स्कूलों में अव्यवस्था के खिलाफ उतरे छात्रों को मिला किसान संगठन का साथ
अजय सिंह
लखनऊ/आजमगढ़। सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने स्कूलों में अव्यवस्था के खिलाफ बेहतर सुविधाओं के लिए आवाज उठा रहे नौनिहालों के आंदोलन का समर्थन किया। किसान संगठनों ने ऐलान किया कि किसानों-मजदूरों के बच्चों के भविष्य को बर्बाद नहीं होने देंगे, स्कूलों की सोशल आडिट की जाएगी।
सोशलिस्ट किसान सभा महासचिव राजीव यादव और पूर्वांचल किसान यूनियन महासचिव विरेंद्र यादव ने कहा कि किसानों-मजदूरों के बच्चों द्वारा स्कूलों में अव्यवस्था के खिलाफ उठाई जा रही आवाज का किसान संगठन समर्थन करते हैं। यह लड़ाई गांव, कस्बे और मोहल्ले तक लड़ी जाएगी। देश में वन नेशन वन इलेक्शन की बात हो रही है, एक देश एक टैक्स की बात हो रही तो आखिर वन नेशन वन एजुकेशन की बात क्यों नहीं हो रही है। संसद के शीतकालीन सत्र में किसान संगठन मांग करेंगे कि एक बिल लाकर देश में एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू किया जाए। सरकार को हर हाल में कामन स्कूल सिस्टम लागू करना पड़ेगा ताकि देश के नौनिहालों के साथ न्याय हो सके। आंदोलनकारियों को चाहे नक्सली कहो, चाहे खालिस्तानी कहो, चाहे पाकिस्तानी कहो, चाहे दिमागी नक्सल कहो अब यह अपना अधिकार लिए बगैर मानने वाले नहीं है।
किसान नेताओं ने कहा कि पूरे देश में बेरोजगारी, भर्ती, भ्रष्टाचार, पेपर लीक जैसे मसलों को लेकर नौजवान सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। वहीं स्कूलों में सुविधाओं की मांग को लेकर छात्र लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूल ठीक करने की मांग कर रहे हैं। स्कूल जाने के लिए अच्छी सड़कों की मांग कर रहे हैं। मिड डे मील में अच्छे खाने पर बात कर रहे हैं। हुक्मरानों को संभल जाना चाहिए कि इस देश के नौजवान ही नहीं बच्चे भी उनसे आंख से आंख मिलकर जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे।
गौरतलब है कि आजादी के 80 साल बीत जाने के बाद भी गांव के प्राइमरी स्कूलों में न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। देश में जहां अमीरों के बच्चों को पढ़ने के लिए एयर कंडीशन क्लासरूम से लेकर लैपटॉप-कंप्यूटर की सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं तो वहीं ग्रामीण परिवेश के बच्चे ज्यादातर टाट पट्टी और पंखे के लिए तरस रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों का अभाव है, बच्चों को बैठने के लिए एक अदद डेक्स-बेंच तक की व्यवस्था नहीं है। उमस और गर्मी से निजात दिलाने के लिए कूलर तो छोड़िए क्लासरूम में सीलिंग फैन तक नहीं। बहुत सारे स्कूल ऐसे हैं जहां बिजली का कनेक्शन तक नहीं है। मिड डे मील के नाम पर हाथ में कटोरा पकड़ा दिया गया।
विकसित भारत का दावा करने वाली सरकार बच्चों के लिए ठीक से मिड डे मील और साफ पानी का इंतजाम नहीं कर पाई। ऐसे दौर में जब बच्चे सड़क पर उतरकर अपना स्कूल ठीक करने की मांग कर रहे, अपने स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की मांग कर रहे हैं तो यह उनकी जायज मांगे हैं। प्राथमिक स्कूलों में शौचालय तक की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है और सफाई कर्मी तक का इंतजाम नहीं है। छोटे बच्चों के लिए दाई नहीं हैं और इनसे उम्मीद की जाती है यह बच्चे एयर कंडीशनर क्लास रूम में बैठकर पढ़ने वाले बच्चों के साथ कंपटीशन करेंगे।
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