प्रस्तावित है। इसके दायरे में लगभग 4,000 से 5,000 बुनकर परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य बताया गया है।
इसके अलावा कारीगरों के कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण संस्थान, मॉडल करियर सेंटर और बीएचयू में उद्योग आधारित करियर सहायता केंद्र जैसी पहल भी प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य पूर्वांचल के युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण तथा रोजगार से जोड़ना है।
काशी की पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाने की तैयारी
बनारस बिनाले के जरिए शहर की विरासत को आधुनिक कला और वैश्विक रचनात्मक गतिविधियों के साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है। आयोजन में घाटों, मंदिरों, संगीत, बनारसी वस्त्र और हस्तशिल्प की परंपरा को व्यापक सांस्कृतिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि इस आयोजन से काशी के कलाकारों, बुनकरों, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को किस तरह के नए अवसर मिलते हैं।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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