6 घंटे से बेकाबू काशी नरेश का हाथी, जंगल की ओर भागा; 13 साल से देखभाल कर रहे महावत पर किया हमला

रामनगर के पंचवटी इलाके में घटना से मचा हड़कंप
महावत छपालू की हालत गंभीर
पुलिस और वन विभाग की टीमें हाथी को नियंत्रित करने में जुटीं
रामलीला और भरत मिलाप की परंपरागत सवारी पर भी उठे सवाल
वाराणसी। काशी की ऐतिहासिक परंपराओं से जुड़े रामनगर में रविवार को एक हाथी के बेकाबू होने से हड़कंप मच गया। काशी नरेश अनंत नारायण सिंह के इस हाथी ने अपने ही महावत छपालू पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। करीब 13 वर्षों से हाथी की देखभाल कर रहे छपालू को किसी तरह बचाकर अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, हाथी के काबू में नहीं आने से प्रशासन और वन विभाग की चुनौती बढ़ गई है। घटना के करीब छह घंटे बाद भी हाथी को नियंत्रित करने के प्रयास जारी थे।
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रोजाना की तरह सेवा के दौरान अचानक बदला हाथी का व्यवहार
जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह महावत छपालू ने रोजाना की तरह हाथी को नहलाया-धुलाया और भोजन कराया। इसी दौरान हाथी अचानक बेकाबू हो गया। उसने छपालू को पटक दिया और अपने दांतों से शरीर के कई हिस्सों में चोट पहुंचाई। हमले में गंभीर रूप से घायल महावत को हाथी से अलग कर तत्काल ट्रॉमा सेंटर भेजा गया, जहां उसकी हालत चिंताजनक बताई गई।

आजमगढ़ निवासी छपालू लंबे समय से काशी नरेश के हाथी की देखभाल कर रहे थे। इतने वर्षों तक हाथी के साथ रहने और उसकी सेवा करने वाले महावत पर उसी के हमले की घटना ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।
आबादी के बीच से जंगल की ओर भागा हाथी
घटना रामनगर के पंचवटी इलाके में हुई, जहां काशी नरेश के तीन हाथी रखे जाते हैं। हाथी के अचानक उग्र होने की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। स्थानीय लोगों की मौजूदगी और पुलिस बल की हलचल के बीच बेकाबू हाथी जंगल की ओर भाग गया।
घनी आबादी से सटे इस इलाके में हाथी की मौजूदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। वन विभाग की टीम उसे सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने में जुटी रही। हाथी के जंगल की ओर चले जाने के बाद उसे पकड़ने की चुनौती और बढ़ गई, क्योंकि अभियान के दौरान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
13 साल पुराने साथ के बाद भी क्यों उग्र हुआ हाथी?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रोजाना देखभाल करने वाले महावत पर हाथी ने हमला क्यों किया। फिलहाल हाथी के अचानक बेकाबू होने की वजह स्पष्ट नहीं है। उसके व्यवहार में बदलाव के कारणों का पता जांच और विशेषज्ञों के आकलन के बाद ही चल सकेगा।

रामलीला और भरत मिलाप की परंपरा पर भी चर्चा
काशी नरेश की हाथी पर सवारी रामनगर की रामलीला और नाटी इमली के प्रसिद्ध भरत मिलाप से जुड़ी परंपरा का अहम हिस्सा रही है। इसी हाथी पर सवार होकर काशी नरेश इन आयोजनों में पहुंचते हैं और जनता को दर्शन देते हैं।
ऐसे में हाथी के बेकाबू होने की घटना ने आगामी आयोजनों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इस बार काशी नरेश की सवारी किस तरह निकलेगी, इस पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल प्राथमिकता हाथी को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने और घायल महावत के उपचार की है।
लेखक के बारे में
Anup Sharma
मूल रूप से वाराणसी, उत्तर प्रदेश के रहने वाले अनूप कुमार शर्मा पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और डिजिटल तकनीक एवं मीडिया के क्षेत्र में विशेष रुचि रखते हैं। तकनीकी दक्षता के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली और बदलती मीडिया तकनीकों को समझने में उनकी गहरी दिलचस्पी है। डिजिटल मीडिया के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच वे नई तकनीकों, वेब प्लेटफॉर्म, डिजिटल कंटेंट और ऑनलाइन मीडिया टूल्स को सीखने और उन्हें प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। तकनीकी सोच और रचनात्मक दृष्टिकोण का बेहतर तालमेल उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। मीडिया और तकनीक के बीच बढ़ते संबंधों को वे भविष्य की पत्रकारिता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। तकनीकी नवाचारों के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता को अधिक तेज, प्रभावी और पाठक-केंद्रित बनाने में उनकी विशेष रुचि है। Anup Sharma की सभी खबरें देखें →
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